भारत में मुर्गी पालन केवल ब्रायलर और लेयर तक सीमित नहीं है। देश में कई स्वदेशी नस्लें हैं, जो अलग-अलग जलवायु, भोजन व्यवस्था और ग्रामीण परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई हैं। इनके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों ने ऐसी उन्नत किस्में भी विकसित की हैं जो बैकयार्ड, अर्ध-सघन और छोटे किसान मॉडल में अधिक अंडा या बेहतर वृद्धि दे सकें।
पुराने लेखों में अक्सर असील, कड़कनाथ, ग्रामप्रिया, वनराजा, झारसिम और कामरूप जैसी सभी मुर्गियों को एक ही तरह की “नस्ल” कहा जाता है। यह तकनीकी रूप से सही नहीं है। असील और कड़कनाथ जैसी कई मुर्गियां पंजीकृत स्वदेशी नस्लें हैं, जबकि वनराजा, ग्रामप्रिया, श्रीनिधि, नर्मदानिधि और सीएआरआई-निर्भीक जैसी कई पक्षी-रेखाएं वैज्ञानिक प्रजनन से विकसित उन्नत किस्में या क्रॉस हैं। इस अंतर को समझना किसान के लिए बहुत जरूरी है।
नस्ल और उन्नत किस्म में क्या अंतर है?
नस्ल ऐसे पक्षियों का अपेक्षाकृत स्थिर आनुवंशिक समूह होता है जिसकी पहचान, मूल क्षेत्र और विशिष्ट शारीरिक लक्षण पीढ़ियों से बने रहते हैं। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो स्वदेशी नस्लों का औपचारिक पंजीकरण करता है।
उन्नत किस्म वैज्ञानिक प्रजनन से तैयार की गई ऐसी पक्षी-रेखा हो सकती है जिसमें अधिक अंडे, तेज वृद्धि, बैकयार्ड अनुकूलन या स्थानीय रूप जैसी विशेषताओं को लक्ष्य बनाया गया हो। कई उन्नत किस्मों में दो या अधिक आनुवंशिक रेखाओं का योगदान होता है। इसलिए ग्रामप्रिया या वनराजा को कड़कनाथ जैसी पंजीकृत स्वदेशी नस्ल के बराबर श्रेणी में रखना सही नहीं है।
भारत में कितनी पंजीकृत स्वदेशी मुर्गी नस्लें हैं?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की 12 नवंबर 2025 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत में उस समय 21 पंजीकृत स्वदेशी मुर्गी नस्लें थीं। उसी बैठक में झारखंड की माला मुर्गी को नई स्वदेशी नस्ल के रूप में पंजीकृत किया गया। अगस्त 2026 में आईसीएआर की अगली नस्ल-पंजीकरण सूचना में नई मुर्गी नस्ल शामिल नहीं थी, इसलिए सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक पंजीकरण जानकारी में यही नवीनतम मुर्गी संख्या है।
पुरानी पुस्तकों और लेखों में 15, 18 या 20 नस्लों की संख्या मिल सकती है। इसका कारण यह है कि नई स्थानीय आबादियां वैज्ञानिक वर्णन और सत्यापन के बाद समय-समय पर पंजीकृत होती रही हैं। इसलिए किसी स्थायी संख्या की बजाय आईसीएआर-एनबीएजीआर की नवीनतम सूची देखना बेहतर है।
भारत की प्रमुख स्वदेशी मुर्गी नस्लें
| नस्ल | मुख्य पहचान | सामान्य उपयोग |
|---|---|---|
| असील | मजबूत शरीर, सतर्क स्वभाव, कई स्थानीय प्रकार | स्वदेशी संरक्षण, बैकयार्ड, आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम |
| कड़कनाथ | काली त्वचा और गहरे ऊतक का विशेष रंग | विशिष्ट मांस बाजार, स्वदेशी पालन |
| निकोबारी | अंडमान-निकोबार क्षेत्र की अनुकूलित स्थानीय नस्ल | अंडा और ग्रामीण पालन |
| घागस | दक्षिण भारत की स्वदेशी आनुवंशिक नस्ल | बैकयार्ड और संरक्षण |
| तेलिचेरी | केरल क्षेत्र से जुड़ी स्थानीय नस्ल | बैकयार्ड पालन |
| हरिंघाटा ब्लैक | गहरे पंखों वाली पूर्वी भारत की स्थानीय नस्ल | ग्रामीण दोहरे उपयोग |
| अरावली | गुजरात की पंजीकृत दोहरे उपयोग वाली नस्ल | मांस और अंडा |
| माला | झारखंड की नई पंजीकृत स्वदेशी नस्ल | स्थानीय ग्रामीण पालन |
असील मुर्गी
