चाय पीने के फायदे और नुकसान केवल इस बात से तय नहीं होते कि आप चाय पीते हैं या नहीं। असली फर्क मात्रा, चाय के प्रकार, उसमें डाली गई चीनी और दूध, दिन के किस समय आप चाय पीते हैं, आपकी नींद, दवाएँ, गर्भावस्था और कैफीन के प्रति आपकी संवेदनशीलता से पड़ता है।
सामान्य मात्रा में बिना बहुत अधिक चीनी वाली काली, हरी, ऊलोंग या सफेद चाय अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। लेकिन बहुत अधिक कैफीन बेचैनी, तेज धड़कन, सिरदर्द, पेट की परेशानी और खराब नींद जैसी समस्याएँ बढ़ा सकता है।
चाय को न तो हर बीमारी की दवा मानना सही है और न ही सामान्य मात्रा में इसे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक घोषित करना। इस लेख में 2026 तक उपलब्ध भरोसेमंद स्वास्थ्य जानकारी के आधार पर चाय के वास्तविक लाभ, सीमाएँ और सावधानियाँ समझाई गई हैं।
चाय वास्तव में क्या है?
काली चाय, हरी चाय, ऊलोंग चाय और सफेद चाय एक ही पौधे कैमेलिया साइनेंसिस की पत्तियों से बनती हैं। इनके स्वाद, रंग और रासायनिक संरचना में अंतर मुख्य रूप से पत्तियों के प्रसंस्करण के तरीके से आता है।
तुलसी, कैमोमाइल, पुदीना या अन्य जड़ी-बूटियों से बना पेय आम बोलचाल में चाय कहलाता है, लेकिन तकनीकी रूप से वह पारंपरिक चाय-पौधे से बनी चाय नहीं है। इसलिए “हर्बल चाय” में कैफीन और अन्य घटकों की मात्रा अलग हो सकती है।
चाय में कौन-कौन से प्रमुख घटक होते हैं?
चाय में पानी के अलावा कैफीन, पॉलीफेनॉल, थियोफिलीन, थियोब्रोमीन, अमीनो अम्ल और बहुत कम मात्रा में विभिन्न खनिज तथा अन्य पौध-रसायन पाए जाते हैं। चाय के पॉलीफेनॉल पर हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर काफी शोध हुआ है।
| घटक | शरीर पर संभावित असर |
|---|---|
| कैफीन | कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ा सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में नींद, बेचैनी और धड़कन प्रभावित कर सकता है। |
| पॉलीफेनॉल | पौधों में पाए जाने वाले यौगिक हैं जिनके स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध जारी है। |
| पानी | दैनिक तरल सेवन में योगदान देता है। |
| दूध | मिलाने पर ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व बढ़ते हैं। |
| चीनी | मात्रा बढ़ने पर अतिरिक्त कैलोरी और मुक्त चीनी का सेवन बढ़ाती है। |
चाय में कितना कैफीन होता है?
