प्लूटो सौरमंडल के बाहरी भाग में स्थित एक बौना ग्रह है। यह वरुण की कक्षा के पार फैली काइपर पट्टी नामक विशाल बर्फीले क्षेत्र में सूर्य की परिक्रमा करता है। 1930 में खोजे जाने के बाद इसे लगभग 76 वर्षों तक सौरमंडल का नौवाँ ग्रह माना गया।
2006 में अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने ग्रह की औपचारिक परिभाषा तय की। प्लूटो सूर्य की परिक्रमा करता है और अपने गुरुत्व से लगभग गोल आकार ले चुका है, लेकिन उसने अपनी कक्षा के आसपास के क्षेत्र पर ग्रहों जैसा गुरुत्वीय प्रभुत्व स्थापित नहीं किया है। इसलिए उसे बौना ग्रह वर्ग में रखा गया।
प्लूटो छोटा है, लेकिन नीरस नहीं। न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान ने 2015 में इसके पास से गुजरकर बर्फीले पर्वत, नाइट्रोजन के विशाल मैदान, घाटियाँ, धुंधला वायुमंडल और जटिल भूवैज्ञानिक संरचनाएँ दिखाईं। 2026 में न्यू होराइजन्स स्वयं अभी भी सक्रिय है और प्लूटो से बहुत आगे काइपर पट्टी के क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन कर रहा है।
प्लूटो के मुख्य तथ्य
| खोज | 18 फरवरी 1930 |
| खोजकर्ता | क्लाइड टॉमबॉ |
| वर्तमान वर्ग | बौना ग्रह |
| स्थान | काइपर पट्टी |
| व्यास | लगभग 2,377 किलोमीटर |
| सूर्य से औसत दूरी | लगभग 5.9 अरब किलोमीटर |
| एक वर्ष | लगभग 248 पृथ्वी वर्ष |
| एक दिन | लगभग 153 घंटे |
| ज्ञात चंद्रमा | 5 |
| सबसे बड़ा चंद्रमा | कैरन |
प्लूटो की खोज किसने की?
अमेरिकी खगोलविद क्लाइड टॉमबॉ ने 18 फरवरी 1930 को प्लूटो की खोज की। वे लोवेल वेधशाला में अलग-अलग रातों में लिए गए आकाश के चित्रों की तुलना कर रहे थे और ऐसी वस्तु खोज रहे थे जो स्थिर तारों की पृष्ठभूमि के मुकाबले स्थान बदल रही हो।
इसलिए “प्लूटो गलती से मिल गया” कहना सही नहीं है। इसकी खोज एक व्यवस्थित और लंबे खगोलीय खोज-अभियान का परिणाम थी।
प्लूटो नाम किसने सुझाया?
प्लूटो नाम 11 वर्षीय ब्रिटिश छात्रा वेनेशिया बर्नी ने सुझाया था। यह रोमन पौराणिक परंपरा के अधोलोक के देवता के नाम से लिया गया है।
नाम को पसंद किए जाने का एक रोचक कारण यह भी था कि उसके शुरुआती अक्षर उस खगोलीय खोज से जुड़े पर्सिवल लोवेल के नाम से मेल खाते थे।
प्लूटो अब ग्रह क्यों नहीं है?
2006 में अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने सौरमंडल में ग्रह के लिए तीन मुख्य शर्तें निर्धारित कीं:
- वस्तु सूर्य की परिक्रमा करती हो।
- उसमें इतना द्रव्यमान हो कि अपने गुरुत्व से लगभग गोल आकार ले सके।
- उसने अपनी कक्षा के आसपास के क्षेत्र को गुरुत्वीय रूप से साफ या नियंत्रित कर लिया हो।
प्लूटो पहली दो शर्तें पूरी करता है, लेकिन तीसरी नहीं। वह काइपर पट्टी में अनेक दूसरी बर्फीली वस्तुओं के साथ कक्षीय क्षेत्र साझा करता है। इसलिए उसे बौना ग्रह घोषित किया गया।
यह कहना गलत है कि “प्लूटो की कक्षा टेढ़ी थी, इसलिए उसका ग्रह दर्जा हटा दिया गया।” उसकी असामान्य कक्षा रोचक है, लेकिन आधिकारिक वर्गीकरण का मुख्य प्रश्न कक्षा के आसपास का क्षेत्र साफ न कर पाना था।
बौना ग्रह क्या होता है?
अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार बौना ग्रह सूर्य की परिक्रमा करता है, लगभग गोल आकार लेने जितना द्रव्यमान रखता है, किसी दूसरे ग्रह का उपग्रह नहीं होता, लेकिन अपनी कक्षा के पड़ोस को ग्रह की तरह साफ नहीं कर पाया होता।
नासा की 2026 की जानकारी में सौरमंडल के पाँच आधिकारिक रूप से मान्य बौने ग्रहों में सीरीस, प्लूटो, हाउमिया, माकेमाके और एरिस शामिल हैं।
क्या प्लूटो सबसे छोटा बौना ग्रह है?
नहीं। प्लूटो प्रमुख ज्ञात बौने ग्रहों में आकार के आधार पर सबसे बड़े में है। नासा इसे सबसे बड़ा ज्ञात बौना ग्रह बताता है, जबकि एरिस थोड़ा छोटा लेकिन प्लूटो से अधिक द्रव्यमान वाला है।
प्लूटो कितना बड़ा है?
प्लूटो का भूमध्यरेखीय व्यास लगभग 2,377 किलोमीटर है। यह पृथ्वी के चंद्रमा से भी काफी छोटा है और पृथ्वी की चौड़ाई का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है।
प्लूटो सूर्य से कितनी दूर है?
सूर्य से प्लूटो की औसत दूरी लगभग 5.9 अरब किलोमीटर या लगभग 39 खगोलीय इकाई है। एक खगोलीय इकाई पृथ्वी और सूर्य की औसत दूरी के बराबर होती है।
प्लूटो की कक्षा काफी अंडाकार है। सूर्य से इसकी दूरी लगभग 30 से 49.3 खगोलीय इकाई के बीच बदल सकती है।
सूर्य का प्रकाश प्लूटो तक कितनी देर में पहुँचता है?
औसत दूरी पर सूर्य का प्रकाश प्लूटो तक पहुँचने में लगभग 5.5 घंटे लेता है। पृथ्वी तक यही प्रकाश लगभग 8 मिनट 20 सेकंड में पहुँचता है।
क्या प्लूटो पर दिन पूरी तरह अंधेरा होता है?
नहीं। सूर्य वहाँ पृथ्वी की तुलना में बहुत मंद दिखाई देता है, लेकिन प्लूटो के दोपहर का प्रकाश पृथ्वी की रात जैसा पूर्ण अंधकार नहीं होता। नासा के अनुसार वहाँ सूर्य पृथ्वी से दिखाई देने वाले पूर्णिमा के चंद्रमा से लगभग 300 गुना अधिक चमकीला हो सकता है।
प्लूटो का एक वर्ष कितना लंबा है?
प्लूटो सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 248 पृथ्वी वर्षों में पूरी करता है। 1930 में खोजे जाने के बाद से उसने अभी तक सूर्य की एक पूरी परिक्रमा भी पूरी नहीं की है।
प्लूटो का एक दिन कितना लंबा है?
प्लूटो अपनी धुरी पर एक चक्कर लगभग 153 घंटे में पूरा करता है। यह लगभग 6.4 पृथ्वी दिनों के बराबर है।
क्या प्लूटो उल्टी दिशा में घूमता है?
हाँ। प्लूटो का घूर्णन प्रतिगामी है। वह शुक्र और अरुण की तरह अधिकांश ग्रहों की सामान्य घूर्णन दिशा के विपरीत दिशा में घूमता है। उसकी घूर्णन धुरी भी काफी झुकी हुई है।
प्लूटो की कक्षा इतनी अलग क्यों है?
प्लूटो की कक्षा आठ ग्रहों की कक्षाओं की तुलना में अधिक अंडाकार और लगभग 17 डिग्री झुकी हुई है। इसी कारण सूर्य से उसकी दूरी बहुत बदलती है।
1979 से 1999 तक प्लूटो सूर्य के इतना निकट था कि वह वरुण की तुलना में सूर्य के अधिक पास आ गया था। फिर भी दोनों के टकराने का खतरा नहीं है क्योंकि उनकी कक्षाएँ स्थिर गुरुत्वीय अनुनाद में हैं।
प्लूटो के कितने चंद्रमा हैं?
प्लूटो के पाँच ज्ञात चंद्रमा हैं:
- कैरन
- निक्स
- हाइड्रा
- कर्बेरोस
- स्टिक्स
कैरन सबसे बड़ा है। निक्स और हाइड्रा 2005 में, कर्बेरोस 2011 में और स्टिक्स 2012 में खोजे गए।
कैरन इतना विशेष क्यों है?
