13 प्रेरक प्रसंग और प्रेरणादायक कहानियाँ | Best Motivational Stories in Hindi
जीवन में सफलता और प्रेरणा की तलाश हर किसी को होती है। कुछ लोग कठिनाइयों से हार मान लेते हैं, जबकि कुछ लोग उन मुश्किलों को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ते हैं।
ऐसे ही लोगों की कहानियाँ और अनुभव हमें नई दिशा देते हैं। इस लेख में हम लेकर आए हैं 13 प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) और प्रेरणादायक कहानियाँ (Motivational Stories in Hindi) जो आपके जीवन के नजरिए को बदल देंगी।
हर कहानी अपने भीतर एक अनमोल शिक्षा छुपाए हुए है — चाहे वह दशरथ मांझी – माउंटेन मैन की अदम्य जिद हो, तितली का संघर्ष हो, गधे और गड्ढे की हिम्मत हो या बहरे मेंढक का आत्मविश्वास — ये सभी प्रसंग हमें बताते हैं कि हार मान लेना कभी समाधान नहीं होता।
यह संग्रह उन सभी के लिए है जो जीवन में प्रेरणा, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की तलाश में हैं। इन Moral Stories in Hindi के ज़रिए आप जानेंगे कि छोटी-छोटी बातों में भी बड़ी सीख छुपी होती है। हर कहानी आपको यह याद दिलाएगी — “अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी पहाड़ रास्ता बन जाता है।
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आईए पढ़ते हैं ज़िन्दगी बदल देने वाले प्रेरक और प्रेरणादायक कहानियाँ (प्रेरक प्रसंग) Best 13Short Motivational stories in Hindi (Prerak Prasang)
1. छोटे बच्चे की बड़ी सोच – वो 15 रुपये का सबक (Small Kid’s Big Thinking Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक छोटा सा लड़का गर्मी के दिनों में अकेले एक होटल में गया। वह बहुत विनम्र और सीधा-सादा बच्चा था। होटल काफी अच्छा था, और वहाँ आने वाले ज़्यादातर ग्राहक अमीर लोग थे। लेकिन वह बच्चा साधारण कपड़ों में था और उसके चेहरे पर एक मासूम मुस्कान थी।
थोड़ी देर में वेटर उसके पास आया और बोला — “क्या लेंगे सर?”
बच्चे ने विनम्रता से पूछा, “वैनिला आइसक्रीम कितने की है?” वेटर ने उत्तर दिया, “50 रुपये की है, सर।”
यह सुनकर वह बच्चा कुछ देर चुप हो गया। उसने अपने जेब में हाथ डाला, सिक्के निकाले और उन्हें ध्यान से गिनने लगा। गिनती करते हुए उसके चेहरे पर हल्की सोच झलक रही थी।
उसने कुछ पल रुककर फिर पूछा — “संतरा फ्लेवर आइसक्रीम कितने की है?”
थोड़ा अधीर वेटर बोला — “35 रुपये की है, सर।”
बच्चे ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, मेरे लिए एक संतरा फ्लेवर आइसक्रीम ले आइए।”
वेटर ने सिर हिलाया और थोड़ी देर में आइसक्रीम लेकर आ गया। उसने प्लेट और बिल दोनों बच्चे की मेज़ पर रखे और फिर दूसरे ग्राहकों की ओर चला गया।
वह छोटा बच्चा बड़े ध्यान से आइसक्रीम खाने लगा। उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी — जैसे यह उसके लिए किसी त्योहार जैसा पल हो। आइसक्रीम खत्म करने के बाद उसने सावधानी से पैसे मेज़ पर रखे — 35 रुपये आइसक्रीम के, और उसके पास बची हुई 15 रुपये की रकम वहीं सलीके से रख दी।
इसके बाद वह बच्चा धीरे-धीरे होटल से बाहर चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वेटर वापस आया, तो उसकी नज़र मेज़ पर पड़ी। पहले उसने 35 रुपये गिने और फिर देखा कि वहाँ अतिरिक्त 15 रुपये भी रखे हैं। उसे समझ में आया — वह बच्चा 50 रुपये लेकर आया था, लेकिन उसने महँगी आइसक्रीम नहीं ली ताकि उस वेटर को टिप (Tip) दे सके।
वेटर कुछ पल के लिए वहीं खड़ा रह गया। उसकी आँखें नम हो गईं। उसने सोचा —
“एक छोटा बच्चा, जो खुद मुश्किल से अपनी आइसक्रीम के पैसे जुटा पाया, उसने अपने आनंद से पहले किसी और की खुशी के बारे में सोचा।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
कभी-कभी ज़िंदगी में बड़ी बातें करने की ज़रूरत नहीं होती — छोटी-छोटी संवेदनाएँ ही इंसानियत की असली पहचान होती हैं। उस बच्चे ने हमें यह सिखाया कि अगर हमारे पास सीमित संसाधन भी हों, तो भी हम दूसरों के बारे में सोच सकते हैं।
आज के समय में जब हर कोई अपने फायदे की सोचता है, उस छोटे बच्चे ने दिखा दिया कि असली खुशी देने में होती है, लेने में नहीं।
हमें भी यही सीखना चाहिए कि अपने निर्णयों में सिर्फ अपने नहीं, बल्कि दूसरों के हित का भी ध्यान रखें। दूसरों की मदद करने के लिए हमें अमीर होने की ज़रूरत नहीं — सिर्फ एक दयालु दिल और सोच की ज़रूरत है।
संक्षेप में शिक्षा:
“बड़ा दिल होना, बड़ी जेब होने से कहीं ज़्यादा कीमती है।”
2. पिता और पुत्र की ट्रेन यात्रा – एक प्रेरक प्रसंग (Father and Son Train Journey Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक पिता अपने 24 वर्षीय पुत्र के साथ ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। ट्रेन स्टेशन से चलने ही वाली थी। बेटा बहुत उत्साह में था और बार-बार अपने पिता से कह रहा था — “पिताजी, मैं खिड़की के पास बैठना चाहता हूँ!” पिता मुस्कुराए और बिना कोई झिझक अपनी सीट बेटे को दे दी।
बेटा बड़ी खुशी के साथ खिड़की के पास बैठ गया। जैसे ही ट्रेन ने रफ्तार पकड़ी, बेटे की आँखें चमक उठीं। वह उत्साह से चिल्लाने लगा — “देखिए पिता जी! पेड़ पीछे जा रहे हैं! पुल भी पीछे छूट गया! बादल भी पीछे भाग रहे हैं!”
उसके चेहरे पर आश्चर्य, खुशी और एक अनोखी चमक थी। पिता मुस्कुरा रहे थे और बेटे की हर बात पर सिर हिला रहे थे — मानो वह अपने बेटे के इस नए अनुभव को पूरी तरह जी रहे हों।
लेकिन पास बैठे कुछ यात्री यह सब देखकर असहज हो गए। वे एक-दूसरे से फुसफुसाने लगे — “इतना बड़ा लड़का और ऐसी हरकतें! शायद इसके दिमाग में कुछ समस्या है।” किसी ने धीरे से कहा, “बेचारे पिता को बहुत परेशानी होती होगी।”
काफ़ी देर तक जब वह युवक उत्साह से चीज़ें दिखाता रहा — नदी, खेत, पहाड़, आसमान — तब पास बैठे एक यात्री से रहा नहीं गया।
उसने पिता से कहा, “माफ़ कीजिएगा, लेकिन आप अपने बेटे को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते? लगता है उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।”
पिता ने मुस्कुराकर जवाब दिया — “हम अभी डॉक्टर के पास से ही लौट रहे हैं।”
यह सुनकर वह यात्री हैरान रह गया। उसने जिज्ञासा से पूछा, “क्या कहा आपने? डॉक्टर के पास से लौट रहे हैं?”