चाय में कैफीन की मात्रा एक निश्चित संख्या नहीं होती। पत्ती का प्रकार, कितनी पत्ती डाली गई, पानी का तापमान, कितनी देर तक चाय बनाई गई और कप का आकार, इन सबका असर पड़ता है। इसलिए दो अलग घरों या दुकानों की एक जैसी दिखने वाली चाय में भी कैफीन अलग हो सकता है।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार अधिकांश स्वस्थ वयस्कों में कुल 400 मिलीग्राम कैफीन प्रतिदिन तक की मात्रा सामान्यतः नकारात्मक प्रभावों से जुड़ी नहीं मानी जाती। लेकिन यह सीमा केवल चाय की नहीं है। इसमें कॉफी, कोला, ऊर्जा-पेय, चॉकलेट और कैफीन वाली दवाओं से मिलने वाला कैफीन भी शामिल है।
किसी व्यक्ति को 400 मिलीग्राम से बहुत कम कैफीन पर भी बेचैनी या नींद की समस्या हो सकती है। इसलिए सरकारी सीमा को “हर व्यक्ति के लिए लक्ष्य” न समझें। यदि कम मात्रा में ही दिक्कत होती है, तो आपकी व्यक्तिगत सहनशीलता अधिक महत्वपूर्ण है।
चाय पीने के संभावित फायदे
1. कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ सकती है
कैफीन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है। इसलिए चाय पीने के बाद कुछ लोगों को उनींदापन कम और ध्यान थोड़ा बेहतर महसूस हो सकता है। पढ़ाई या काम के दौरान यह अस्थायी लाभ उपयोगी लग सकता है, लेकिन चाय पर्याप्त नींद की जगह नहीं ले सकती।
2. बिना चीनी की चाय कम कैलोरी वाला पेय हो सकती है
सादी चाय में बहुत कम ऊर्जा होती है। यदि कोई व्यक्ति मीठे शीतल पेय की जगह बिना चीनी या कम चीनी वाली चाय चुनता है, तो कुल चीनी और कैलोरी घटाने में मदद मिल सकती है।
लेकिन भारतीय शैली की दूध और चीनी वाली चाय अलग बात है। यदि हर कप में एक या दो चम्मच चीनी डाली जाती है और दिन में कई कप पिए जाते हैं, तो कुल चीनी सेवन जल्दी बढ़ सकता है।
3. दैनिक तरल सेवन में योगदान
चाय मुख्य रूप से पानी से बनती है। सामान्य मात्रा में चाय पीना दैनिक तरल सेवन में योगदान देता है। केवल इस कारण से कि उसमें कैफीन है, यह कहना कि हर कप चाय शरीर को निर्जलित कर देता है, सही नहीं है।
4. हृदय संबंधी कुछ जोखिम कारकों पर छोटा लाभ संभव
राष्ट्रीय पूरक एवं समेकित स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार उपलब्ध सीमित शोध में हरी और काली चाय से रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल जैसे कुछ हृदय-जोखिम कारकों पर छोटा लाभ दिखाई देता है। लेकिन प्रमाण इतने मजबूत नहीं हैं कि चाय को हृदय रोग की दवा माना जाए।
5. हरी चाय से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में छोटी कमी देखी गई है
कुछ अध्ययनों में हरी चाय या हरी चाय के उत्पादों से कुल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में छोटी कमी देखी गई है। ध्यान रखें कि ऐसे कई अध्ययनों में पेय की जगह केंद्रित अर्क का उपयोग हुआ था। इसलिए इसे रोज पी जाने वाली चाय के असर के बराबर मानना ठीक नहीं है।
हरी चाय पर अलग विस्तृत जानकारी के लिए ग्रीन टी के फायदे और सावधानियाँ वाला लेख पढ़ सकते हैं।
क्या चाय वजन कम करती है?
चाय अपने आप वजन घटाने का भरोसेमंद तरीका नहीं है। हरी चाय में मौजूद कैटेचिन और कैफीन पर हुए शोध में शरीर के वजन पर छोटा या अनिश्चित प्रभाव दिखाई देता है। कुछ अध्ययनों में मामूली फर्क मिला है, जबकि उपलब्ध प्रमाण किसी बड़े वजन-घटाने वाले प्रभाव का समर्थन नहीं करते।
यदि आप रोज मीठा पेय पीते थे और उसकी जगह बिना चीनी की चाय लेते हैं, तो कैलोरी कम होने से वजन प्रबंधन में अप्रत्यक्ष मदद मिल सकती है। वास्तविक वजन परिवर्तन कुल भोजन, शारीरिक गतिविधि, नींद, हार्मोन, दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
वजन प्रबंधन के लिए सुरक्षित वजन घटाने के तरीके अधिक उपयोगी मार्गदर्शिका है।
क्या चाय कैंसर से बचाती है?
