बाढ़ प्रबंधन पर निबंध
आप लोगों ने बाढ़ के बारे में जरूर सुना होगा। अचानक भीषण वर्षा होने से बाढ़ आ जाती है। गांव, शहरों, कस्बों में वर्षा का पानी जगह-जगह भर जाता है। बाढ़ में पानी की गहराई स्थान और परिस्थिति के अनुसार बहुत अलग हो सकती है।। जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
जिस जगह बाढ़ आती है वहां पर सड़कें बारिश के पानी में डूब जाती हैं। कुछ भी नहीं दिखता। लोगों को सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है। बाढ़ एक बहुत आम प्राकृतिक संकट है जो हर साल हमारे देश में आता है।
बाढ़ प्रबंधन पर निबंध
बाढ़ क्या है? बाढ़ क्या है?
इसी वर्ष 2018 में जुलाई- अगस्त के महीने में केरल में भीषण बाढ़ आई जिसने पिछले 100 साल का रिकार्ड तोड़ दिया। 324 लोग मारे गये, 2 लाख 23 हजार से अधिक लोग बेघर हो गये जिनको 1500 से अधिक राहत कैम्पों में रखा गया।
बचाव दलों ने बाढ़ में फँसे लोगो को लाइफ जैकेट, रेनकोट, साबुन, गमबूट, मोटराइस्ड बोट, नावे, खाना, दिया बांटा गया। लोगो की मदद के लिए सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल(एनडीआरएफ) को बुलाया गया।
बीएसएनएल, रिलायंस जिओ जैसे कम्पनी ने अपने अपभोक्ताओ को फ्री कालिंग की सुविधा दी। केरल ने केंद्र सरकार ने 1200 करोड़ का राहत पैकेज माँगा। प्रधानमंत्री ने 500 करोड़ देने की घोषणा की। मरने वालो के परिजन को 2 लाख और गम्भीर रूप से घायल लोगो को 50 हजार देने की घोषणा की।
बाढ़ हमारे देश में हर साल आती है। इसकी वजह से किसानों की फसलें नष्ट हो जाती हैं। हजारों लाखों रुपए का नुकसान होता है। बहुत से लोग बाढ़ में अपनी जान गंवा देते हैं। लोगों को अपना घर छोड़ कर दूसरे जगह जाना पड़ता है।
भारत के बिहार उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आसाम, गंगा, ब्रह्मपुत्र नदी का क्षेत्र में बाढ़ हर साल आती रहती है। आज के लेख में हम आपको बाढ़ प्रबंधन के तरीके बताएंगे। इन तरीकों को अपनाकर आप भी बाढ़ के प्रकोप से बच सकते हैं।
बाढ़ से बचने के उपाय बाढ़ प्रबंधन की विधियाँ
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मकान, भवन ऊंचाई पर बनाना चाहिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भवन सुरक्षित ऊँचाई पर बनाना
जिन क्षेत्रों में हर साल बाढ़ आती है वहां पर ऊंचाई पर भवन बनाना चाहिए। असम राज्य में सभी मकान बांस के खंभों पर बने होते हैं जो जमीन से 8 से 10 फीट ऊंचाई पर बने होते हैं। इससे यह लाभ है कि जब बाढ़ आती है तो कोई भी मकान, भवन पानी में नहीं डूबता है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में जहां हर साल बाढ़ आती है भवनों को ऊंचाई पर बनाना चाहिए।
बाढ़ चेतावनी सिस्टम का विकास करना चाहिए बाढ़ चेतावनी व्यवस्था विकसित करना
जिन क्षेत्रों में बाढ़ आती है सरकार को वहां पर बाढ़ नियंत्रण ऑफिस बनाने चाहिए। ऐसे कर्मचारी नियुक्त करने चाहिए जो 24 घंटा बाढ़ आने पर निगरानी रखे। जब भी बाढ़ की संभावना बने पूरे शहर को इसके बारे में चेतावनी देनी चाहिए। यह चेतावनी रेडियो, टीवी, इंटरनेट, सोशल मिडिया, फेसबुक, व्हाट्सअप, लाउडस्पीकर के द्वारा आराम से दी जा सकती है।
अच्छा जल निकासी सिस्टम बनाना चाहिए अच्छी जल निकासी व्यवस्था बनाना