पिता ने शांत स्वर में कहा, “हाँ… मेरा बेटा जन्म से अंधा था। कुछ दिन पहले ही उसकी आँखों का ऑपरेशन हुआ है। किसी दानवीर ने अपनी आँखें दान कीं, जिससे इसे अब दुनिया देखने का अवसर मिला है। आज इसने पहली बार अपने जीवन में पेड़, नदी, आसमान और बादल देखे हैं। यही कारण है कि वह इतने उत्साह से सब कुछ देख रहा है — जैसे कोई बच्चा पहली बार इस सुंदर दुनिया को देखता है।”
यह सुनकर वहाँ बैठे सभी यात्री मौन हो गए। कुछ के चेहरे पर शर्मिंदगी थी, तो कुछ के आँखों में नमी।
जिस युवक को वे “पागल” समझ रहे थे, असल में वह जीवन की नई सुबह का आनंद ले रहा था।
वह उस पल को जी रहा था, जिसके लिए उसने सालों तक सिर्फ कल्पना की थी।
थोड़ी देर बाद वह यात्री धीरे से बोला — “हमें माफ़ कर दीजिए… हम आपके बेटे के बारे में जाने बिना ही राय बना बैठे।” पिता मुस्कुराए और बोले — “कोई बात नहीं, जनाब। यह दुनिया वैसे ही है — लोग वही देखते हैं जो आँखों के सामने होता है, लेकिन सच्चाई अक्सर उसके पीछे छिपी होती है।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ज़िंदगी में किसी के बारे में राय बनाने से पहले उसकी सच्चाई जानना बेहद ज़रूरी है। कभी-कभी जो हमें दिखाई देता है, वह पूरा सच नहीं होता। हर व्यक्ति की कहानी, उसकी परिस्थितियाँ और उसके अनुभव हमसे अलग होते हैं।
इसलिए किसी के व्यवहार, बोलचाल या हावभाव को देखकर तुरंत निर्णय लेना अनुचित है। कभी-कभी जो हमें “असामान्य” लगता है, वही किसी के जीवन का सबसे “खूबसूरत क्षण” हो सकता है।
हमेशा दूसरों के प्रति सहानुभूति और समझदारी से पेश आना चाहिए। क्योंकि जब सच्चाई सामने आती है, तो वही लोग शर्मिंदा होते हैं जिन्होंने बिना जाने निर्णय ले लिया होता है।
संक्षेप में शिक्षा:
“कभी किसी को उसके हालात जाने बिना मत आंकिए। हर इंसान की एक अनकही कहानी होती है।”
3. बहरे मेंडक की कहानी : प्रेरक प्रसंग (Deaf Frog Story in Hindi)

एक हरे-भरे तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे। उस तालाब के बीचोंबीच एक बड़ा-सा लोहे का खंभा खड़ा था, जिसे वहाँ के राजा ने लगवाया था। एक दिन मेंढकों के समूह में किसी ने प्रस्ताव रखा — “क्यों ना हम इस खंभे पर चढ़ने की प्रतियोगिता करें? जो ऊपर तक पहुँच जाएगा, वही विजेता कहलाएगा।” सभी मेंढक इस विचार से बहुत उत्साहित हो गए। अगले दिन रेस का दिन तय हुआ, और कुछ ही दिनों में पूरे इलाके के मेंढकों में इस रेस की चर्चा फैल गई।
आख़िरकार वह दिन आ गया जिसका सभी को इंतज़ार था। दूर-दूर के तालाबों से भी मेंढक प्रतियोगिता में भाग लेने आए। वहाँ सैकड़ों मेंढक रेस देखने के लिए एकत्रित थे। चारों तरफ़ जोश और उत्साह का माहौल था। जैसे ही रेस शुरू हुई, चारों ओर से आवाज़ें आने लगीं —
“अरे, ये तो असंभव है!”
“कोई भी इस चिकने खंभे पर नहीं चढ़ सकता!”
“यह बहुत ऊँचा है, सब गिर जाएँगे!”
हर मेंढक अपनी-अपनी जगह से यह बातें बोल रहा था। लेकिन कुछ साहसी मेंढक खंभे पर चढ़ने लगे। कुछ थोड़ा ऊपर गए, लेकिन फिर फिसलकर नीचे गिर पड़े। बार-बार कोशिश के बाद भी कोई ऊपर नहीं पहुँच पा रहा था।
धीरे-धीरे कई मेंढकों का हौसला टूट गया। जो नीचे से चिल्ला रहे थे, उन्होंने और ज़ोर से कहना शुरू कर दिया —
“यह नामुमकिन है!”
“बेकार कोशिश मत करो!”
“कोई भी इस खंभे पर नहीं चढ़ सकता!”
इन नकारात्मक बातों को सुनकर बहुत से मेंढकों ने प्रयास करना छोड़ दिया। लेकिन उनमें से एक छोटा मेंढक ऐसा था जो हार मानने को तैयार नहीं था। वह बार-बार गिरता, फिर उठता, फिर कोशिश करता। हर बार गिरने के बाद वह पहले से ज़्यादा जोश के साथ फिर ऊपर बढ़ता।
दूसरे मेंढक उसका मज़ाक बना रहे थे — “देखो यह पागल अभी भी कोशिश कर रहा है!”
लेकिन उस छोटे मेंढक के चेहरे पर आत्मविश्वास था। और अंत में, लगातार प्रयासों के बाद, वह खंभे के ऊपर तक पहुँच गया!
सभी मेंढक हैरान रह गए। जो चीज़ सबको असंभव लग रही थी, वह उसने कर दिखाया। अब वह विजेता था।
बाकी मेंढक उसके पास आए और पूछने लगे —
“भाई, यह कैसे हुआ? जब हम सब गिर गए, तब भी तुम कैसे डटे रहे? आखिर तुम्हें यह हिम्मत कहाँ से मिली?”
उसी समय पीछे से किसी ने कहा —
“अरे उससे क्या पूछते हो, वो तो बहरा है!”
यह सुनकर सब चौंक गए। वे विजेता मेंढक के पास गए और इशारों में पूछा कि उसने यह कैसे किया।
विजेता मेंढक ने मुस्कुराते हुए कहा —
“मुझे सुनाई नहीं देता। जब आप लोग नीचे से चिल्ला रहे थे, तो मुझे लगा जैसे आप सब मेरा उत्साह बढ़ा रहे हैं। मुझे लगा आप कह रहे हैं — ‘तुम यह कर सकते हो!’ यही सोच मेरे अंदर हिम्मत भरती रही, और मैं कभी रुका नहीं।”
सभी मेंढक अवाक् रह गए। वे समझ गए कि सफलता पाने के लिए कभी-कभी दुनिया की नकारात्मक आवाज़ों से बहरे हो जाना पड़ता है।
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, यह बहरे मेंढक की कहानी केवल एक प्रतियोगिता की नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी की सच्चाई है। जब भी हम कोई बड़ा काम करने की सोचते हैं, तो दुनिया हमें डराने लगती है —
“यह नामुमकिन है!”
“तुम नहीं कर पाओगे!”
“तुम्हारे बस की बात नहीं है!”
धीरे-धीरे हम इन बातों पर विश्वास कर लेते हैं और अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। लेकिन जो लोग इन नकारात्मक आवाज़ों को अनसुना कर आगे बढ़ते हैं, वही एक दिन सफलता की ऊँचाई तक पहुँचते हैं।
सफलता उन्हीं को मिलती है जो खुद पर भरोसा रखते हैं, गिरकर भी उठते हैं, और दूसरों की बातों से अपना हौसला नहीं गिरने देते।
इसलिए, अगर आप अपने सपनों को सच करना चाहते हैं, तो उन आवाज़ों के प्रति “बहरे” बन जाइए जो आपको रोकती हैं, और सिर्फ अपने “दिल की आवाज़” सुनिए जो कहती है – “हाँ, तुम कर सकते हो!”
