सरदार वल्लभभाई पटेल निबंध और तथ्य
सरदार पटेल जो “भारत के लोह पुरुष भारत के लौह पुरुष” और भारत के बिस्मार्क के नाम से प्रसिद्ध भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक प्रतीकों में से एक हैं। वे भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और प्रथम गृह मंत्री बने।
उनका जन्म 31अक्टूबर, 1875 को गुजरात में एक छोटे गाँव नदीअद में हुआ था। उनके पिता झावरभाई एक किसान थे और माँ लाड बाई एक साधारण महिला थी। सरदार वल्लभभाई पटेल जी का सबसे बड़ा योगदान था 1950 के संबिधान के अनुसार रियासतों का आयोजन और उन्हें संघीय ढाँचे में शामिल करना।
उन्होंने 555 रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पटेल जी ने तंत्रता संग्राम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के साथ कंधे से कन्धा मिला कर साथ दिया। चलिए उनके विषय में कुछ ऐसे तथ्यों को जाने जो शायद ही आपको पता होंगे।
इसी कारण प्रति वर्ष हम 31 अक्टूबर को “भारतीय एकता दिवस” (राष्ट्रीय एकता दिवस) के रूप में मनाते हैं। नीचे सरदार वल्लभभाई पटेल जी के प्रतिमा से जुड़े तथ्य सरदार वल्लभभाई पटेल – “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” in पढ़ें।
सरदार वल्लभभाई पटेल निबंध और तथ्य
#1 सरदार वल्लभ भाई पटेल जी को मरणोपरांत 1991 में भारत रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
#2 सरदार वल्लभभाई पटेल के पिता एक किसान थे और उन्होंने झाँसी की रानी के सेना में भी कार्य किया था। उन्होंने अपने पीता के साथ खेतों में काम किया और वे एक महीने में दो बार लम्बे उपवास रखा करते थे। उनके इस सहनशक्ति को देखते हुए पूरा विश्व उन्हें भारत के लोह पुरुष भारत के लौह पुरुष के नाम से याद करता है।
#3 उन्होंने अपनी मेट्रिक की पढाई 22 वर्ष की आयु में पूरी की और कानून की पढाई 36 वर्ष की आयु में शुरू की। बहुत ही जल्दी सिखने की काबिलियत होने के कारन उन्होंने इंग्लैंड में अपने 36 महीने के बैरिस्टर की पढाई को 30 महीने में ही पूरा कर लिया था। ऐसा करने वाले व्यक्ति भारत में बहुत ही गिने चुने ही हैं।
#4 वे स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और प्रथम गृह मंत्री बने थे।
#5 महात्मा गाँधी जी के विचारधारा से प्रेरित हो कर, बल्लभभाई पटेल ने एक अंदोर शुरू किया था जिसमें उन्होंने अपने दम पर किसानों को प्रेरित किया और अहिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में भाग लेने के लिए कहा। इस आन्दोलन के कारन उस वर्ष ब्रिटिश गवर्नमेंट नें एक कर छुट्टी का एलान किया।
#6 उनके जन्म तिथि का कोई ऑफिसियल रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उनका जन्म दिन 31 अक्टूबर, उनके मेट्रिक के सर्टिफिकेट में होने के कारण उसे मान लिया जाता है।
#7 एक समय था जब गुजरात में ब्रूबोनिक प्लेग बीमारी प्लेग रोग हर जगह फैला हुआ था। उसी समय उनके एक अच्छा मित्र को भी उस खतरनाक बीमारी से संक्रमित हो गया था। उसकी देखभाल करने के कारन पटेल को भी उस बीमारी से संक्रमण हो गे जिसके कारन वे अपने परिवार से कुछ दिनों के लिए दूर चले गए और नडियाद के एक छोटे से मंदिर में अकेले रहने लगे। वे पूरा ठीक होने के बाद वहां से वापस लौटे।
#8 हलाकि सरदार पटेल जी के कई छोटे टकराव पंडित जवाहर लाल नेहरु के साथ रहे पर जहां भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ने उन्हें सांप्रदायिक होने का आरोप लगाया जिसके चीज ने एक बार और हमेशा के लिए दोनों के बीच राग तोड़ दिया और उन्होंने ने नेहरु जी से कभी भी बात नहीं किया।
#9 जब वे 33 वर्ष के थे तो उनकी पत्नी झावेरबा की मृत्यु हो गयी पर उनसे अत्यधिक प्रेम करने के कारन उन्होंने कभी भी दूसरी बार विवाह नहीं किया।
#10 वे 1920 में गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने और 1945 तक इस पद को सही मायने में संभाला।
#11 सरदार वल्लभ भाई पटेल जी और राष्टपिता महात्मा गाँधी एक दुसरे के बहुत ही करीबी थे। कहा जाता है गाँधी जी के मृत्यु के बाद अचानक उनका स्वास्थ्य भी धीरे धीरे ख़राब होने लगा और उनके मृत्यु के दो महीने बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और बाद में 15 दिसम्बर 1950 को उनका निधन हो गया।