अभी ऐसा निश्चित प्रमाण नहीं है कि चाय पीने से कैंसर को रोका जा सकता है। मानव अध्ययनों के परिणाम अलग-अलग रहे हैं। इसलिए “ग्रीन टी कैंसर रोकती है” या “काली चाय कैंसर ठीक करती है” जैसे दावे वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे निकल जाते हैं।
इसी तरह किसी एक प्रकार की चाय को कैंसर का निश्चित कारण बताना भी उचित नहीं है। कैंसर का जोखिम उम्र, तंबाकू, शराब, संक्रमण, आनुवंशिकता, पर्यावरण, आहार और अनेक अन्य कारकों से प्रभावित होता है।
चाय पीने के संभावित नुकसान
1. नींद आने में देर हो सकती है
कैफीन का सबसे आम असर नींद पर पड़ता है। यदि आप शाम या रात में चाय पीने के बाद देर तक जागते रहते हैं, रात में बार-बार नींद टूटती है या सुबह थकान रहती है, तो देर की चाय कम करना उपयोगी हो सकता है।
हर व्यक्ति में कैफीन शरीर से निकलने की गति अलग होती है। इसलिए किसी एक निश्चित समय को सबके लिए सही नहीं कहा जा सकता। अपनी नींद के आधार पर समय तय करें। अच्छी नींद के तरीके भी पढ़ सकते हैं।
2. बेचैनी, हाथ काँपना या तेज धड़कन
बहुत अधिक कैफीन लेने से कुछ लोगों में घबराहट, चिड़चिड़ापन, हाथ काँपना, दिल की धड़कन तेज महसूस होना, सिरदर्द या ध्यान में बेचैनी हो सकती है। कैफीन के प्रति संवेदनशील व्यक्ति कम मात्रा में भी ऐसे लक्षण महसूस कर सकते हैं।
3. पेट में जलन या मतली
गाढ़ी चाय, ज्यादा कैफीन या खाली पेट चाय कुछ लोगों में पेट की जलन, मतली या बेचैनी बढ़ा सकती है। लेकिन यह कहना कि चाय सीधे पेट का अल्सर बना देती है, सही सामान्यीकरण नहीं है।
यदि लगातार पेट दर्द, निगलने में कठिनाई, खून की उल्टी या काला मल जैसे लक्षण हों तो केवल चाय बंद करके इंतजार न करें; चिकित्सकीय जाँच जरूरी है। सामान्य अम्लता के बारे में अम्लता के कारण और उपाय पढ़ सकते हैं।
4. चीनी वाली चाय से कैलोरी तेजी से बढ़ सकती है
दिन में एक बार हल्की मीठी चाय और दिन में पाँच-छह बार खूब चीनी वाली चाय का असर एक जैसा नहीं होगा। बार-बार मीठी चाय लेने से अतिरिक्त चीनी और कैलोरी बढ़ सकती है, जिसका लंबे समय में वजन और दाँतों की सेहत पर असर पड़ सकता है।
चाय स्वयं मधुमेह का अकेला कारण नहीं है। लेकिन यदि चाय के जरिए रोज काफी अतिरिक्त चीनी ली जा रही है, तो यह पूरे आहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है।
5. दाँतों पर दाग पड़ सकते हैं
काली चाय में मौजूद रंगद्रव्य समय के साथ दाँतों पर बाहरी दाग बढ़ा सकते हैं। नियमित दाँत सफाई, सही ब्रशिंग और चाय के बाद पानी पीना या कुल्ला करना व्यावहारिक उपाय हैं।
6. अचानक कैफीन बंद करने पर वापसी-लक्षण हो सकते हैं
जो व्यक्ति लंबे समय से रोज बहुत अधिक कैफीन लेता है, वह अचानक बंद करने पर सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान में कमी महसूस कर सकता है। यदि बहुत ज्यादा चाय कम करनी है तो कई लोगों के लिए धीरे-धीरे मात्रा घटाना ज्यादा सहज रहता है।
क्या खाली पेट चाय पीना नुकसानदायक है?