संक्षेप में शिक्षा:
“कभी दूसरों की नकारात्मक बातों को अपनी सच्चाई मत बनने दो — क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो सुनते नहीं, बस करते हैं।”
4. हाथी और छह अंधे व्यक्ति की कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Elephant and Six Blind Men Story in Hindi)

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में छह अंधे व्यक्ति रहते थे। वे सब बहुत अच्छे दोस्त थे और आपस में प्रेमपूर्वक जीवन व्यतीत करते थे। एक दिन गाँव में खबर फैली कि गाँव के पास एक हाथी आया है। यह सुनकर सभी अंधे व्यक्ति बहुत उत्साहित हो गए।
उन्होंने आपस में कहा — “हम भले ही देख नहीं सकते, लेकिन हम हाथी को छूकर महसूस तो कर ही सकते हैं। इससे हमें पता चलेगा कि आखिर हाथी होता कैसा है।”
सब एक साथ हाथी के पास पहुँचे और बारी-बारी से उसे छूने लगे।
पहला अंधा व्यक्ति हाथी के पैरों को छूने लगा। उसने कहा — “अरे! हाथी तो एक बड़े खंभे जैसा होता है।”
दूसरा व्यक्ति हाथी की पूँछ पकड़कर बोला — “नहीं-नहीं, हाथी तो एक रस्सी की तरह होता है।”
तीसरे व्यक्ति ने हाथी के सूंड को पकड़ते हुए कहा — “तुम दोनों गलत हो, हाथी तो एक बड़ी नली की तरह होता है।”
चौथे व्यक्ति ने हाथी के कान को छूते हुए कहा — “तुम सब कुछ नहीं जानते, हाथी तो सूपे (पंखे) की तरह होता है।”
पाँचवाँ व्यक्ति हाथी के पेट पर हाथ फेरते हुए बोला — “अरे नहीं! हाथी तो एक बड़ी दीवार जैसा होता है।”
और छठे व्यक्ति ने हाथी के दाँत को छूते हुए कहा — “तुम सब ग़लत हो, हाथी तो कठोर भाले की तरह होता है।”
अब सभी एक-दूसरे से बहस करने लगे। हर कोई अपनी बात को सही और दूसरों की बात को गलत साबित करने पर अड़ा हुआ था। धीरे-धीरे बहस इतनी बढ़ गई कि ऐसा लगने लगा जैसे वे आपस में लड़ ही पड़ेंगे।
तभी वहाँ से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुज़र रहा था। उसने उन्हें झगड़ते देखा और पूछा — “भाइयों, क्या हुआ? तुम सब आपस में क्यों बहस कर रहे हो?”
अंधे व्यक्तियों ने कहा — “हम यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि हाथी वास्तव में कैसा होता है। हर कोई अलग बात कह रहा है।”
बुद्धिमान व्यक्ति मुस्कुराया और बोला — “पहले मुझे बताओ, तुम सबने हाथी के कौन-कौन से हिस्से को छुआ?”
सभी ने बारी-बारी से बताया कि किसने कौन-सा हिस्सा छुआ था। फिर वह व्यक्ति बोला — “अब समझो, तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो। लेकिन तुम में से किसी ने भी पूरा हाथी नहीं देखा या महसूस किया। हर किसी ने हाथी का सिर्फ एक हिस्सा छुआ, इसलिए हर किसी की राय अधूरी है।”
उसकी बातें सुनकर सभी अंधे व्यक्ति शांत हो गए। उन्हें एहसास हुआ कि सबकी बात में सच्चाई है, लेकिन वह आंशिक है, पूर्ण नहीं।
बुद्धिमान व्यक्ति ने आगे कहा — “अगर तुम सब अपने अनुभवों को जोड़ दो, तो तुम्हें हाथी का असली स्वरूप समझ में आ जाएगा। लेकिन अगर तुम केवल अपनी बात पर अड़े रहोगे, तो सच्चाई कभी नहीं जान पाओगे।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, यह कहानी हमें एक गहरी सीख देती है। हम अक्सर दूसरों की बात सुने बिना यह मान लेते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत। लेकिन सच्चाई यह है कि हर इंसान की दृष्टि अलग होती है, और हर किसी का अनुभव अधूरा होता है।
जीवन में अक्सर हम किसी बात को सिर्फ एक पहलू से देखते हैं, जबकि सच्चाई के कई पहलू हो सकते हैं। अगर हम दूसरों की बातों को धैर्य से सुनें, तो हमें सच्चाई की पूरी तस्वीर दिख सकती है।
जैसे उन छह अंधे व्यक्तियों में हर कोई आंशिक रूप से सही था, वैसे ही जीवन में भी कई मतभेद केवल इसलिए होते हैं क्योंकि हर कोई अपनी सीमित समझ से देख रहा होता है। इसलिए कभी भी किसी विषय पर बहस करने से पहले दूसरों का दृष्टिकोण समझने की कोशिश करनी चाहिए।
वेदों की शिक्षा
वेद और पुराणों में भी कहा गया है —
“एक ही सत्य को अनेक रूपों में बताया जा सकता है।”
इसलिए जब भी किसी बहस या विवाद में हों, तो याद रखिए कि शायद आपके हाथ में “हाथी का कान” है और किसी और के पास “हाथी का पैर”। दोनों की बातों को जोड़ेंगे, तभी संपूर्ण सत्य सामने आएगा।
संक्षेप में शिक्षा:
“सच्चाई को पूरी तरह समझने के लिए, केवल अपनी नहीं — दूसरों की बात भी सुननी चाहिए।”
5. हाथी की रस्सी कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Elephant Rope Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक आदमी कहीं जा रहा था। रास्ते में उसने एक बड़ा, विशालकाय हाथी देखा। हाथी बहुत ताकतवर था, लेकिन वह एक बहुत पतली और कमजोर रस्सी से बंधा हुआ था। यह देखकर वह आदमी हैरान रह गया।
उसे विश्वास नहीं हुआ कि इतना शक्तिशाली जानवर, जो आसानी से पेड़ उखाड़ सकता है, भारी चीज़ें उठा सकता है, वह इस पतली सी रस्सी से कैसे बंधा हुआ है। वहाँ न तो कोई जंजीर थी, न पिंजरा, फिर भी हाथी चुपचाप खड़ा था और भागने की कोई कोशिश नहीं कर रहा था।
उस आदमी की जिज्ञासा बढ़ी। वह सोचने लगा — “इतना विशाल और बलवान हाथी इस रस्सी को तो एक झटके में तोड़ सकता है, फिर यह क्यों नहीं भागता? यह अपने आपको आज़ाद क्यों नहीं करता?”
उत्तर जानने के लिए वह महावत (हाथी का प्रशिक्षक) के पास गया और पूछा — “श्रीमान, यह तो बहुत बड़ा और ताकतवर हाथी है, फिर भी यह इस पतली सी रस्सी से क्यों बंधा हुआ है? यह कोशिश क्यों नहीं करता कि इसे तोड़ दे?”
महावत मुस्कुराया और बोला — “जब यह हाथी छोटा था, तब मैं इसे इसी तरह की रस्सी से बाँधा करता था। उस समय यह रस्सी उसके लिए बहुत मज़बूत थी। उसने बचपन में इस रस्सी को कई बार तोड़ने की कोशिश की — वह खींचता, झटकता, ज़मीन पर गिर जाता, चोट लग जाती, लेकिन रस्सी नहीं टूटी। अंत में उसने हार मान ली। उसने मान लिया कि यह रस्सी कभी नहीं टूटेगी।”
महावत थोड़ी देर रुका, फिर बोला — “जब यह बड़ा हुआ, तो इसकी सोच नहीं बदली। अब यह विशाल और बलवान है, यह चाहें तो इस रस्सी को पलभर में तोड़ सकता है, लेकिन यह कोशिश ही नहीं करता। इसे अब भी लगता है कि रस्सी नहीं टूट सकती। बचपन की असफलता ने इसके मन में यह विश्वास बैठा दिया कि कोशिश करने का कोई फायदा नहीं।”
महावत की बात सुनकर वह आदमी कुछ देर तक वहीं खड़ा सोचता रहा। उसने महसूस किया कि हाथी वास्तव में अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपनी मानसिकता से बंधा हुआ है। उसकी हार असल में रस्सी से नहीं, बल्कि उसके मन में बसे डर और नकारात्मक सोच से हुई थी।
वह मन ही मन बोला — “अगर यह हाथी अपनी पुरानी असफलता को भूल जाए और एक बार फिर पूरी ताक़त से कोशिश करे, तो यह किसी भी बंधन से मुक्त हो सकता है।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, हम सबकी ज़िंदगी में कभी न कभी ऐसा समय आता है जब हम असफल होते हैं। लेकिन कई लोग उसी असफलता को जीवन का सत्य मान लेते हैं और दोबारा प्रयास करना छोड़ देते हैं। वे सोचते हैं कि “मैं नहीं कर सकता” या “मैं पहले भी असफल हुआ था।”
असल में, यह सोच ही हमें बाँध देती है — ठीक उसी तरह जैसे हाथी उस कमजोर रस्सी से बंधा रहा।
हमारा असली बंधन हमारी असफलता नहीं होती, बल्कि हमारा डर और आत्मविश्वास की कमी होती है।
अगर हम एक बार फिर हिम्मत जुटाकर प्रयास करें, तो हम अपने जीवन की हर “रस्सी” को तोड़ सकते हैं।
सफलता केवल उन्हीं को मिलती है जो गिरने के बाद फिर उठते हैं, कोशिश करते हैं और हार मानने से इनकार करते हैं।
संक्षेप में शिक्षा:
“असफलता सिर्फ तब स्थायी बनती है जब हम कोशिश करना छोड़ देते हैं।”
“ज़िंदगी की रस्सियाँ आपकी ताक़त से नहीं, आपके डर से बनी होती हैं — उन्हें तोड़ने की हिम्मत रखिए।”
6. काँच का जार और जीवन की प्राथमिकताएँ : प्रेरक प्रसंग (The Jar of Life Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक फिलॉसॉफी (Philosophy) की क्लास में प्रोफेसर अपने विद्यार्थियों के सामने आए।
उनके हाथ में एक खाली काँच का जार, कुछ बड़े पत्थर, कंकड़, और थोड़ी सी बालू (रेत) थी।
क्लास के सभी विद्यार्थी उत्सुक थे कि आज क्या सिखाया जाएगा, क्योंकि प्रोफेसर ने कहा था — “आज की क्लास बाकी क्लासों से कुछ अलग होगी।”
सभी छात्र ध्यान से देख रहे थे कि प्रोफेसर इन चीज़ों के साथ क्या करने वाले हैं।
प्रोफेसर ने सबसे पहले बड़े पत्थर उठाए और एक-एक करके खाली जार में डालने लगे। थोड़ी देर में जार ऊपर तक भर गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा — “क्या अब यह जार भर गया है?”