#12 उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू किया था और उसके कारन उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। वे पहले भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने पूरी तरीके से भारतीय नियंत्रित राज्य की मांग की थी।
#13 उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवाएँ. (आईएएस) के निर्माण में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।
सरदार वल्लभभाई पटेल जी के प्रतिमा से जुड़े तथ्य सरदार वल्लभभाई पटेल – “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” in
मुख्य चित्र का स्रोत – अमर उजाला
सरदार वल्लभभाई पटेल जी के “स्टेचू ऑफ़ यूनिटी” 31 अक्टूबर 2014 से बनान शुरू किया गया है। इस प्रतिमा से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हैं जिसके विषय में शायद ही लोगों को पता है। चलिए इसके क्लुच तथ्यों के विष में हम आपको बताते हैं –
- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना की घोषणा 2010 में हुई और इसका शिलान्यास 31 अक्टूबर 2013 को उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने किया था।
- इस सरदार वल्लभभाई पटेल जी के प्रतिमा को सरदार सरोवर बांध के पास नर्मदा नदी के एक द्वीप पर बनाया गया है।
- प्रतिमा को बनाने में कुल 3000 करोड़ से ज्यादा लागत लगी है।
- इसकी ऊंचाई 597 फीट या 182 मीटर है जो की अमेरिका के स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से दोगुना है।
- इस मूर्ती को बनाने के लिए भारत के भिन्न राज्यों से लोहे का चुरा एकत्रित किया जा रहा है जिसके लिए भारत के कोने कोने में 1000 खाली ट्रक भेजे गए।
- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण टर्नर कंस्ट्रक्शन द्वारा किया गया है। यह कंपनी दुबई में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची इमारत ‘बुर्ज खलीफा’ के निर्माण में भी शामिल थी।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। सामान्य किसान परिवार से जुड़े होने और कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। उनके जीवन के विवरण में परिवार और शिक्षा का उल्लेख उपयोगी है, लेकिन किसी लोकप्रिय कथा को बिना प्राथमिक स्रोत के निश्चित घटना बताना उचित नहीं।
वकालत से सार्वजनिक जीवन तक
पटेल ने वकील के रूप में काम किया और धीरे-धीरे सार्वजनिक संस्थाओं में भाग लेने लगे। उनकी प्रशासनिक क्षमता, व्यावहारिक निर्णय तथा संवाद कौशल बाद में राजनीतिक काम में महत्वपूर्ण सिद्ध हुए। उन्हें केवल कठोर नेता के रूप में प्रस्तुत करना उनके संगठन कौशल और कानून संबंधी अनुभव को कम करके देखना होगा।
खेड़ा आंदोलन का संदर्भ
गुजरात में किसानों के राजस्व और आर्थिक कठिनाइयों के प्रश्नों पर पटेल ने गांधी के साथ काम किया। खेड़ा जैसे आंदोलनों का अध्ययन करने से स्थानीय किसानों, प्रशासन तथा औपनिवेशिक कानूनों के संबंध समझ में आते हैं। किसी आंदोलन के परिणाम को केवल एक व्यक्ति के प्रयासों से नहीं, व्यापक सहयोग से देखना चाहिए।
बारडोली सत्याग्रह
1928 के बारडोली सत्याग्रह में किसानों के राजस्व संबंधी विरोध का संगठन पटेल की सार्वजनिक भूमिका से जुड़ा है। इसी दौर में सरदार संबोधन प्रसिद्ध हुआ। इसमें महिलाओं सहित स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण थी। नागरिक आंदोलनों के इतिहास में संगठन, अनुशासन तथा संवाद की भूमिका पर विचार करने का यह अच्छा अवसर देता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में थे। उन्होंने कई राजनीतिक अभियानों और संगठनात्मक निर्णयों में योगदान दिया। विभिन्न नेताओं के विचार और रणनीति हर परिस्थिति में समान नहीं होती थी; इसलिए स्वतंत्रता आंदोलन का अध्ययन एक साझा लेकिन बहुआयामी इतिहास के रूप में करना चाहिए।
गांधी से संबंध
वल्लभभाई पटेल और महात्मा गांधी के बीच राजनीतिक सहयोग और परस्पर विश्वास का संबंध था। वे अनेक सार्वजनिक मुद्दों पर साथ काम करते रहे। नेतृत्व संबंधों को केवल व्यक्तिगत मित्रता या एकतरफा आदेश मानना इतिहास की जटिलताओं को अनदेखा कर सकता है। राजनीतिक निर्णयों में परिस्थितियाँ और संस्थाएँ भी महत्वपूर्ण होती हैं।