असील भारत की सबसे प्रसिद्ध स्वदेशी मुर्गी नस्लों में से एक है। इसके पक्षी मजबूत शरीर, विकसित मांसपेशियों, सीधी मुद्रा और सतर्क स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में असील के कई स्थानीय प्रकार मिलते हैं। वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रमों में भी असील के आनुवंशिक गुणों का उपयोग किया गया है।
पुराने लेखों में असील का परिचय अक्सर मुर्गों की लड़ाई से दिया जाता था। ऐसा करना उचित नहीं है। नस्ल की वास्तविक महत्ता उसके स्वदेशी आनुवंशिक संसाधन, कठोरता, शरीर बनावट और प्रजनन कार्यक्रमों में उपयोग में है। पशुओं को मनोरंजन के लिए लड़ाना पशु-कल्याण और कानूनी समस्याएं पैदा कर सकता है।
कड़कनाथ मुर्गी
कड़कनाथ मध्य प्रदेश से जुड़ी प्रसिद्ध स्वदेशी नस्ल है। इसकी सबसे अलग पहचान शरीर में गहरे रंगद्रव्य के कारण त्वचा, मांस और कुछ आंतरिक ऊतकों का काला या गहरा रंग है। यही विशेषता इसे सामान्य देसी मुर्गियों से अलग पहचान देती है।
कड़कनाथ के बारे में इंटरनेट पर कई अतिरंजित स्वास्थ्य दावे मिलते हैं। इसे मधुमेह, हृदय रोग या अन्य बीमारी की “दवा” कहना सही नहीं है। अलग पोषण संरचना या विशिष्ट मांस गुण किसी खाद्य पदार्थ को चिकित्सकीय उपचार नहीं बनाते। बीमारी के इलाज के लिए प्रमाणित चिकित्सा आवश्यक है।
कड़कनाथ नाम से महंगे चूजे बेचने वाले कई निजी विक्रेता मिलते हैं। यदि आप शुद्ध नस्ल के लिए निवेश कर रहे हैं, तो सरकारी, विश्वविद्यालय, आईसीएआर संस्थान या भरोसेमंद प्रमाणित स्रोत से parentage और breed identity की पुष्टि करना बेहतर है।
निकोबारी मुर्गी
निकोबारी भारत की महत्वपूर्ण द्वीपीय स्वदेशी मुर्गी नस्ल है। आईसीएआर के आनुवंशिक अध्ययनों में निकोबारी को देश की मूल मुर्गी नस्लों में शामिल किया गया है। द्वीपीय पर्यावरण में लंबे समय तक रहने के कारण इसकी स्थानीय अनुकूलन क्षमता महत्वपूर्ण आनुवंशिक संसाधन मानी जाती है।
निकोबारी के बारे में किसी एक वेबसाइट के egg number को स्थायी मानना सही नहीं है। उत्पादन strain, flock selection, feed, health और management के अनुसार बदलता है। किसान को जिस hatchery से chicks मिल रहे हों, उसी source का recent performance record देखना चाहिए।
घागस, तेलिचेरी और हरिंघाटा ब्लैक
आईसीएआर ने असील, घागस, निकोबारी, तेलिचेरी, कड़कनाथ और हरिंघाटा ब्लैक जैसी भारतीय native chicken breeds पर mitochondrial genome research किया है। इसका उद्देश्य नस्लों के आनुवंशिक संबंध, विविधता और stress resilience जैसी विशेषताओं को बेहतर समझना था।
इन नस्लों का महत्व केवल commercial egg number में नहीं है। Local climate adaptation, disease tolerance, scavenging ability और genetic diversity भविष्य के poultry breeding programmes के लिए बहुत मूल्यवान हो सकते हैं।
अरावली मुर्गी
आईसीएआर-एनबीएजीआर ने अरावली को गुजरात की पंजीकृत स्वदेशी chicken breed के रूप में मान्यता दी है। इसका home tract बनासकांठा, साबरकांठा, अरावली और महिसागर जिलों से जुड़ा है। आधिकारिक विवरण इसे मांस और अंडा दोनों के लिए उपयोग होने वाली दोहरे उद्देश्य की नस्ल बताता है।
यह उदाहरण दिखाता है कि “भारत की प्रमुख नस्लों” की सूची स्थिर नहीं है। वैज्ञानिक सर्वेक्षण और breed characterization के बाद नई local populations औपचारिक रूप से पंजीकृत हो सकती हैं।
माला मुर्गी: 2025 में पंजीकृत नई नस्ल
12 नवंबर 2025 को आईसीएआर-एनबीएजीआर ने झारखंड की माला मुर्गी को नई स्वदेशी नस्ल के रूप में पंजीकृत किया। यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुराने इंटरनेट लेखों में माला का नाम नहीं मिलेगा। Breed registry को समय-समय पर update करना ही सही तरीका है।
उन्नत बैकयार्ड मुर्गी किस्में कौन-सी हैं?