खाली पेट चाय हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है, ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। लेकिन कुछ लोगों को सुबह खाली पेट गाढ़ी चाय से मतली, जलन या पेट में असहजता होती है। यदि आपके साथ ऐसा होता है तो हल्के नाश्ते के बाद चाय पीना बेहतर लग सकता है।
यदि खाली पेट चाय पीने पर कोई समस्या नहीं होती, तो केवल इंटरनेट पर फैले “खाली पेट चाय जहर है” जैसे दावों से डरने की जरूरत नहीं है।
क्या चाय आयरन के अवशोषण को कम कर सकती है?
चाय के कुछ पॉलीफेनॉल भोजन से मिलने वाले गैर-हीम आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं। यह विशेष रूप से पौध-आधारित भोजन से मिलने वाले आयरन के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि आपके खून में आयरन की कमी है या डॉक्टर ने आयरन की गोली दी है, तो भोजन या आयरन की दवा के ठीक साथ बहुत गाढ़ी चाय पीने की आदत के बारे में डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से बात करें। थोड़े अंतर से चाय लेना कई लोगों के लिए व्यावहारिक उपाय हो सकता है।
गर्भावस्था में कितनी चाय पी सकते हैं?
गर्भावस्था में केवल “कितने कप चाय” गिनना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि हर कप में कैफीन अलग हो सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स गर्भावस्था में कुल कैफीन 200 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम रखने की सलाह देता है।
इस कुल मात्रा में चाय के साथ कॉफी, चॉकलेट, शीतल पेय और ऊर्जा-पेय से मिलने वाला कैफीन भी जोड़ना चाहिए। यदि आप गर्भवती हैं, गर्भधारण की योजना बना रही हैं या किसी जोखिम वाली गर्भावस्था में हैं, तो अपनी वास्तविक मात्रा डॉक्टर से साझा करें।
गर्भावस्था की सामान्य देखभाल के लिए गर्भावस्था देखभाल से जुड़ी जानकारी भी पढ़ सकते हैं।
स्तनपान के दौरान चाय
कैफीन की कुछ मात्रा स्तन दूध में पहुँच सकती है। सामान्य कम या मध्यम मात्रा में अधिकांश शिशुओं में समस्या नहीं होती, लेकिन बहुत अधिक कैफीन लेने पर कुछ शिशुओं में चिड़चिड़ापन या नींद की समस्या दिखाई दे सकती है। यदि शिशु असामान्य रूप से बेचैन है और माँ बहुत अधिक कैफीन ले रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
दवाओं के साथ चाय कब समस्या कर सकती है?
सामान्य चाय और केंद्रित हरी चाय अर्क को एक जैसा न समझें। राष्ट्रीय पूरक एवं समेकित स्वास्थ्य केंद्र ने बताया है कि अधिक मात्रा की हरी चाय या उसके अर्क कुछ दवाओं की मात्रा और असर बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए नाडोलोल, एटोरवास्टेटिन और रैलॉक्सिफीन जैसी कुछ दवाओं के साथ प्रभाव दर्ज किया गया है।
यदि आप नियमित दवा लेते हैं तो सामान्य पेय की थोड़ी मात्रा को लेकर अनावश्यक डरने की बजाय अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट को बताएं कि आप कितनी चाय या कोई हर्बल पूरक लेते हैं। विशेष सावधानी केंद्रित अर्क और कैप्सूल के साथ जरूरी है।
ग्रीन टी और ग्रीन टी अर्क में महत्वपूर्ण अंतर
कप में बनाई गई हरी चाय और कैप्सूल या गोली में मिलने वाला केंद्रित हरी चाय अर्क समान चीजें नहीं हैं। वयस्कों में पेय के रूप में हरी चाय से सामान्यतः बड़ी सुरक्षा चिंता नहीं बताई गई है, लेकिन उसमें कैफीन होता है।
दूसरी ओर केंद्रित अर्क से मतली, कब्ज, पेट की परेशानी और रक्तचाप बढ़ने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। दुर्लभ मामलों में यकृत को नुकसान होने की रिपोर्ट भी मुख्यतः ऐसे अर्क से जुड़ी है। इसलिए “प्राकृतिक” या “हर्बल” लिखा होने भर से कोई पूरक सुरक्षित नहीं हो जाता।
क्या ज्यादा चाय से हड्डियाँ कमजोर होती हैं?