कैरन का आकार प्लूटो के लगभग आधे जितना है। अपने मुख्य पिंड की तुलना में इतना बड़ा चंद्रमा सौरमंडल में असामान्य है। प्लूटो और कैरन एक साझा गुरुत्व-केंद्र के चारों ओर घूमते हैं जो प्लूटो के बाहर स्थित है।
इसी कारण लोकप्रिय वैज्ञानिक लेखन में प्लूटो-कैरन को कभी-कभी दोहरी दुनिया कहा जाता है। लेकिन आधिकारिक वर्गीकरण में कैरन अभी भी प्लूटो का चंद्रमा है।
प्लूटो और कैरन हमेशा एक ही चेहरा क्यों दिखाते हैं?
प्लूटो और कैरन परस्पर ज्वारीय रूप से बंधे हुए हैं। प्लूटो का घूर्णन समय और कैरन की परिक्रमा का समय लगभग 153 घंटे है। इसलिए प्लूटो से देखने पर कैरन आकाश में लगभग एक ही स्थान पर बना रहता है।
प्लूटो के चंद्रमाओं के नाम कहाँ से आए?
प्लूटो और उसके चंद्रमाओं के नाम यूनानी और रोमन पौराणिक कथाओं के अधोलोक से जुड़े पात्रों पर रखे गए हैं। कैरन अधोलोक की नदी पार कराने वाले नाविक से जुड़ा नाम है, जबकि स्टिक्स एक पौराणिक नदी का नाम है।
न्यू होराइजन्स ने प्लूटो कब देखा?
नासा का न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान 19 जनवरी 2006 को प्रक्षेपित हुआ और लगभग नौ वर्ष बाद 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के बहुत पास से गुजरा। यह प्लूटो और उसके चंद्रमाओं का निकट अध्ययन करने वाला पहला और अब तक का एकमात्र अंतरिक्ष यान है।
सबसे नजदीकी चरण में यह प्लूटो की सतह से लगभग 12,500 किलोमीटर ऊपर से गुजरा। इसने कुछ ही घंटों में इतना वैज्ञानिक डेटा एकत्र किया कि उसे पृथ्वी तक भेजने में लंबे समय लगा।
2026 में न्यू होराइजन्स कहाँ है?
न्यू होराइजन्स मिशन अभी भी सक्रिय है। जून 2026 में अंतरिक्ष यान लगभग 321 दिन की अपनी सबसे लंबी शीतनिद्रा अवधि के बाद स्वस्थ अवस्था में जागा। उस समय यह पृथ्वी से लगभग 9.5 अरब किलोमीटर दूर था।
अब यह प्लूटो से बहुत आगे बाहरी सौरमंडल में काइपर पट्टी और अंतरिक्ष पर्यावरण का अध्ययन कर रहा है तथा पहले से एकत्र वैज्ञानिक डेटा पृथ्वी को भेज रहा है।
न्यू होराइजन्स ने प्लूटो के बाद क्या किया?
1 जनवरी 2019 को न्यू होराइजन्स ने काइपर पट्टी की वस्तु एरोकोथ के पास से उड़ान भरी। यह मानव इतिहास में किसी अंतरिक्ष यान द्वारा करीब से देखी गई सबसे दूर की वस्तुओं में से एक है।
इस अध्ययन से सौरमंडल के शुरुआती छोटे पिंडों के निर्माण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
प्लूटो का “दिल” क्या है?
न्यू होराइजन्स के चित्रों में प्लूटो पर विशाल चमकीला हृदय जैसा क्षेत्र दिखाई देता है। इसे टॉमबॉ रेजियो नाम दिया गया, जो प्लूटो के खोजकर्ता क्लाइड टॉमबॉ के सम्मान में है।
इस क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में विशाल स्पुतनिक प्लैनिशिया है, जो मुख्य रूप से जमे हुए नाइट्रोजन का अपेक्षाकृत चिकना मैदान है।
प्लूटो के पर्वत किससे बने हैं?
प्लूटो पर 2 से 3 किलोमीटर तक ऊँचे पर्वत पाए गए हैं। वहाँ का तापमान इतना कम है कि पानी की बर्फ चट्टान जैसी कठोर हो सकती है और पहाड़ों की संरचना बना सकती है।
प्लूटो की सतह पर कौन-कौन सी बर्फ है?
