अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रावधान थे। 5-6 अगस्त 2019 के राष्ट्रपति आदेशों और संसदीय प्रक्रिया के बाद अनुच्छेद 370 का पुराना विशेष प्रभाव समाप्त हो गया और 1954 का वह राष्ट्रपति आदेश भी निष्प्रभावी हो गया जिसके माध्यम से अनुच्छेद 35A संविधान में जोड़ा गया था।
इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 लागू हुआ और 31 अक्टूबर 2019 से पुराने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया — जम्मू-कश्मीर, जहाँ विधानसभा का प्रावधान है, और लद्दाख, जहाँ विधानसभा नहीं है। सितंबर 2026 तक गृह मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में जम्मू-कश्मीर अभी भी विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है और लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है।
11 दिसंबर 2023 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 से संबंधित 2019 की संवैधानिक कार्रवाई को वैध माना। न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन की वैधता पर अंतिम निर्णय देना आवश्यक नहीं समझा, क्योंकि केंद्र की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया गया था। न्यायालय ने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने को वैध माना और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा यथाशीघ्र बहाल करने की बात कही।
अनुच्छेद 370 क्या था?
अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान के भाग 21 में रखा गया था, जिसका शीर्षक अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधानों से संबंधित है। यह जम्मू-कश्मीर के भारत से संवैधानिक संबंधों के लिए विशेष व्यवस्था प्रदान करता था।
26 जनवरी 1950 से लागू संविधान में इसे मूल रूप से अनुच्छेद 370 के रूप में शामिल किया गया था। संविधान सभा की बहसों में इसका प्रारंभिक मसौदा अनुच्छेद 306A के रूप में आया था। इसलिए पुराने लेख में इसे “360A” कहना गलत था।
जम्मू-कश्मीर भारत में कैसे शामिल हुआ?
1947 में ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी। महाराजा हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए और भारत ने इसे स्वीकार किया। विलय-पत्र के तहत रक्षा, विदेश मामले और संचार जैसे विषय भारत संघ के अधिकार में आए।
बाद की संवैधानिक प्रक्रिया में अनुच्छेद 370 के माध्यम से भारतीय संविधान के प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर राष्ट्रपति आदेशों द्वारा क्रमशः लागू किए गए। इसलिए यह धारणा भी गलत है कि 2019 से पहले भारतीय संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू ही नहीं था। वास्तव में संविधान के बहुत से प्रावधान वर्षों में पहले ही लागू किए जा चुके थे।
अनुच्छेद 370 को “अस्थायी” क्यों कहा गया?
संविधान में अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रावधान के रूप में रखा गया था। इसका खंड (3) राष्ट्रपति को इसे निष्प्रभावी या संशोधित करने की शक्ति देता था, लेकिन मूल पाठ में जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश की शर्त थी।
जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा 1957 में भंग हो गई और उसने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की सिफारिश नहीं की। इसी कारण बाद में यह प्रश्न महत्वपूर्ण संवैधानिक विवाद बना कि संविधान सभा के समाप्त होने के बाद अनुच्छेद 370 को किस प्रक्रिया से बदला या निष्प्रभावी किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान
अनुच्छेद 370 की व्यवस्था के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर की अपनी संविधान सभा बनी और राज्य का अलग संविधान 1957 में प्रभावी हुआ। साथ ही भारत का संविधान भी राष्ट्रपति आदेशों के माध्यम से राज्य पर लागू था।
2019 की संवैधानिक कार्रवाई के बाद जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान प्रभावी नहीं रहा और भारतीय संविधान के सभी प्रावधान वहाँ लागू हो गए।
अनुच्छेद 35A क्या था?
अनुच्छेद 35A भारतीय संविधान में 1954 के राष्ट्रपति आदेश के माध्यम से जोड़ा गया था। यह जम्मू-कश्मीर की विधायिका को “स्थायी निवासियों” की परिभाषा तय करने और उन्हें कुछ विशेष अधिकार देने की संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता था।
इन विशेष अधिकारों में राज्य सरकार की नौकरियाँ, अचल संपत्ति, छात्रवृत्ति और कुछ अन्य सार्वजनिक लाभ शामिल हो सकते थे।
क्या अनुच्छेद 35A “चुपके से” संविधान में जोड़ा गया था?