सभी विद्यार्थियों ने एक स्वर में कहा — “जी सर, अब यह पूरा भर गया है।”
प्रोफेसर ने बिना कुछ बोले जार में कंकड़ डालने शुरू किए और धीरे-धीरे जार को हिलाया।
कंकड़ पत्थरों के बीच की खाली जगहों में समा गए। फिर उन्होंने दोबारा पूछा — “अब बताओ, क्या यह जार भर गया है?”
विद्यार्थियों ने फिर कहा — “हाँ सर, अब तो पूरा भर गया है।”
फिर प्रोफेसर ने मुस्कुराते हुए बालू के कण उठाए और उन्हें जार में डाल दिया। रेत ने पत्थरों और कंकड़ों के बीच बची सारी जगह भर दी। अब पूरा जार वाकई भरा हुआ लग रहा था।
लेकिन प्रोफेसर यहीं नहीं रुके। उन्होंने पास रखा एक गिलास पानी उठाया और धीरे-धीरे उसे जार में उड़ेल दिया।
सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं — पानी भी उस जार में समा गया!
अब क्लास में शांति छा गई। सभी उत्सुक थे कि प्रोफेसर अब क्या कहेंगे।
प्रोफेसर ने मुस्कुराते हुए कहा — “यह जार आपके जीवन का प्रतीक है। इसमें जो बड़े पत्थर हैं, वे आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें हैं — आपका परिवार, स्वास्थ्य, चरित्र, और आत्मा।
कंकड़ आपके करियर, नौकरी, मकान और भौतिक जरूरतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। और बालू (रेत) उन छोटी-छोटी चीज़ों का प्रतीक है — जैसे मनोरंजन, सोशल मीडिया, दूसरों से तुलना, या छोटी चिंताएँ।”
उन्होंने आगे कहा — “अगर तुम सबसे पहले बालू जार में भर दोगे, तो पत्थरों और कंकड़ों के लिए जगह नहीं बचेगी।
ठीक वैसे ही, अगर तुम अपना समय और ऊर्जा छोटी बातों में बर्बाद कर दोगे, तो जीवन की बड़ी और आवश्यक चीज़ों के लिए तुम्हारे पास वक्त नहीं बचेगा।”
क्लास में बैठे छात्र अब सबकुछ समझ चुके थे। प्रोफेसर ने आगे कहा — “इसलिए, हमेशा अपने जीवन में प्राथमिकताएँ तय करो। सबसे पहले उन चीज़ों को महत्व दो जो वास्तव में ज़रूरी हैं — परिवार, स्वास्थ्य, रिश्ते और आत्म-संतुलन। बाकी चीज़ें तो अपने आप संभल जाएँगी।”
फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए जोड़ा — “और जहाँ तक पानी का सवाल है — यह दर्शाता है कि चाहे आपका जीवन कितना भी व्यस्त क्यों न हो,
हमेशा एक कप चाय या कॉफी अपने दोस्तों के साथ पीने का समय निकालना चाहिए।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन भी एक काँच के जार की तरह है। अगर हम पहले उसमें बालू (छोटी-छोटी चिंताएँ) भर देंगे, तो जीवन की बड़ी और ज़रूरी चीज़ों के लिए जगह नहीं बचेगी।
इसलिए हमें अपनी प्राथमिकताओं (Priorities) को सही क्रम में रखना चाहिए — पहले जीवन की असली नींव को मज़बूत करें, फिर बाकी छोटी ज़रूरतों पर ध्यान दें।
कई लोग छोटी बातों, अस्थायी इच्छाओं और दिखावे में उलझ जाते हैं, जबकि सच्ची सफलता और खुशी उन चीज़ों में है जो हमें अंदर से पूर्ण बनाती हैं — परिवार, रिश्ते, स्वास्थ्य और आत्म-संतुलन।
संक्षेप में शिक्षा:
“अगर आप जीवन में सही चीज़ों को पहले जगह देंगे,
तो बाकी सब चीज़ें अपने आप सही जगह पर फिट हो जाएँगी।”
7. धनवान व्यक्ति और यमराज की कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Rich Man and Yamraj Story in Hindi)

एक नगर में एक बहुत ही अमीर व्यक्ति रहता था। उसके पास इतना धन था कि वह पूरा नगर खरीद सकता था।
लेकिन उस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन केवल पैसे कमाने में लगा दिया। वह सुबह से रात तक बस धन इकट्ठा करने में व्यस्त रहता।
उसके पास अथाह संपत्ति थी, लेकिन उसने कभी किसी की मदद नहीं की — न किसी गरीब को दान दिया,
न किसी ज़रूरतमंद का साथ दिया, और न ही अपने धन का उपयोग खुद की खुशी के लिए किया।
वह न अच्छे कपड़े पहनता, न स्वादिष्ट भोजन खाता, बस अपने जीवन का हर पल पैसा जोड़ने में लगाता रहा। धीरे-धीरे समय बीतता गया, और उसे पता ही नहीं चला कि वह बूढ़ा हो गया है
एक दिन जब वह अपने कमरे में बैठा हिसाब-किताब देख रहा था, तभी अचानक उसके सामने यमराज प्रकट हुए।
यमराज ने गंभीर स्वर में कहा —
“अब तेरे जीवन का समय पूरा हो चुका है। मैं तुझे अपने साथ ले जाने आया हूँ।”
यह सुनकर वह आदमी घबरा गया। कंपते स्वर में बोला — “प्रभु, अभी तक तो मैंने जीवन जिया ही नहीं! मैं तो हमेशा काम और पैसे कमाने में व्यस्त रहा। कृपा करके मुझे थोड़ा और समय दीजिए ताकि मैं अपनी मेहनत से कमाए धन का उपयोग कर सकूँ।”
यमराज शांत स्वर में बोले — “यह संभव नहीं है। तेरे जीवन के दिन पूरे हो चुके हैं। अब तेरा समय बढ़ाया नहीं जा सकता
आदमी ने तुरंत कहा — “प्रभु, मेरे पास बहुत धन है। अगर आप चाहें तो मेरा आधा धन ले लीजिए, बस मुझे एक साल का समय और दे दीजिए।”
यमराज ने सिर हिलाते हुए कहा — “यह असंभव है।”
आदमी ने फिर विनती की — “तो मेरा 90 प्रतिशत धन ले लीजिए, बस एक महीना और दे दीजिए।” यमराज ने दोबारा मना कर दिया।
अब उस अमीर आदमी की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने एक आखिरी कोशिश की और बोला — “प्रभु, मेरा सारा धन ले लीजिए, बस मुझे एक घंटा और दे दीजिए।”
यमराज ने गम्भीर स्वर में कहा — “मनुष्य चाहे कितना भी अमीर क्यों न हो, बीता हुआ समय किसी भी कीमत पर वापस नहीं आता। पैसा फिर से कमाया जा सकता है, लेकिन जीवन का एक पल भी धन से नहीं खरीदा जा सकता।”
यह सुनकर वह अमीर व्यक्ति बहुत पछताया। उसे महसूस हुआ कि उसने जीवन की असली कीमत कभी नहीं समझी। जिस धन को वह सबसे बड़ा मानता था, वह आज उसकी एक साँस भी नहीं खरीद सका।
वह रोते हुए बोला — “मैंने पूरी ज़िंदगी धन कमाने में बिता दी, लेकिन आज यह धन मेरे किसी काम का नहीं रहा।
काश! मैंने अपने परिवार, मित्रों और समाज के लिए कुछ किया होता, तो शायद मेरा जीवन सार्थक होता।”
वह दुखी मन से अपनी आँखें बंद कर लेता है, और यमराज उसे अपने साथ ले जाते हैं।