सामान्य मात्रा की चाय को सीधे हड्डियाँ कमजोर करने वाला पेय कहना सही नहीं है। हड्डियों की सेहत पर कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन, शारीरिक गतिविधि, उम्र, हार्मोन, धूम्रपान और अनेक अन्य कारकों का प्रभाव पड़ता है।
अत्यधिक मात्रा में लंबे समय तक चाय या कैफीन लेने की चर्चा को सामान्य दो-तीन कप चाय पीने वाले व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं करना चाहिए। यदि आपको ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों से जुड़ी बीमारी है तो अपने पूरे आहार और दवाओं के संदर्भ में डॉक्टर की सलाह लें।
दूध वाली चाय और काली चाय में क्या बेहतर है?
दोनों में से हर व्यक्ति के लिए एक को “सबसे स्वस्थ” कहना उचित नहीं है। बिना चीनी की काली चाय में कैलोरी कम होती है। दूध वाली चाय में दूध से प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व जुड़ सकते हैं, लेकिन चीनी और अधिक दूध से कुल कैलोरी भी बढ़ती है।
यदि आपका उद्देश्य वजन या चीनी सेवन नियंत्रित करना है तो मुख्य ध्यान कप के नाम पर नहीं, बल्कि उसमें कितनी चीनी और कुल कितने कप लिए जा रहे हैं, इस पर दें।
मसाला चाय कितनी स्वस्थ है?
अदरक, इलायची, दालचीनी या लौंग डालने से चाय का स्वाद बदलता है और इनमें अपने पौध-रसायन होते हैं। लेकिन मसाला डाल देने से बहुत ज्यादा चीनी या कैफीन वाली चाय अपने आप “औषधीय पेय” नहीं बन जाती।
सर्द मौसम या गले में हल्की परेशानी के समय गर्म मसाला चाय से आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे संक्रमण का उपचार नहीं मानना चाहिए।
किसे चाय की मात्रा पर अधिक ध्यान देना चाहिए?
- जिन्हें थोड़े कैफीन से भी धड़कन या घबराहट होती है।
- जिनकी नींद शाम की चाय से प्रभावित होती है।
- गर्भवती महिलाएँ या गर्भधारण की योजना बना रही महिलाएँ।
- स्तनपान कराने वाली माताएँ, विशेषकर यदि शिशु बेचैन रहता है।
- आयरन की कमी या एनीमिया वाले लोग।
- कुछ नियमित दवाएँ लेने वाले लोग।
- अम्लता या पेट की संवेदनशीलता वाले लोग।
- जो लोग दिनभर कई कप बहुत मीठी चाय पीते हैं।
स्वस्थ तरीके से चाय पीने के 10 आसान नियम
- अपनी कुल दैनिक कैफीन मात्रा का अंदाजा रखें।
- हर कप में अनावश्यक अतिरिक्त चीनी कम करें।
- नींद प्रभावित होती हो तो देर शाम या रात की चाय घटाएँ।
- खाली पेट परेशानी हो तो नाश्ते के बाद चाय लें।
- आयरन की कमी हो तो भोजन और आयरन दवा के साथ चाय लेने की आदत पर डॉक्टर से चर्चा करें।
- पानी पीना न छोड़ें।
- चाय को भोजन का विकल्प न बनाएं।
- केंद्रित हरी चाय अर्क को सामान्य चाय जैसा सुरक्षित न मानें।
- दवा लेते हों तो हर्बल या चाय-अर्क पूरक के बारे में डॉक्टर या फार्मासिस्ट को बताएं।
- गर्भावस्था में कुल कैफीन 200 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम रखने की सलाह याद रखें।
चाय के बारे में आम गलत धारणाएँ
| लोकप्रिय दावा | वास्तविक समझ |