भारत की स्वतंत्रता और विभाजन
1947 में स्वतंत्रता के साथ विभाजन, विस्थापन और हिंसा की गंभीर मानवीय चुनौतियाँ सामने आईं। तत्कालीन नेतृत्व के सामने सुरक्षा, राहत और प्रशासन के कठिन काम थे। पटेल की भूमिका को समझते समय प्रभावित परिवारों तथा सामान्य नागरिकों की परिस्थितियों पर भी ध्यान देना चाहिए।
पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री
स्वतंत्र भारत की सरकार में पटेल उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे। इन पदों का संबंध प्रशासन, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय समन्वय जैसी जिम्मेदारियों से था। किसी सरकारी निर्णय का श्रेय या दोष निर्धारित करते समय मंत्रिमंडल, राज्य सरकारों तथा अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जाँचना जरूरी है।
रियासतों के एकीकरण में भूमिका
स्वतंत्रता के समय ब्रिटिश भारत के साथ अनेक देशी रियासतें थीं। उनके भारत से जुड़ने की प्रक्रिया में पटेल ने महत्वपूर्ण राजनीतिक नेतृत्व किया। राजनय, संवाद और अलग परिस्थितियों में अलग उपाय अपनाने पड़े। भारत के मानचित्र में हुए बदलाव को समझने के लिए रियासतों के नाम और समयरेखा देखना उपयोगी है।
वीपी मेनन का सहयोग
रियासतों के राजनीतिक एकीकरण के संदर्भ में वीपी मेनन जैसे प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका उल्लेखनीय रही। राजनीतिक नेतृत्व और तकनीकी प्रशासनिक तैयारी दोनों जरूरी थे। इतिहास में किसी बड़ी उपलब्धि को एक अकेले व्यक्ति के काम के रूप में दिखाना अन्य योगदानों को छिपा सकता है।
जूनागढ़ और हैदराबाद की जटिलता
जूनागढ़ तथा हैदराबाद जैसी रियासतों का भारत में समावेश अलग राजनीतिक परिस्थितियों और प्रक्रियाओं से जुड़ा था। सभी रियासतें बिल्कुल एक समान तरीके से नहीं जुड़ीं। इस विषय में जटिल विवाद और मानवीय परिणाम भी हैं, इसलिए केवल विजयी नारे से पूरे इतिहास का चित्रण नहीं किया जा सकता।
संविधान और प्रशासन
स्वतंत्रता के बाद संवैधानिक संस्थाओं तथा अखिल भारतीय सेवाओं की संरचना पर चर्चा हुई। पटेल ने सार्वजनिक सेवाओं के प्रशासनिक महत्व की वकालत की। आधुनिक संस्थाओं का विकास अनेक विधिक और राजनीतिक निर्णयों का परिणाम था। किसी आज की सेवा का पूरा स्वरूप 1947 में ही निश्चित हो गया था, ऐसा मानना गलत है।
राष्ट्रीय एकता दिवस
भारत में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह सरदार पटेल के जन्मदिन से जुड़ा अवसर है, जब देश की विविधता, संस्थाओं और नागरिक संबंधों पर चर्चा की जा सकती है। राष्ट्रीय एकता का अर्थ किसी भाषा या संस्कृति को मिटाना नहीं, बल्कि समान अधिकारों का सम्मान करना भी है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
गुजरात में सरदार पटेल को समर्पित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को हुआ। प्रतिमा लगभग 182 मीटर ऊँची है। स्मारक की विशेषताओं के साथ उसके पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा पर्यावरणीय पहलुओं पर भी तथ्य आधारित बातचीत की जा सकती है।
मृत्यु और विरासत
पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में हुआ। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राज्य एकीकरण और आधुनिक प्रशासन में उनकी भूमिका को याद किया जाता है। इतिहास पढ़ते समय प्रशंसा के साथ उसके दस्तावेज, समयरेखा तथा दूसरे नेताओं के योगदान भी समझना महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरदार पटेल का जन्म कब हुआ?
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में।
सरदार की उपाधि किस संघर्ष से जुड़ी है?
बारडोली सत्याग्रह के दौर से।
स्वतंत्र भारत में उनके पद क्या थे?
पहले उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री।
राष्ट्रीय एकता दिवस कब है?
31 अक्टूबर को।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहाँ है?
गुजरात में नर्मदा नदी क्षेत्र में।
विश्वसनीय संदर्भ एवं संबंधित अध्ययन
पटेल के जीवन का ऐतिहासिक परिचय तथा राष्ट्रीय एकता दिवस तथा पटेल के विचार।


टिप्पणी करें खोलें