आईसीएआर-डायरेक्टोरेट ऑफ पोल्ट्री रिसर्च और अखिल भारतीय समन्वित कुक्कुट प्रजनन परियोजना के केंद्रों ने ग्रामीण पालन के लिए कई improved chicken varieties विकसित की हैं। आईसीएआर की आधिकारिक सूची में वनराजा, ग्रामप्रिया, श्रीनिधि, कृषिब्रो, श्वेतश्री, कृषिलयर, वनश्री, जनप्रिया और असीलब्रो जैसी किस्में शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों ने प्रतापधन, कामरूप, नर्मदानिधि, झारसिम, हिमसमृद्धि और टोकबारी जैसी location-specific varieties विकसित की हैं।
इनमें से सभी को “भारतीय स्वदेशी नस्ल” कहना सही नहीं होगा। किसान को खरीदते समय यह पूछना चाहिए कि पक्षी pure indigenous breed है, improved variety है या commercial cross।
वनराजा
वनराजा ग्रामीण और tribal backyard poultry के लिए विकसित प्रसिद्ध dual-purpose variety है। इसका रंगीन feather pattern देसी पक्षियों जैसा दिखाई देता है और इसे खुले या semi-intensive system में meat और egg दोनों के लिए पाला जाता है। आईसीएआर के कई field programmes में वनराजा को ग्रामीण livelihood के लिए वितरित किया गया है।
वनराजा का मतलब “बिना feed के ज्यादा production” नहीं है। Scavenging से कुछ nutrition मिल सकता है, लेकिन अच्छे growth और laying के लिए supplementary balanced feed, clean water और vaccination जरूरी हैं।
ग्रामप्रिया
ग्रामप्रिया को free-range और rural egg production के लिए विकसित किया गया। यह रंगीन plumage और brown-shell eggs के कारण ग्रामीण बाजार में आसानी से स्वीकार की जाती है। पुराने लेखों में इसके हर flock के लिए एक fixed annual egg number लिखा जाता था, लेकिन वास्तविक उत्पादन management, feed, climate और line performance पर निर्भर करता है।
यदि आपका मुख्य लक्ष्य backyard egg sale है, तो ग्रामप्रिया जैसी egg-oriented improved variety पर विचार किया जा सकता है। लेकिन स्थानीय consumer preference पहले जरूर जांचें।
श्रीनिधि
श्रीनिधि भी आईसीएआर द्वारा विकसित ग्रामीण poultry variety है। इसे field programmes में Vanaraja के साथ rural और tribal क्षेत्रों में meat तथा egg purpose के लिए अपनाया गया है। Local hatchery availability अलग हो सकती है, इसलिए chicks खरीदने से पहले genuine source जरूरी है।
सीएआरआई-निर्भीक
सीएआरआई-निर्भीक बैकयार्ड system के लिए विकसित dual-purpose coloured variety है। आईसीएआर इसे tropical और subtropical conditions के लिए hardy bird के रूप में वर्णित करता है। इसके लंबे पैर, coloured feathers और active nature free-range conditions में उपयोगी हो सकते हैं।
नाम में “निर्भीक” होने का अर्थ इसे लड़ाने के लिए उपयोग करना नहीं है। इसकी उपयोगिता predator avoidance, hardiness, egg-meat production और rural adaptation में है।
नर्मदानिधि
नर्मदानिधि मध्य प्रदेश के लिए विकसित dual-purpose improved variety है। आईसीएआर के अनुसार इसे कड़कनाथ और Jabalpur colour genetic background से तैयार किया गया है। इसे backyard, free-range scavenging और semi-intensive systems के लिए विकसित किया गया था।
यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि कड़कनाथ जैसी pure native breed और उससे genetic contribution लेकर बनी improved variety एक ही चीज नहीं हैं। यदि breeder “कड़कनाथ cross” और “pure कड़कनाथ” को समान कीमत पर बेच रहा है तो source verification जरूरी है।
कामरूप, प्रतापधन और झारसिम
ये location-specific improved poultry varieties विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों और समन्वित प्रजनन केंद्रों द्वारा विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य स्थानीय climate, ग्रामीण management और farmer preference के अनुसार native-looking लेकिन better productive birds उपलब्ध कराना है।
पुराने लेख में कामरूप, झारसिम और दूसरी किस्मों को सीधे “स्वदेशी नस्ल” कहा गया था। अब किसान को category स्पष्ट बताना अधिक उपयोगी है, क्योंकि breeding, chick replacement और pure-line conservation के निर्णय इसी पर निर्भर करते हैं।
अंडे के लिए कौन-सी मुर्गी चुनें?