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि पैसा ज़रूरी है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण नहीं। धन से आप आरामदायक जीवन तो खरीद सकते हैं, लेकिन समय, प्यार, स्वास्थ्य और शांति नहीं।
जीवन भगवान का दिया हुआ अनमोल उपहार है। इसे सिर्फ कमाई में नहीं, बल्कि जीने में लगाना चाहिए। हर पल को खुशी, प्रेम और आभार के साथ जीना ही असली सफलता है।
क्योंकि जब मृत्यु सामने होती है, तो कोई भी धन, पद या शक्ति हमारे किसी काम नहीं आती। सिर्फ अच्छे कर्म, प्रेम और सुखद यादें ही साथ जाती हैं।
संक्षेप में शिक्षा:
“पैसा फिर से कमाया जा सकता है,
लेकिन बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता।”“जीवन को सिर्फ कमाने के लिए नहीं,
बल्कि जीने के लिए जियो।”
8. गधा और गड्ढा कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Donkey and the Pit Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक आदमी अपने गधे के साथ रास्ते से जा रहा था। रास्ते में चलते-चलते अचानक गधा एक गहरे गड्ढे में गिर गया। आदमी ने जब यह देखा, तो वह बहुत चिंतित हो गया।
उसने अपने प्यारे गधे को बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया। कभी रस्सी डाली, कभी डंडे की मदद ली, लेकिन गड्ढा बहुत गहरा था। काफी कोशिशों के बाद भी जब गधा बाहर नहीं आया, तो आदमी निराश हो गया।
वह सोचने लगा — “अब यह गधा शायद कभी बाहर नहीं निकल पाएगा।” गधे को यूँ ही तड़पते देख उसका दिल भर आया, पर वह कुछ कर नहीं पा रहा था।
आखिर उसने सोचा, “अगर इसे बचा नहीं सकता, तो इसे यूँ कष्ट में नहीं छोड़ सकता। इसे मिट्टी डालकर दफना दूँ, ताकि यह जल्दी मर जाए और इसका दर्द खत्म हो जाए।”
आदमी ने पास के लोगों से मदद ली और गड्ढे में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। हर फावड़े के साथ मिट्टी गधे के ऊपर गिरती, लेकिन गधा हार मानने के बजाय हिलता और उस मिट्टी को झटक देता। फिर उसी मिट्टी पर एक कदम ऊपर चढ़ जाता।
हर बार जब मिट्टी गिरती, वह उसे अपने पैरों तले दबाकर ऊपर उठ जाता। धीरे-धीरे, मिट्टी गड्ढे में भरने लगी, और गधा भी हर बार ऊपर चढ़ता चला गया।
कुछ ही देर में वह गड्ढा पूरा भर गया, और सबकी आश्चर्य भरी निगाहों के सामने गधा बाहर निकल आया — जीवित और सुरक्षित!
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, यह कहानी हमें सिखाती है कि समस्याएँ हमें दबाने नहीं, बल्कि ऊपर उठाने के लिए आती हैं। जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आए, अगर हम उसे धैर्य और समझदारी से संभालें, तो वही मुश्किल हमें ऊँचाइयों तक पहुँचाने की सीढ़ी बन सकती है।
हर समस्या को शत्रु नहीं, एक शिक्षक समझिए। क्योंकि अगर गधे ने मिट्टी के भार को सह लिया होता और हिलना छोड़ दिया होता, तो वह हमेशा के लिए उस गड्ढे में दब जाता। लेकिन उसने उस मिट्टी को पाँव तले रखकर ऊपर उठने का जरिया बना लिया।
जीवन भी बिल्कुल वैसा ही है — जब कोई समस्या आप पर गिरती है, तो उसे बोझ मत समझिए, बल्कि उसे अपने विकास का आधार बना लीजिए।
संक्षेप में शिक्षा:
“समस्याओं के नीचे दबो मत —
उन्हें पाँव तले रखो और ऊपर बढ़ो!”
“हर मुसीबत अपने साथ एक नया रास्ता लेकर आती है,
बस उसे पहचानने की नजर चाहिए।”
9. 20 डॉलर का नोट कहानी : प्रेरक प्रसंग (The 20 Dollar Note Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता (Motivational Speaker) एक शहर में भाषण देने आए। उनका नाम सुनते ही सैकड़ों लोग उन्हें सुनने के लिए सभागार में एकत्र हुए। वक्ता मंच पर आए, मुस्कुराए और अपनी जेब से एक नया, चमचमाता 20 डॉलर का नोट निकाला।
उन्होंने नोट को सबके सामने ऊँचा उठाकर कहा, “बताइए, कौन इस 20 डॉलर के नोट को पाना चाहता है?” पूरा हॉल उत्साह से भर गया, लगभग हर व्यक्ति ने अपना हाथ ऊपर उठा लिया। सभी लोग बोले, “मैं चाहता हूँ!” वक्ता मुस्कुराए और बोले, “बहुत अच्छा! लेकिन पहले मैं इस नोट के साथ कुछ करूँगा।”
यह कहकर वक्ता ने उस नोट को अपने दोनों हाथों में लेकर कसकर मरोड़ दिया। अब नोट सिकुड़ गया था और उसकी शक्ल बिगड़ चुकी थी। उन्होंने भीड़ की ओर देखते हुए फिर पूछा, “अब कौन इस नोट को लेना चाहेगा?” भीड़ में फिर से लगभग सभी हाथ ऊपर उठ गए। सबका जवाब एक ही था — “मैं लूँगा।”
वक्ता ने कहा, “ठीक है, अब देखिए।” फिर उन्होंने उस नोट को फर्श पर गिराया और अपने जूते से उसे अच्छी तरह रगड़ दिया। नोट अब गंदा हो गया था, मिट्टी से सना हुआ था और अपनी चमक खो चुका था।
वक्ता ने उसे उठाया और फिर से सबके सामने ऊँचा उठाकर पूछा, “अब बताइए, कौन इस नोट को पाना चाहेगा?” हॉल में बैठे लगभग सभी लोगों ने एक बार फिर अपने हाथ ऊपर उठा दिए।
वक्ता ने कुछ पल के लिए सबको देखा, फिर मुस्कुराते हुए बोले, “आप सब देख चुके हैं कि मैंने इस नोट के साथ क्या-क्या किया। मैंने इसे मरोड़ा, रौंदा, मिट्टी में फेंका, लेकिन इसके बावजूद आप सब इसे पाना चाहते हैं। क्यों? क्योंकि चाहे यह कितना भी गंदा हो जाए, इसकी कीमत (Value) अब भी वही है — 20 डॉलर।”
यह सुनते ही हॉल में सन्नाटा छा गया। वक्ता ने आगे कहा, “यही बात हमारी जिंदगी पर भी लागू होती है। जीवन हमें कई बार झकझोरता है, गिराता है, धूल-मिट्टी में लोटाता है, तकलीफें देता है, और हमें थका देता है। लेकिन इन सबके बावजूद, हमारी असली कीमत कभी कम नहीं होती।”
उन्होंने कहा, “दुनिया चाहे हमें कितना भी नीचे गिरा दे, कितनी भी बार हमें असफलता और अपमान का सामना करना पड़े, हमें अपनी क़ीमत, आत्मविश्वास और सम्मान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
जैसे इस नोट की वैल्यू वही रही, वैसे ही आपकी वैल्यू भी हमेशा वही रहती है। फर्क सिर्फ इतना है कि हम खुद अपने बारे में क्या सोचते हैं।”