पुराने लेख में ऐसा लिखा था, लेकिन यह राजनीतिक भाषा है, तथ्यात्मक संवैधानिक विवरण नहीं। अनुच्छेद 35A संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 के माध्यम से राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 के तहत जारी किया था।
यह सामान्य अनुच्छेद 368 वाली संविधान संशोधन प्रक्रिया से नहीं आया था, और इसी प्रक्रिया की वैधता पर बाद में कानूनी बहस हुई। लेकिन इसे “गुप्त रूप से जोड़ा गया” कहना निष्पक्ष ऐतिहासिक भाषा नहीं है।
स्थायी निवासी कौन माने जाते थे?
जम्मू-कश्मीर के संविधान और राज्य के कानूनों में स्थायी निवासी की श्रेणी तय की गई थी। इस स्थिति से भूमि, सरकारी रोजगार, छात्रवृत्ति और अन्य अधिकार जुड़े थे।
यह व्यवस्था ऐतिहासिक “स्टेट सब्जेक्ट” नियमों की विरासत से भी जुड़ी थी, जिनकी जड़ें महाराजा के शासनकाल तक जाती हैं। इसलिए इसे केवल 1954 में अचानक बनी व्यवस्था समझना भी अधूरा है।
अनुच्छेद 35A पर विवाद क्यों था?
समर्थकों का तर्क था कि यह स्थानीय भूमि, रोजगार और जनसांख्यिकीय हितों की सुरक्षा करता था और जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक समझौते का हिस्सा था।
आलोचकों का तर्क था कि स्थायी निवासी व्यवस्था से भारत के अन्य नागरिकों के भूमि और सरकारी अवसरों पर प्रतिबंध लगता था और कुछ पुराने नियम महिलाओं, अनुसूचित समूहों तथा अन्य निवासियों के अधिकारों पर असमान प्रभाव डालते थे।
इन मुद्दों पर कानूनी और राजनीतिक बहस लंबे समय तक चली। इसलिए लेख में किसी एक पक्ष को निर्विवाद संवैधानिक सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
5 अगस्त 2019 को क्या हुआ?
5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति ने संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 2019 जारी किया। इसने 1954 के पुराने राष्ट्रपति आदेश का स्थान लिया और भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू करने की दिशा बनाई।
साथ ही अनुच्छेद 367 की व्याख्या में परिवर्तन के माध्यम से अनुच्छेद 370(3) की प्रक्रिया को लागू करने का रास्ता बनाया गया। संसद ने उस समय राज्य विधानसभा की शक्तियों का प्रयोग किया क्योंकि जम्मू-कश्मीर राष्ट्रपति शासन के अधीन था।
6 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 की स्थिति
6 अगस्त 2019 के राष्ट्रपति घोषणा-पत्र के बाद अनुच्छेद 370 के पुराने खंड प्रभावी रूप से निष्प्रभावी हो गए और केवल संशोधित खंड (1) बचा, जिसका अर्थ यह है कि भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू होंगे।
इसलिए “अनुच्छेद 370 संविधान से पूरी तरह मिटा दिया गया” और “अनुच्छेद 370 आज भी पहले जैसा लागू है” — दोनों कथन गलत हैं। सही समझ यह है कि उसका पुराना विशेष संवैधानिक प्रभाव समाप्त हो गया और अनुच्छेद संशोधित रूप में पाठ में मौजूद है।
अनुच्छेद 35A का क्या हुआ?
1954 का राष्ट्रपति आदेश 2019 के नए आदेश से प्रतिस्थापित हुआ। उसी पुराने आदेश के माध्यम से अनुच्छेद 35A जोड़ा गया था, इसलिए 35A भी प्रभावी नहीं रहा।
इसे “सर्वोच्च न्यायालय ने 35A को असंवैधानिक घोषित किया” कहना गलत है। 35A की प्रभावहीनता 2019 की संवैधानिक कार्रवाई का परिणाम थी।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019
संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 पारित किया और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह 31 अक्टूबर 2019 से लागू हुआ। इसके परिणामस्वरूप पुराने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा गया:
- जम्मू-कश्मीर — विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश।
- लद्दाख — बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश।
क्या जम्मू-कश्मीर अब राज्य है?