यदि आपका मुख्य लक्ष्य egg production है, तो पहले तय करें कि आप commercial intensive layer रखना चाहते हैं या backyard brown/desi-style egg market। Backyard system में Gramapriya, Srinidhi और कुछ improved rural varieties उपयुक्त हो सकती हैं। Pure indigenous breeds सामान्यतः commercial layer जितने eggs नहीं देतीं, लेकिन local premium market में उनके eggs और birds की कीमत बेहतर मिल सकती है।
सिर्फ “एक साल में इतने अंडे” देखकर breed न चुनें। Feed cost, mortality, laying age, local egg price और replacement chick availability साथ देखें।
मांस के लिए कौन-सी मुर्गी चुनें?
तेज commercial meat production के लिए broiler strains अलग category हैं। यदि आप ग्रामीण premium “देशी जैसा” meat market target कर रहे हैं, तो Vanaraja, Srinidhi, CARI-NIRBHEEK और local improved dual-purpose birds उपयोगी हो सकते हैं। Pure indigenous bird growth धीमी हो सकती है, लेकिन local consumer preference कीमत में अंतर ला सकती है।
व्यावसायिक ब्रायलर system समझने के लिए ब्रायलर मुर्गी पालन की मार्गदर्शिका पढ़ सकते हैं।
बैकयार्ड पालन के लिए सही पक्षी कैसे चुनें?
- स्थानीय जलवायु: गर्म, आर्द्र, ठंडे या पहाड़ी क्षेत्र के अनुसार tested variety चुनें।
- बाजार: अंडा बिकेगा, meat bird बिकेगा या breeding stock?
- Feed availability: केवल scavenging पर high output की उम्मीद न करें।
- Predator risk: खुले system में active और coloured hardy birds उपयोगी हो सकते हैं।
- Veterinary support: vaccination और outbreak management संभव होना चाहिए।
- Chick source: recognized hatchery या institution चुनें।
- Performance record: breeder से actual field egg और weight data मांगें।
असली breed chick कहां से खरीदें?
सरकारी poultry farm, राज्य पशुपालन विभाग, कृषि या पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, Krishi Vigyan Kendra, ICAR institute-linked poultry seed unit और भरोसेमंद registered hatchery प्राथमिक विकल्प हो सकते हैं। सोशल मीडिया seller से केवल photo देखकर expensive breeding stock खरीदना जोखिमपूर्ण है।
यदि आप अपनी छोटी hatchery लगाकर chicks निकालना चाहते हैं, तो चिकन hatchery business की updated guide पढ़ें। Fertile egg source और parent flock purity वहां सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
Day-old chick खरीदते समय 10 जांच
- Chick active और alert हो।
- Navel ठीक से बंद हो।
- पैर सीधे हों।
- आंखें साफ हों।
- वेंट साफ हो।
- Breed/variety label लिखित हो।
- Hatch date उपलब्ध हो।
- Vaccination record मिले।
- Parent source या hatchery identity स्पष्ट हो।
- Transport time बहुत लंबा न हो।
बैकयार्ड मुर्गी के लिए आवास
“देशी मुर्गी है, जहां चाहे सो जाएगी” सोच गलत है। रात में predator-proof dry shelter जरूरी है। Shed में हवा का आवागमन हो, लेकिन तेज draft न हो। Floor dry रखें और feed/water को wild birds तथा rodents से जितना संभव हो अलग रखें।
Free-range system के विस्तृत आधार समझने के लिए भारत में देसी free-range मुर्गी पालन लेख भी पढ़ सकते हैं।
Feed management
Improved backyard birds scavenging से insects, seeds और vegetation ले सकती हैं, लेकिन बेहतर growth और egg production के लिए supplementary balanced feed जरूरी है। Growing chicks, growers और laying hens की protein, energy, calcium और mineral जरूरत अलग होती है।
रसोई का बचा खाना पूरी ration का विकल्प नहीं है। फफूंदी लगा grain, बहुत नमकीन food, खराब तेल या spoiled kitchen waste न दें। Clean water हर समय उपलब्ध होना चाहिए।
Brooding क्यों महत्वपूर्ण है?