वक्ता ने निष्कर्ष में कहा, “जीवन की मुश्किलें सिर्फ हमें आज़माती हैं, हमारी कीमत नहीं घटातीं। इसलिए चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, कभी खुद को कम मत आँको। खुद पर भरोसा रखो, क्योंकि तुम्हारी असली कीमत तुम्हारे भीतर है, बाहर नहीं।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें, असफलताएँ या निराशाएँ क्यों न आएँ, उनसे हमारी कीमत कभी कम नहीं होती। चाहे लोग कुछ भी कहें या परिस्थितियाँ कैसी भी बनें, हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारा मूल्य हमारे भीतर है, बाहर नहीं। हर कठिनाई हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हमारी असली पहचान दिखाने आती है।
संक्षेप में शिक्षा:
“दुनिया चाहे जितनी बार आपको गिरा दे, आपकी असली कीमत कभी कम नहीं होती।”
“धूल-मिट्टी में भी आपकी पहचान वही रहती है — बस खुद पर भरोसा रखिए।”
10. तितली और कोकून की कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Butterfly and the Cocoon Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक आदमी अपने बगीचे में टहल रहा था। तभी उसकी नज़र एक पेड़ की डाल पर पड़े तितली के कोकून पर पड़ी। उसने ध्यान से देखा कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया था।
आदमी रुक गया और उत्सुकता से देखने लगा। उसने देखा कि अंदर की छोटी तितली उस छेद से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही थी। वह पूरे ज़ोर से शरीर मोड़ती, फड़फड़ाती, परंतु बाहर नहीं निकल पा रही थी।
वह आदमी लंबे समय तक उसे देखता रहा। उसने देखा कि तितली बार-बार कोशिश करती, लेकिन जब थक जाती तो रुक जाती, जैसे उसने हार मान ली हो। आदमी को तितली पर दया आ गई। उसे लगा कि तितली बहुत संघर्ष कर रही है और शायद अब कभी बाहर नहीं निकल पाएगी।
इसलिए उसने मदद करने का निर्णय लिया। वह अंदर गया, एक छोटी कैंची लेकर आया और सावधानी से कोकून का छेद बड़ा कर दिया। अब तितली आसानी से बाहर आ गई, बिना किसी संघर्ष के। आदमी खुश हुआ कि उसने एक जीव की मदद की, परंतु जल्द ही उसका यह संतोष दुख में बदल गया।
तितली का शरीर सूजा हुआ था और उसके पंख सिकुड़े हुए थे। आदमी को लगा कि थोड़ी देर में उसके पंख फैल जाएँगे और वह उड़ जाएगी। वह इंतज़ार करता रहा, पर ऐसा नहीं हुआ। तितली ज़मीन पर रेंगती रही, वह उड़ नहीं सकी। कुछ घंटों बाद ही वह वहीं मर गई।
यह देखकर आदमी बहुत दुखी हुआ। उसे समझ नहीं आया कि उसकी मदद तितली के लिए हानिकारक कैसे बन गई। वह उदास मन से अपने बुजुर्ग गुरु के पास गया और सारी बात बताई। बुजुर्ग ने शांत स्वर में कहा, “बेटा, प्रकृति की हर प्रक्रिया का एक उद्देश्य होता है।
कोकून से बाहर निकलने का संघर्ष ही तितली को मज़बूत बनाता है। जब वह छेद से खुद बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो उसके शरीर में जमा तरल पदार्थ उसके पंखों में फैल जाता है, जिससे उसके पंख मजबूत होते हैं और वह उड़ने में सक्षम बनती है।
लेकिन जब तुमने उसकी मदद कर दी, तो वह प्रक्रिया पूरी ही नहीं हो सकी। उसकी उड़ान की शक्ति विकसित होने से पहले ही उसे आराम मिल गया — और यही उसकी मृत्यु का कारण बना।”
आदमी को अब अपनी गलती समझ आ गई। उसने महसूस किया कि कभी-कभी मदद की जल्दबाज़ी किसी के विकास में बाधा बन सकती है। संघर्ष ही वह प्रक्रिया है जो किसी को सक्षम बनाती है, मज़बूत बनाती है, और उड़ान के लायक बनाती है।
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, यह कहानी हमें एक गहरी सीख देती है — जीवन में आने वाले संघर्ष (Struggles) वास्तव में हमें कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाते हैं। जब हम किसी कठिनाई से जूझते हैं, तो हम भीतर से परिपक्व होते हैं, आत्मविश्वासी बनते हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के योग्य हो जाते हैं। अगर हमें हर चीज़ बिना संघर्ष के मिल जाए, तो हम जीवन के वास्तविक अर्थ और शक्ति को कभी नहीं समझ पाएंगे।
संघर्ष हमें मजबूत बनाता है, जबकि आराम हमें कमजोर कर देता है। इसलिए जब जीवन कठिन लगे, तो यह याद रखिए कि यह समय आपको गिराने नहीं, बल्कि उड़ान भरने के लिए तैयार करने आया है।
संक्षेप में शिक्षा:
“जीवन के संघर्ष ही हमें उड़ने की ताकत देते हैं।”
“अगर तितली संघर्ष के बिना बाहर निकलती, तो कभी उड़ नहीं पाती।”
“मुश्किलें हमें तोड़ती नहीं, हमें गढ़ती हैं।”
11. राजा और बढ़ई की कहानी : प्रेरक प्रसंग (The King and the Woodcutter Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक राजा ने अपने राजकाज के लिए एक बढ़ई (लकड़हारा) को नियुक्त किया। वह बढ़ई मेहनती और ईमानदार था। उसने अपने काम की शुरुआत बहुत जोश और उत्साह के साथ की। पहले ही महीने में उसने लगभग 18 पेड़ काट दिए। राजा उसके कार्य से बहुत खुश हुआ और उसे इनाम भी दिया।
अगले महीने भी बढ़ई ने पूरी मेहनत की, लेकिन इस बार वह केवल 15 पेड़ ही काट पाया। उसने सोचा कि शायद पिछली बार ज्यादा मेहनत कर ली थी, इसलिए इस बार उतने पेड़ नहीं कट पाए। तीसरे महीने उसने अपनी पूरी ताकत और समय लगा दिया, परंतु इस बार वह सिर्फ 12 पेड़ ही काट पाया।
अब बढ़ई परेशान हो गया। वह सोचने लगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? वह उतनी ही मेहनत कर रहा था, लेकिन उसकी उत्पादकता (Productivity) हर महीने घटती जा रही थी।
एक दिन राजा स्वयं उसके पास आया और पूछा, “तुम पहले महीने 18 पेड़ काटते थे, अब केवल 12 ही काट पा रहे हो। ऐसा क्यों?”
बढ़ई ने झिझकते हुए उत्तर दिया, “महाराज, शायद मेरी उम्र बढ़ रही है और मेरी ताकत पहले जैसी नहीं रही। इसी कारण मैं उतना काम नहीं कर पा रहा जितना पहले करता था।”
राजा कुछ क्षण सोचता रहा, फिर मुस्कुराते हुए बोला, “एक बात बताओ, आख़िरी बार तुमने अपनी कुल्हाड़ी को धार (Sharpen) कब लगाई थी?”