|---|---|
| चाय शरीर को हमेशा निर्जलित करती है | सामान्य मात्रा की चाय दैनिक तरल सेवन में योगदान करती है। |
| ग्रीन टी तेजी से वजन घटाती है | वजन पर असर छोटा या अनिश्चित है। |
| चाय कैंसर से बचाती है | मानव अध्ययनों में ऐसा निश्चित प्रमाण नहीं है। |
| खाली पेट चाय हर किसी के लिए खतरनाक है | कुछ लोगों में परेशानी हो सकती है, लेकिन यह सार्वभौमिक नियम नहीं है। |
| गर्भावस्था में चाय पूरी तरह बंद करनी होती है | मुख्य ध्यान सभी स्रोतों से मिलने वाले कुल कैफीन पर है। |
| ग्रीन टी कैप्सूल सामान्य हरी चाय जैसा है | केंद्रित अर्क में दुष्प्रभाव और दवा-प्रतिक्रिया का जोखिम अलग हो सकता है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिन में कितनी चाय पीना ठीक है?
एक निश्चित कप संख्या सबके लिए सही नहीं है। कप का आकार और चाय की ताकत बदलती रहती है। अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए सभी स्रोतों से कुल कैफीन लगभग 400 मिलीग्राम प्रतिदिन तक सामान्यतः नकारात्मक प्रभावों से जुड़ा नहीं माना जाता, लेकिन व्यक्तिगत संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है।
क्या सुबह खाली पेट चाय पी सकते हैं?
यदि आपको कोई परेशानी नहीं होती तो केवल खाली पेट होने के कारण चाय को खतरनाक नहीं कहा जा सकता। लेकिन मतली, जलन या बेचैनी होती हो तो नाश्ते के बाद लेना बेहतर हो सकता है।
क्या बिना चीनी की चाय बेहतर है?
यदि उद्देश्य अतिरिक्त चीनी और कैलोरी कम करना है तो बिना चीनी या कम चीनी वाली चाय बेहतर विकल्प हो सकती है।
क्या ग्रीन टी दवा की जगह ले सकती है?
नहीं। ग्रीन टी को उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, कैंसर या मोटापे की निर्धारित चिकित्सा का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
क्या चाय से नींद खराब होती है?
हाँ, कैफीन-संवेदनशील लोगों में खासकर देर की चाय नींद आने में देरी या नींद की गुणवत्ता खराब कर सकती है।
क्या चाय आयरन की कमी बढ़ा सकती है?
भोजन के साथ चाय गैर-हीम आयरन के अवशोषण को कम कर सकती है। यदि आपको आयरन की कमी है तो भोजन और आयरन दवा के समय चाय की आदत डॉक्टर से चर्चा करें।
निष्कर्ष
चाय न तो चमत्कारी औषधि है और न सामान्य मात्रा में कोई विषैला पेय। अधिकांश स्वस्थ वयस्कों में संतुलित मात्रा की चाय सामान्य आहार का हिस्सा हो सकती है। असली सावधानी कैफीन की कुल मात्रा, नींद, अतिरिक्त चीनी, पेट की संवेदनशीलता, आयरन की कमी, गर्भावस्था, दवाओं और केंद्रित हरी चाय अर्क को लेकर है।
अपने शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। यदि चाय के बाद बार-बार तेज धड़कन, घबराहट, गंभीर पेट की परेशानी या नींद की समस्या होती है तो मात्रा घटाएँ और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

VERY USEFUL TIPS . THNX FOR ALL THIS
WRITTEN VERY NICE – ADVANTAGE & DISADVANTAGE OF TEA