Day-old chicks शुरुआती दिनों में body temperature अच्छी तरह नियंत्रित नहीं कर पाते। इसलिए सही brooder temperature, dry litter, clean water और starter feed जरूरी हैं। Breed चाहे hardy हो, शुरुआती brooding खराब होने पर mortality बढ़ सकती है।
इस विषय पर मुर्गी brooding की पूरी जानकारी पढ़ सकते हैं।
Vaccination और biosecurity
स्वदेशी या hardy breed का अर्थ “बीमारी नहीं होगी” नहीं है। Newcastle disease, fowl pox, infectious bursal disease और avian influenza जैसे जोखिम क्षेत्र और flock system के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकते हैं। Vaccination schedule local veterinary officer और hatchery history के आधार पर बनाएं।
भारत सरकार के Poultry Disease Action Plan में biosecurity के तीन मूल विचारों पर जोर है—अलगाव, सफाई और कीटाणुशोधन। नए birds को सीधे पुरानी flock में न मिलाएं, visitor movement सीमित रखें, crates और vehicles साफ करें और sudden unusual mortality को तुरंत report करें।
Pure breed और cross की पहचान क्यों जरूरी है?
यदि आपका उद्देश्य केवल meat या egg sale है, तो अच्छी improved variety पर्याप्त हो सकती है। लेकिन यदि आप breeding stock, fertile eggs या “pure Kadaknath/Aseel” premium पर बेच रहे हैं, तो genetic identity बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। Cross birds अगली पीढ़ी में समान रूप और production नहीं दे सकते।
इसलिए breeding business में parent records, source certificates और controlled mating रखें। केवल black colour देखकर किसी bird को pure Kadaknath या tall body देखकर pure Aseel घोषित न करें।
किसान के लिए कौन बेहतर: स्वदेशी नस्ल या उन्नत किस्म?
| जरूरत | अधिक उपयुक्त विकल्प |
|---|---|
| नस्ल संरक्षण | पंजीकृत स्वदेशी नस्ल |
| ग्रामीण egg + meat income | उन्नत dual-purpose variety |
| Premium Kadaknath market | Verified pure Kadaknath source |
| Backyard egg focus | Gramapriya/Srinidhi जैसे suitable improved birds |
| Fast commercial broiler | Commercial broiler strain |
| Local climate resilience | Local indigenous breed या tested location-specific variety |
मुर्गी नस्ल चुनते समय 8 आम गलतियां
- हर रंगीन मुर्गी को “देशी नस्ल” मान लेना।
- Improved cross को pure breed समझना।
- केवल egg number देखकर खरीदना।
- Local market demand न देखना।
- Unknown hatchery से महंगा “pure” chick लेना।
- Feed और vaccination cost भूल जाना।
- एक breed का दूसरे राज्य का performance सीधे अपने climate पर लागू मानना।
- Production records न रखना।
क्या कड़कनाथ सबसे लाभदायक मुर्गी है?
हर जगह नहीं। कड़कनाथ की premium market value कुछ क्षेत्रों में अच्छी हो सकती है, लेकिन growth rate, chick cost, pure stock availability और buyer demand को ध्यान में रखना पड़ता है। यदि आपके इलाके में ग्राहक premium price देने को तैयार नहीं हैं, तो Vanaraja या दूसरी dual-purpose variety अधिक practical हो सकती है।
क्या देसी मुर्गी commercial layer से ज्यादा अंडे देती है?