बढ़ई ने आश्चर्य से जवाब दिया, “महाराज, जब मैंने नौकरी शुरू की थी तब धार लगाई थी, उसके बाद कभी नहीं।”
राजा ने शांत स्वर में कहा, “यही कारण है कि तुम्हारी उत्पादकता कम हो रही है। जब कुल्हाड़ी की धार कुंद हो जाती है, तो चाहे लकड़हारा कितना भी मेहनत करे, उसका परिणाम घटता ही जाता है। अगर तुम समय-समय पर कुल्हाड़ी की धार तेज करते, तो कम मेहनत में भी ज्यादा पेड़ काट सकते थे।”
बढ़ई को राजा की बात समझ आ गई। उसने उसी दिन अपनी कुल्हाड़ी को धार लगाई और अगले ही दिन से उसकी कार्यक्षमता पहले से दोगुनी हो गई। अब वह पहले से भी ज्यादा पेड़ काटने लगा और उसका आत्मविश्वास लौट आया।
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में केवल मेहनत ही काफी नहीं होती, बल्कि समय-समय पर अपनी क्षमताओं और कौशलों को निखारना भी आवश्यक है।
अगर हम लगातार मेहनत करते रहें लेकिन खुद को अपडेट न करें, नई बातें न सीखें, तो हमारी “कुल्हाड़ी” यानी हमारी योग्यता धीरे-धीरे कुंद हो जाती है। जैसे मोबाइल को चार्ज करना ज़रूरी है, वैसे ही अपने दिमाग और कौशल को भी समय-समय पर “रीचार्ज” करते रहना चाहिए।
सीखना, सुधारना और खुद को निखारना ही निरंतर सफलता की असली कुंजी है।
संक्षेप में शिक्षा:
“मेहनत तभी कारगर होती है जब हम अपनी कुल्हाड़ी को समय-समय पर धार देते रहें।”
“लगातार सीखते रहना ही जीवन में आगे बढ़ने का रहस्य है।”
12. आलू, अंडा और कॉफी की कहानी : प्रेरक प्रसंग (The Potato, Egg and Coffee Story in Hindi)

एक बार की बात है, एक युवती अपनी ज़िंदगी की परेशानियों से बहुत थक चुकी थी। उसने अपने पिता से शिकायत करते हुए कहा, “पापा, मेरी ज़िंदगी बहुत कठिन हो गई है। एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी सामने आ जाती है। ऐसा लगता है मानो मुसीबतें कभी खत्म ही नहीं होंगी। मैं बहुत परेशान हो गई हूँ। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ?”
उसके पिता एक शेफ (Chef) थे। उन्होंने अपनी बेटी की बातें शांति से सुनीं और बिना कुछ कहे उसे रसोईघर (Kitchen) में ले गए। वहाँ उन्होंने तीन बर्तन गैस पर रखे और प्रत्येक में पानी भर दिया। कुछ समय बाद जब तीनों बर्तनों का पानी उबलने लगा, तो उन्होंने एक बर्तन में आलू, दूसरे में अंडा, और तीसरे में कॉफी के बीज डाल दिए।
बेटी यह सब हैरानी से देखती रही। वह सोच रही थी कि उसके पिता आखिर क्या कर रहे हैं और इसका उसकी समस्याओं से क्या संबंध है। दोनों कुछ देर तक खामोश खड़े रहे, और उबलते पानी को देखते रहे। करीब 15 मिनट बाद पिता ने गैस बंद की।
फिर उन्होंने तीनों बर्तनों को अलग-अलग रखा। एक कटोरे में उबले हुए आलू निकाले, दूसरे में उबले अंडे रखे, और तीसरे बर्तन से कॉफी को एक कप में डाल दिया।
अब उन्होंने अपनी बेटी से कहा, “बेटा, अब बताओ, तुम्हें क्या दिख रहा है?”
बेटी ने कहा, “आलू, अंडा और कॉफी।”
पिता मुस्कुराए और बोले, “ठीक है, अब इन सभी को ध्यान से छूकर देखो।”
बेटी ने पहले आलू को छुआ — वह अब नरम हो चुका था।
फिर उसने अंडा उठाया — जो अब कड़ा और ठोस बन गया था।
आख़िर में उसने कॉफी का एक घूंट पिया, और मुस्कुराई, क्योंकि उसका स्वाद बेहद अच्छा था।
अब उसने उत्सुकता से पूछा, “पापा, इसका मतलब क्या है?”
पिता ने प्यार से कहा, “बेटा, इन तीनों चीज़ों को एक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा — गर्म पानी, यानी कठिन परिस्थिति। लेकिन तीनों की प्रतिक्रिया (Reaction) अलग थी।
आलू, जो पहले कठोर और मजबूत था, गर्म पानी में डालने के बाद नरम और कमजोर हो गया।
अंडा, जो पहले नाज़ुक और तरल था, गर्म पानी में पककर सख्त और मजबूत बन गया।
लेकिन कॉफी के बीज ने सबसे अलग काम किया — उसने न केवल खुद को बदला, बल्कि अपने आस-पास के वातावरण को भी बदल दिया।
कॉफी ने उस पानी को ही नए स्वाद और खुशबू से भर दिया, यानी उसने परिस्थिति को अपने पक्ष में बदल लिया।”
पिता ने आगे कहा, “जिंदगी भी ठीक ऐसी ही है। जब मुश्किलें, परेशानियाँ और समस्याएँ आती हैं, तो यह मायने नहीं रखता कि वे कैसी हैं, बल्कि यह मायने रखता है कि तुम उन परिस्थितियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हो।
तुम आलू की तरह टूट सकती हो, अंडे की तरह सख्त बन सकती हो, या कॉफी की तरह खुद को और परिस्थितियों को बेहतर बना सकती हो। यह पूरी तरह तुम्हारे हाथ में है।”
बेटी के चेहरे पर अब एक नई समझ और आत्मविश्वास झलकने लगा। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “अब मैं समझ गई, पापा। अब मैं हर समस्या का सामना कॉफी की तरह करूँगी — अपने जीवन को और भी खुशबूदार और मजबूत बनाऊँगी।”
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
दोस्तों, यह कहानी हमें यह सिखाती है कि समस्याएँ जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन हमारा दृष्टिकोण (Attitude) ही तय करता है कि हम उनसे टूटेंगे या उनसे और मजबूत बनेंगे।
जीवन में मुश्किलें सभी के पास आती हैं — कुछ लोग उन्हें देखकर हार मान लेते हैं, कुछ लोग उनसे सख्त हो जाते हैं, और कुछ लोग उन्हें अवसर में बदल देते हैं।
अगर हम अपने सोचने के तरीके को बदल दें, तो हर कठिन परिस्थिति को हम सफलता की सीढ़ी बना सकते हैं।
इसलिए जब अगली बार जिंदगी आपको “गर्म पानी” जैसी स्थिति में डाले, तो याद रखिए — आप तय कर सकते हैं कि आपको आलू बनना है, अंडा बनना है या कॉफी बननी है।
संक्षेप में शिक्षा:
“मुश्किलें सबके जीवन में आती हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उनसे टूट जाता है और कोई उनसे चमक उठता है।”
“अगर आप चाहें तो परिस्थिति आपको नहीं, बल्कि आप परिस्थिति को बदल सकते हैं।”
13. दशरथ मांझी – माउंटेन मैन की कहानी : प्रेरक प्रसंग (Dashrath Manjhi The Mountain Man Story in Hindi)
दशरथ मांझी, जिन्हें पूरी दुनिया “माउंटेन मैन” के नाम से जानती है, यह नाम सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि अडिग संकल्प, साहस और इंसानियत की मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि अगर इरादा मजबूत हो तो पहाड़ भी झुक सकता है और असंभव भी संभव बन जाता है।
बिहार राज्य के गया जिले के गहलौर गाँव में एक गरीब मज़दूर परिवार में दशरथ मांझी का जन्म हुआ था। बचपन गरीबी में गुज़रा और कम उम्र में ही वे अपने परिवार की मदद के लिए धनबाद की कोयला खदानों में काम करने लगे। कठिन परिस्थितियों में भी उनके भीतर हिम्मत और संघर्ष की आग जलती रही। बड़े होने पर उन्होंने फाल्गुनी देवी नाम की एक साधारण लेकिन सच्चे दिल वाली लड़की से विवाह किया।
एक दिन जब उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी अपने पति के लिए खाना लेकर जा रही थीं, तो रास्ते में गहलौर पहाड़ के संकरे दर्रे में उनका पैर फिसल गया और वे गहराई में गिर पड़ीं। गाँव के लोग उन्हें बचाने की पूरी कोशिश करते रहे, लेकिन पहाड़ के दूसरी ओर स्थित अस्पताल लगभग 55 किलोमीटर दूरथा। रास्ता लंबा, कठिन और खतरनाक था, जिसके कारण समय पर इलाज नहीं हो सका और फाल्गुनी देवी ने दम तोड़ दिया।