पानी की बर्फ के अलावा प्लूटो की सतह पर नाइट्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड की जमी हुई परतें मिलती हैं। ये पदार्थ सूर्य से दूरी और मौसम के साथ सतह तथा वायुमंडल के बीच स्थान बदल सकते हैं।
प्लूटो का वायुमंडल कैसा है?
प्लूटो का वायुमंडल अत्यंत पतला है और मुख्य रूप से नाइट्रोजन से बना है। मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड भी पाए गए हैं।
जब प्लूटो सूर्य के अपेक्षाकृत निकट होता है तो सतह की कुछ बर्फ सीधे गैस में बदलकर वायुमंडल को घना कर सकती है। दूर जाने पर उसका कुछ भाग फिर सतह पर जम सकता है।
प्लूटो कितना ठंडा है?
प्लूटो की सतह पर तापमान लगभग -226 से -240 डिग्री सेल्सियस के बीच हो सकता है। नासा औसत तापमान लगभग -232 डिग्री सेल्सियस के आसपास बताता है।
क्या प्लूटो के अंदर महासागर हो सकता है?
प्लूटो की सतह जीवन के लिए अत्यंत ठंडी है, लेकिन उसका अंदरूनी भाग अधिक गर्म हो सकता है। कुछ वैज्ञानिक मॉडल और न्यू होराइजन्स से मिले भूवैज्ञानिक संकेत गहराई में तरल जल की परत या पूर्व महासागर की संभावना पर चर्चा करते हैं।
यह अभी प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित भूमिगत महासागर नहीं है। वहाँ जीवन का भी कोई प्रमाण नहीं मिला है।
क्या प्लूटो पर जीवन संभव है?
प्लूटो की सतह का तापमान पृथ्वी जैसे जीवन के लिए अत्यंत प्रतिकूल है। पानी वहाँ चट्टान जैसी कठोर बर्फ बना रहता है। इसलिए सतह पर जीवन की संभावना बहुत कम मानी जाती है।
यदि गहराई में कभी तरल जल मौजूद रहा हो या मौजूद हो, तो वह वैज्ञानिक रुचि का विषय है, लेकिन इसे जीवन मिलने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
प्लूटो पर गुरुत्व कितना है?
प्लूटो की सतह का गुरुत्व पृथ्वी के लगभग 6 प्रतिशत के आसपास है। किसी व्यक्ति का द्रव्यमान नहीं बदलेगा, लेकिन उसका वजन पृथ्वी की तुलना में बहुत कम महसूस होगा।
उदाहरण के लिए पृथ्वी पर 50 किलोग्राम द्रव्यमान वाले व्यक्ति का प्लूटो पर अनुभव किया जाने वाला भार पृथ्वी के लगभग 3 किलोग्राम-बल के आसपास के बराबर होगा।
क्या प्लूटो के छल्ले हैं?
अभी तक प्लूटो के आसपास कोई ज्ञात छल्ला नहीं मिला है। उसके पाँच चंद्रमा हैं, लेकिन शनि, बृहस्पति, अरुण या वरुण जैसे ज्ञात ग्रह-छल्ले नहीं पाए गए।
क्या प्लूटो का चुंबकीय क्षेत्र है?
प्लूटो का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र अभी ज्ञात नहीं है। उसके छोटे आकार और धीमे घूर्णन को देखते हुए वैज्ञानिक बड़े शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र की अपेक्षा नहीं करते, लेकिन पर्याप्त प्रत्यक्ष माप उपलब्ध नहीं हैं।
प्लूटो का अध्ययन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
काइपर पट्टी सौरमंडल के शुरुआती निर्माण से बची बहुत पुरानी बर्फीली वस्तुओं का विशाल क्षेत्र है। प्लूटो उनमें सबसे अच्छी तरह अध्ययन की गई बड़ी दुनिया है।
प्लूटो के भूगर्भ, बर्फ, वायुमंडल और चंद्रमाओं का अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि छोटे बर्फीले ग्रह-पिंड अरबों वर्षों में कैसे विकसित होते हैं।
प्लूटो और पृथ्वी में अंतर
| विशेषता | प्लूटो | पृथ्वी |
|---|---|---|
| वर्ग | बौना ग्रह | ग्रह |
| व्यास | लगभग 2,377 किमी | लगभग 12,742 किमी |
| एक दिन | लगभग 153 घंटे | लगभग 24 घंटे |