सामान्यतः commercial layer lines बहुत अधिक egg production के लिए selected होती हैं। Indigenous breeds का मुख्य महत्व केवल egg number नहीं है; local adaptation, hardiness, consumer preference और genetic diversity भी महत्वपूर्ण हैं। Improved backyard varieties इसी gap को कम करने के लिए विकसित की गई हैं।
क्या सभी improved birds किसान खुद breed कर सकता है?
जरूरी नहीं। कुछ commercial या multi-line crosses की अगली generation parent जैसा uniform performance नहीं देती। यदि आप हर साल high-performing chicks चाहते हैं तो authorized hatchery से replacement stock लेना पड़ सकता है। Pure indigenous breeds को controlled selection और mating से maintain किया जा सकता है, लेकिन inbreeding से बचने के लिए breeding plan जरूरी है।
बत्तख और मुर्गी पालन में क्या अंतर है?
यदि आपके farm में pond या wetland resources हैं, तो chicken के साथ duck enterprise भी option हो सकता है। Ducks की water management, feeding और disease considerations अलग हैं। तुलना के लिए बत्तख पालन की updated guide पढ़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में कितनी पंजीकृत स्वदेशी मुर्गी नस्लें हैं?
आईसीएआर-एनबीएजीआर की नवंबर 2025 की आधिकारिक जानकारी में 21 पंजीकृत indigenous chicken breeds दर्ज थीं। सितंबर 2026 तक उपलब्ध बाद की registration update में नई chicken breed नहीं जोड़ी गई थी।
क्या वनराजा एक स्वदेशी नस्ल है?
वनराजा आईसीएआर द्वारा ग्रामीण poultry के लिए विकसित improved variety है। इसे असील या कड़कनाथ जैसी registered indigenous breed समझना सही नहीं है।
ग्रामप्रिया किस काम के लिए अच्छी है?
ग्रामप्रिया rural/free-range egg production के लिए विकसित improved variety है और brown-shell eggs देती है। Actual production management पर निर्भर करता है।
कड़कनाथ का मांस दवा है?
नहीं। यह विशिष्ट pigmentation और nutritional profile वाला poultry meat है, लेकिन किसी बीमारी का प्रमाणित medical treatment नहीं है।
बैकयार्ड के लिए कौन-सी मुर्गी सबसे अच्छी है?
एक universal best bird नहीं है। आपके climate, market, feed, chick availability और egg/meat goal के अनुसार Vanaraja, Gramapriya, Srinidhi, CARI-NIRBHEEK, local indigenous breed या location-specific variety बेहतर हो सकती है।
Pure breed chick कैसे पहचानें?
केवल रंग या फोटो से नहीं। Reliable breeder source, parent flock record, breed characteristics और जहां उपलब्ध हो institutional certificate देखें।
निष्कर्ष
भारत की poultry diversity बहुत व्यापक है। असील, कड़कनाथ, निकोबारी, घागस, तेलिचेरी, हरिंघाटा ब्लैक, अरावली और माला जैसी registered indigenous breeds हमारे आनुवंशिक संसाधन हैं। दूसरी ओर Vanaraja, Gramapriya, Srinidhi, CARI-NIRBHEEK, Narmadanidhi, Kamrupa, Pratapdhan और Jharsim जैसी improved varieties ग्रामीण किसानों को बेहतर meat और egg production का विकल्प देती हैं। सफल farming के लिए “सबसे famous breed” नहीं, बल्कि आपके local market, climate, feed और veterinary support के अनुसार सही पक्षी चुनना सबसे महत्वपूर्ण है।
विश्वसनीय स्रोत
- आईसीएआर-एनबीएजीआर — 2025 की नई नस्लें और कुल पंजीकृत chicken breeds
- आईसीएआर — अरावली chicken breed registration
- आईसीएआर — भारतीय indigenous chicken breeds पर genetic research
- आईसीएआर — improved rural chicken varieties
- आईसीएआर — CARI-NIRBHEEK
- आईसीएआर — Narmadanidhi improved variety
- भारत सरकार, पशुपालन एवं डेयरी विभाग — Poultry Disease Action Plan और biosecurity

मुर्गी फार्म हेतु जानकारी सबसे अच्छी नस्ल कौन सी रहेगी