सितंबर 2026 तक नहीं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की वर्तमान आधिकारिक जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर अभी विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 के फैसले में केंद्र सरकार की उस बात को दर्ज किया कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और कहा कि यह यथाशीघ्र किया जाना चाहिए। लेकिन राज्य का दर्जा बहाल होने तक वर्तमान कानूनी स्थिति केंद्र शासित प्रदेश की ही है।
लद्दाख की वर्तमान स्थिति
लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश है और वहाँ विधानसभा नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 के निर्णय में लद्दाख को राज्य से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया।
सर्वोच्च न्यायालय का 11 दिसंबर 2023 का फैसला
पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2019 की संवैधानिक कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर निर्णय दिया। न्यायालय के प्रमुख निष्कर्ष थे:
- जम्मू-कश्मीर ने भारत में विलय के बाद अलग आंतरिक संप्रभुता नहीं रखी थी।
- अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रावधान माना गया।
- राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने की कार्रवाई को बरकरार रखा गया।
- लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने को वैध माना गया।
- जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय आवश्यक नहीं माना गया, क्योंकि केंद्र ने राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया।
- विधानसभा चुनाव कराने और राज्य का दर्जा यथाशीघ्र बहाल करने की दिशा बताई गई।
क्या 2019 की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द की?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 के पुराने विशेष प्रभाव को समाप्त करने वाली संवैधानिक कार्रवाई को बरकरार रखा।
इसलिए पुराने लेख की यह पंक्ति कि मामला “जल्द सर्वोच्च न्यायालय पहुँच सकता है” अब पूरी तरह पुरानी हो चुकी है; मामला न्यायालय पहुँचा, व्यापक सुनवाई हुई और 11 दिसंबर 2023 को संविधान पीठ ने फैसला दिया।
2019 के बाद कौन-से बड़े परिवर्तन हुए?
- भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू हुए।
- जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान प्रभावी नहीं रहा।
- 1954 के आदेश के समाप्त होने से अनुच्छेद 35A प्रभावहीन हुआ।
- पुराना राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित हुआ।
- केंद्र के अनेक कानून जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू हुए।
- स्थायी निवासी की पुरानी संवैधानिक व्यवस्था की जगह नए अधिवास और अन्य कानून आए।
- जम्मू-कश्मीर की विधानसभा व्यवस्था पुनर्गठन अधिनियम के तहत संचालित होती है।
क्या अब कोई भी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है?
2019 के बाद भूमि संबंधी कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए और पुराने स्थायी निवासी प्रतिबंधों की संवैधानिक सुरक्षा समाप्त हुई। लेकिन भूमि खरीद पूरी तरह “बिना किसी नियम” के नहीं है। कृषि भूमि, भूमि-उपयोग, स्थानीय नियम और अलग कानूनी श्रेणियाँ आज भी लागू हो सकती हैं।
इसलिए “अब भारत का कोई भी नागरिक किसी भी तरह की जमीन कहीं भी खरीद सकता है” जैसी सरल पंक्ति कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं है। वास्तविक खरीद से पहले वर्तमान भूमि कानून देखना चाहिए।
क्या अलग झंडा अब मान्य है?