यह घटना दशरथ मांझी के दिल को चीर गई। पत्नी की मौत ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया, लेकिन यही दर्द उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य बन गया। उन्होंने ठान लिया कि वे इस पहाड़ को काटकर गाँव से अस्पताल तक सीधा रास्ता बनाएँगे, ताकि भविष्य में किसी को ऐसी मौत का सामना न करना पड़े।
दशरथ मांझी के पास न पैसे थे, न मशीनें, न मजदूर। उनके पास सिर्फ था — एक हथौड़ा, एक छेनी और अटूट इरादा।
1960 में उन्होंने अकेले ही उस विशाल पत्थर के पहाड़ पर चोट मारनी शुरू की। दिन-रात, गर्मी-सर्दी और बरसात की परवाह किए बिना वे लगातार काम करते रहे। गाँव के लोग उन्हें “पागल” कहते थे। कोई उनका मज़ाक उड़ाता, कोई उन्हें रोकने की कोशिश करता। लेकिन मांझी अपने संकल्प से कभी नहीं डगमगाए।
वे रोज़ सुबह निकलते और पत्थर तोड़ते रहते। धीरे-धीरे कुछ गाँववाले उनके हौसले से प्रभावित हुए और खाना, औज़ार और पानी देकर उनकी मदद करने लगे। दशरथ मांझी ने 22 साल तक (1960 से 1982 तक) बिना रुके काम किया। आखिरकार, उन्होंने अपने दम पर पहाड़ के बीचों-बीच 360 फुट लंबा, 30 फुट चौड़ा और 25 फुट ऊँचा रास्ता बना डाला।
उनकी बनाई सड़क ने गहलौर गाँव को वजीरगंज और अतरी ब्लॉक से जोड़ दिया, जिससे पहले जो दूरी 55 किलोमीटर थी, वह घटकर मात्र 15 किलोमीटर रह गई।
जब दुनिया को उनकी उपलब्धि का पता चला तो सब चौंक गए। जिस व्यक्ति को कभी “पागल” कहा गया था, वही अब “माउंटेन मैन” कहलाया। दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी के प्यार और इंसानियत के लिए पहाड़ को चीरकर रास्ता बना दिया।
भारत सरकार ने उनके काम को सराहा और उन्हें राष्ट्र स्तर पर सम्मानित किया गया। उनकी प्रेरणादायक कहानी पर बाद में फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज़ भी बनीं।
अपने जीवन के अंतिम दिनों में दशरथ मांझी को कैंसर हो गया, और 17 अगस्त 2007 को 73 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। बिहार सरकार ने उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ किया।
कहानी से शिक्षा (Moral of the Story)
यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर मन में सच्चा इरादा और दृढ़ निश्चय हो, तो कोई भी बाधा असंभव नहीं रहती।
दशरथ मांझी के पास न पैसा था, न साधन, न कोई मदद — फिर भी उन्होंने अकेले एक पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया।
उन्होंने साबित कर दिया कि दुनिया का सबसे ऊँचा पहाड़ भी एक इंसान की जिद से छोटा होता है।
हमारे जीवन में भी अगर हम कठिनाइयों से डरने के बजाय उनसे लड़ना सीख लें,
तो कोई लक्ष्य दूर नहीं। सफलता चाहे देर से मिले, पर मिलती ज़रूर है।
संक्षेप में शिक्षा:
“अगर इरादा पक्का हो तो पहाड़ भी रास्ता बन जाता है।”
“मुश्किलें इंसान को नहीं रोकतीं, हिम्मत की कमी रोकती है।”
“दृढ़ निश्चय ही सफलता की असली चाबी है।”
निष्कर्ष
इन सभी प्रेरक प्रसंगों (Prerak Prasang) का उद्देश्य हमें यह याद दिलाना है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, संघर्ष, साहस और सकारात्मक सोच से हर बाधा को पार किया जा सकता है। हर कहानी हमें एक नई दिशा, एक नया दृष्टिकोण और एक नई सोच देती है।
गधे और गड्ढे की कहानी सिखाती है कि हमें समस्याओं के नीचे दबने के बजाय उन्हें पाँव तले रखकर ऊपर बढ़ना चाहिए। 20 डॉलर का नोट कहानी बताती है कि हमारी असली कीमत कभी कम नहीं होती, चाहे दुनिया हमें कितना भी परखे।
तितली और कोकून की कहानी यह दिखाती है कि संघर्ष ही हमें मज़बूती देता है। राजा और बढ़ई की कहानी सिखाती है कि मेहनत के साथ-साथ खुद को निखारना ज़रूरी है।
आलू, अंडा और कॉफी की कहानी समझाती है कि परिस्थिति नहीं, हमारी प्रतिक्रिया हमें सफल या असफल बनाती है। दशरथ मांझी – माउंटेन मैन की कहानी हमें दिखाती है कि दृढ़ निश्चय के आगे पहाड़ भी झुक जाते हैं।
हर कहानी का सार यही है — अगर मन में जिद है, इरादा पक्का है, और सोच सकारात्मक है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
जीवन में आने वाले हर संघर्ष, असफलता या कठिनाई को एक अवसर की तरह देखना चाहिए।
ये प्रेरक कहानियाँ हमें यह सिखाती हैं कि
“जीवन की असली जीत दूसरों पर नहीं, बल्कि खुद पर विजय पाने में है।”
इन Motivational Stories in Hindi और Moral Stories से हमें यह समझ आता है कि
हर व्यक्ति के भीतर अपार क्षमता है —
बस जरूरत है खुद पर विश्वास रखने की, निरंतर सीखते रहने की,
और कभी हार न मानने की।
इसलिए, जब भी जीवन कठिन लगे,
इन प्रेरक प्रसंगों (Prerak Prasang) को याद कीजिए —
क्योंकि ये सिर्फ कहानियाँ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा देने वाले विचार हैं।
bahut hi badhiya kahaniya hai. bahut hi accha laga padh kar.
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In it all stories are so inspirational
Acchi aur prernadayi kathaye h bhut achhe lage
Bahut Badiya stories And I am motivation is life
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बहुत ही कमाल की कहानी है।thank you sir/mam
Bahut màst story he sir/màm
Stories are very nice
Very inspiring and valued stories
बहुत ही अच्छी कहानियाँ
कहानियां बहुत अच्छी है प्रेरणादायक है विद्यार्थियों को और छोटे बच्चों को अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा इन्हें सुनाया जा सकता है
To tu Dekh le
Very nice stories
Very nice stories, thanks
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Thank you for sharing your articles and speeches. It really helped me with a speech that I was writing for a meeting we´ll have for a major change that …
महोदय,
नमस्कार।
बहुत ही प्रेरणादायक कहानियों और प्रसंगों का संकलन है। धन्यवाद।
कुछ तो हम सब ने कहीं न कहीं सुन रखी हैं पर आपके शब्दों का चुनाव और प्रस्तुति करण सराहनीय है।
मैं शौकिया तौर पर कहानियां अपनी आवाज़ में रिकार्ड कर सुनाता हूँ और आपसे गुज़ारिश है कि इस अमूल्य संग्रह में से कुछेक कहानियां सुनाने और रेकॉर्ड करने की इजाज़त दे कर अनुगृहीत करें।
आभार,
हिमांशु
आपने इस पोस्ट में जो जो भी प्रेरणादायक कहानियां बताइए सभी जीवन बदलने वाली है जो भी इंसान सही तरह कैसे इसे अपने जीवन में धारण करें तो वह बहुत आसानी से अपना जीवन परिवर्तन कर सकता है धन्यवाद आपका इस तरह की कहानियों के लिए
Most inspiring story i very interested kahaniyan
बहुत अच्छी अच्छी बाते इन कहानियों के जरिए आपने बताई है
Bahut hi achhi kahaniya hai isme se kuch me janta tha or khuch mujhe janne ko mila…tx for sharing
Bahut hi saralata se manushya ke jeevan ki duvidhao ko dur karne wale story.
वंदेमातरम सर आपकी कहानियों का यह संग्रह बहोत ही प्रेणादायी है अगर आपकी इजाजत हो तो मै इसे अपने आवाज में रिकॉर्ड करके अपने विद्यार्थियों को सुनाऊ और उन्हें मोटिवेट करू।
Bilkul
very nice story
It should be practice to follow after reading.
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मै आपके blog का regul
बहुत ही प्रेरक लेख
अच्छे लेख है,
Good story sir
Bhut hi badhiya kahaniyan