| एक वर्ष | लगभग 248 पृथ्वी वर्ष | लगभग 365.25 दिन |
| ज्ञात चंद्रमा | 5 | 1 |
| औसत तापमान | लगभग -232°C | बहुत अधिक गर्म और जीवन-अनुकूल औसत |
सौरमंडल की दूसरी दुनियाओं के लिए अरुण ग्रह, बृहस्पति ग्रह और पृथ्वी के लेख भी पढ़ सकते हैं।
प्लूटो के 12 रोचक तथ्य
- 1930 से 2006 तक इसे नौवाँ ग्रह माना गया।
- अब यह आधिकारिक रूप से बौना ग्रह है।
- यह काइपर पट्टी में स्थित है।
- इसका एक वर्ष लगभग 248 पृथ्वी वर्ष का है।
- इसका एक दिन लगभग 6.4 पृथ्वी दिन का है।
- इसके पाँच ज्ञात चंद्रमा हैं।
- कैरन का आकार प्लूटो के लगभग आधे जितना है।
- टॉमबॉ रेजियो हृदय जैसा चमकीला क्षेत्र है।
- पानी की बर्फ वहाँ चट्टान जैसी कठोर रहती है।
- इसके वायुमंडल में मुख्य रूप से नाइट्रोजन है।
- न्यू होराइजन्स 2015 में इसके पास से गुजरा।
- न्यू होराइजन्स 2026 में भी सक्रिय है और प्लूटो से बहुत आगे अध्ययन कर रहा है।
पुरानी जानकारी और सही तथ्य
| पुराना या गलत दावा | अधिक सही जानकारी |
|---|---|
| प्लूटो अभी भी नौवाँ ग्रह है | 2006 से आधिकारिक रूप से बौना ग्रह है। |
| ग्रह का दर्जा केवल टेढ़ी कक्षा के कारण हटा | मुख्य कारण कक्षा के आसपास का क्षेत्र साफ न कर पाना था। |
| प्लूटो दूसरा सबसे छोटा बौना ग्रह है | नासा इसे सबसे बड़ा ज्ञात बौना ग्रह बताता है। |
| इसकी खोज गलती से हुई | यह व्यवस्थित खोज-अभियान का परिणाम थी। |
| न्यू होराइजन्स मिशन 2015 में समाप्त हो गया | अंतरिक्ष यान 2026 में भी सक्रिय है और बाहरी सौरमंडल में विज्ञान कर रहा है। |
| प्लूटो का दिन पूर्ण अंधकार जैसा है | सूर्य बहुत मंद है, पर पृथ्वी की पूर्णिमा से काफी अधिक चमकीला दिखाई देता है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्लूटो ग्रह है या बौना ग्रह?
अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ की आधिकारिक श्रेणी में प्लूटो बौना ग्रह है।
प्लूटो की खोज किसने की?
क्लाइड टॉमबॉ ने 18 फरवरी 1930 को प्लूटो की खोज की।
प्लूटो के कितने चंद्रमा हैं?
प्लूटो के पाँच ज्ञात चंद्रमा हैं: कैरन, निक्स, हाइड्रा, कर्बेरोस और स्टिक्स।
प्लूटो तक कौन-सा अंतरिक्ष यान गया है?
नासा का न्यू होराइजन्स 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के पास से गुजरा। वही अभी तक प्लूटो का निकट अध्ययन करने वाला एकमात्र अंतरिक्ष यान है।
क्या न्यू होराइजन्स अभी भी काम कर रहा है?
हाँ। जून 2026 में यह लंबी शीतनिद्रा से स्वस्थ अवस्था में जागा और बाहरी सौरमंडल में अपना विस्तारित वैज्ञानिक कार्य जारी रख रहा है।
क्या प्लूटो पर जीवन मिला है?
नहीं। प्लूटो पर जीवन का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
निष्कर्ष
प्लूटो का महत्व उसके ग्रह या बौना ग्रह कहलाने से कहीं बड़ा है। वह काइपर पट्टी की जटिल बर्फीली दुनियाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है। उसके पाँच चंद्रमा, पतला वायुमंडल, नाइट्रोजन मैदान, पानी-बर्फ के पर्वत और असामान्य कक्षा सौरमंडल के शुरुआती इतिहास की जानकारी देते हैं।
न्यू होराइजन्स ने 2015 में प्लूटो को एक छोटे धुंधले बिंदु से बदलकर पर्वतों, मैदानों और सक्रिय भूविज्ञान वाली वास्तविक दुनिया बना दिया। 2026 में वही अंतरिक्ष यान प्लूटो से अरबों किलोमीटर आगे जाकर बाहरी सौरमंडल के बारे में नई जानकारी जुटा रहा है।