जम्मू-कश्मीर के पुराने संविधान के प्रभावी न रहने के बाद पूर्व राज्य के अलग आधिकारिक झंडे की संवैधानिक स्थिति समाप्त हो गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज केंद्र शासित प्रदेश में आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज है।
तिरंगे के इतिहास के लिए भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास पढ़ सकते हैं।
अनुच्छेद 370 और संघवाद पर बहस
समर्थकों के अनुसार 2019 की कार्रवाई ने जम्मू-कश्मीर को भारत के समान संवैधानिक ढाँचे में पूरी तरह लाया और केंद्रीय कानूनों की समान लागू व्यवस्था बनाई।
आलोचकों के अनुसार जिस समय राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन था, उस समय उसकी सहमति की जगह संसद का उपयोग करना संघवाद और राज्य की लोकतांत्रिक सहमति पर गंभीर प्रश्न उठाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक कार्रवाई को बरकरार रखा, लेकिन राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के बड़े संघीय प्रश्न पर अंतिम निर्णय नहीं दिया।
भारतीय संघीय व्यवस्था की पृष्ठभूमि के लिए भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ पढ़ सकते हैं।
अनुच्छेद 370 और 35A में अंतर
| अनुच्छेद 370 | अनुच्छेद 35A |
|---|---|
| मूल संविधान का हिस्सा था | 1954 राष्ट्रपति आदेश से जोड़ा गया |
| जम्मू-कश्मीर और भारत के संवैधानिक संबंध की विशेष व्यवस्था | स्थायी निवासियों के विशेष अधिकारों को सुरक्षा |
| भाग 21 में स्थित | अनुच्छेद 35 के बाद जोड़ा गया प्रावधान |
| 2019 में पुराने विशेष प्रभाव को निष्प्रभावी किया गया | 1954 आदेश के समाप्त होने से प्रभावी नहीं रहा |
महत्वपूर्ण समयरेखा
| तिथि/वर्ष | घटना |
|---|---|
| 26 अक्टूबर 1947 | महाराजा हरि सिंह द्वारा विलय-पत्र पर हस्ताक्षर |
| 1949 | संविधान सभा में अनुच्छेद 306A का मसौदा, आगे अनुच्छेद 370 |
| 26 जनवरी 1950 | भारतीय संविधान और अनुच्छेद 370 प्रभावी |
| 1954 | राष्ट्रपति आदेश से अनुच्छेद 35A जोड़ा गया |
| 1957 | जम्मू-कश्मीर संविधान सभा समाप्त |
| 5-6 अगस्त 2019 | राष्ट्रपति आदेश और अनुच्छेद 370 के पुराने प्रभाव का अंत |
| 31 अक्टूबर 2019 | जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बने |
| 11 दिसंबर 2023 | सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 संबंधी 2019 कार्रवाई को बरकरार रखा |
पुराने लेख की प्रमुख गलतियाँ
| पुराना दावा | सही स्थिति |
|---|---|
| अनुच्छेद का प्रारंभिक नंबर 360A था | संविधान सभा में मसौदा अनुच्छेद 306A था। |
| 35A “चुपके से” जोड़ा गया | यह 1954 के सार्वजनिक राष्ट्रपति आदेश से अनुच्छेद 370 के तहत जोड़ा गया था। |
| 35A को असंवैधानिक घोषित किया गया | 1954 आदेश के प्रतिस्थापन से यह प्रभावहीन हुआ; इसे 2019 में अदालत ने अलग से असंवैधानिक घोषित नहीं किया। |
| मामला जल्द सर्वोच्च न्यायालय जाएगा | सुनवाई हो चुकी और 11 दिसंबर 2023 को संविधान पीठ का निर्णय आ चुका है। |
| जम्मू-कश्मीर अब फिर राज्य है | सितंबर 2026 तक यह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अनुच्छेद 370 पूरी तरह संविधान से हटा दिया गया है?
उसका पुराना विशेष प्रभाव समाप्त कर दिया गया है। संशोधित खंड (1) के रूप में अनुच्छेद का पाठ मौजूद है और सभी भारतीय संवैधानिक प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू होते हैं।
अनुच्छेद 35A अब लागू है?
नहीं। 1954 के राष्ट्रपति आदेश के प्रतिस्थापन के बाद यह प्रभावी नहीं रहा।
क्या सर्वोच्च न्यायालय ने 2019 की कार्रवाई को वैध माना?
हाँ। 11 दिसंबर 2023 की संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने की कार्रवाई को बरकरार रखा।
क्या जम्मू-कश्मीर वर्तमान में राज्य है?
सितंबर 2026 तक यह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य का दर्जा यथाशीघ्र बहाल करने की बात कही थी।
लद्दाख की स्थिति क्या है?
लद्दाख बिना विधानसभा वाला अलग केंद्र शासित प्रदेश है।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 370 और 35A को केवल राजनीतिक नारों से समझना पर्याप्त नहीं है। इनके पीछे 1947 का विलय-पत्र, संविधान सभा, राष्ट्रपति आदेश, जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान, स्थायी निवासी व्यवस्था, 2019 का पुनर्गठन और 2023 का सर्वोच्च न्यायालय निर्णय जुड़ा है। वर्तमान कानूनी स्थिति यह है कि अनुच्छेद 370 का पुराना विशेष प्रभाव समाप्त है, 35A प्रभावी नहीं है, जम्मू-कश्मीर सितंबर 2026 तक विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है और लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश है।