किसी भी क्षेत्र में बाढ़ तब आती है जब वर्षा का पानी जगह-जगह जमा हो जाता है। कमजोर ड्रेनेज सिस्टम की वजह से पानी नाली, नालों में भर जाता है और निकल नहीं पाता है। इसलिए बाढ़ से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि किसी भी जिले शहर की नालियां, नालों को सुव्यवस्थित ढंग से बनाया जाए।
कहीं पर भी पानी जमा ना हो पाए तुरंत ही निकल जाए। जो नालियां- नाले पतली हैं उनको चौड़ा बनाया जाए जिससे पानी निकलने में वक्त ना लगे और तुरंत ही शहर में जमा हुआ पानी निकल जाए। सरकार को नालों की सफाई समय-समय पर करवानी चाहिए क्योंकि अक्सर नालों में कचड़ा भर जाने से नाले जाम हो जाते हैं और पानी नहीं निकल पाता है
सरकार को बाढ़ से बचने के लिए बांध बनाया जाए बाँधों की भूमिका तथा सीमाएँ
जो नदियां वर्षा ऋतु में बाढ़ लाती हैं उनसे बचने के लिए वर्षा के मौसम से पहले ही मजबूत और ऊंचे बांध बनाए जाये। आम तौर पर यह देखा गया है कि वर्षा ऋतु में नदियों में बहुत पानी जमा हो जाता है और वह गांवों कस्बों जिले और शहरों में घुस जाता है इसलिए अच्छे, मजबूत, टिकाऊ और ऊंचे बांध सरकार को बनाने चाहिए।
सरकार द्वारा सेना और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल से मदद भेजना सरकारी समन्वय से बचाव सहायता और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल
जिन क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है वहां पर लोग पानी में फस जाते हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में गंगा, व्यास और दूसरी नदियां भीषण पानी के वेग के साथ देती हैं। बड़े बड़े मकानों को तोड़कर अपने साथ बहा ले जाती है। ऐसे में सरकार को तुरंत सेना और और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का इस्तेमाल करना चाहिए।
खतरनाक इलाकों में सेना का जमीन से होकर जाना संभव नहीं होता है इसलिए उनको हेलीकॉप्टर से जाना चाहिए। बाढ़ में फंसे हुए लोग कई दिन से भूखे होते हैं इसलिए उनको खाना, बिस्कुट, साबुन, पीने का पानी, कपड़े जैसी बुनियादी जरूरतें देनी चाहिए।
राहत कैम्प बनाने चाहिये राहत शिविर बनाना
बाढ़ के समय लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों पर राहत केंद्र/ रिलीफ सेंटर स्थापित करें।
बाढ़ सुरक्षा किट बनाये बाढ़ सुरक्षा किट तैयार करना
बाढ़ की भविष्यवाणी करना बहुत ही कठिन होता है क्योंकि कुछ ही घंटों में बहुत अधिक बारिश होने से अचानक से बाढ़ आ जाती है। लोग इसके लिए तैयार नहीं होते हैं इसलिए लोगों को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी चाहिए।
जिन क्षेत्रों में हर साल बाढ़ आती है वहां के निवासियों को एक सुरक्षा किट बना लेनी चाहिए जिसमें अपनी सभी मूल्यवान वस्तुएं रखनी चाहिए। जैसे जरूरी कागजात, पैसा, गहने इत्यादि। बाढ़ आने पर वह सुरक्षा किट/ बैग लेकर अपने घरों को छोड़ देना चाहिए। सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।
अपने परिवार के साथ ही रहना चाहिए। बाढ़ आने पर यदि स्थिति सामान्य है तो छत पर चले जाना चाहिए। नीचे की मंजिल को खाली करके अपनी सभी वस्तुओं को पहली या दूसरी मंजिल पर रखना चाहिए। जिससे कोई भी वस्तु भीगकर खराब ना हो।
अपने साथ खाने पीने की चीजें रखनी चाहिए जैसे खाना, दवाइयां, टॉर्च, पीने का पानी, रस्सी, चाकू, फोन जैसा सामान अपने साथ रखें। बिजली के तारों से दूर रहना चाहिए क्योंकि बिजली के तार से करंट लग सकता है।
बाढ़ की वैज्ञानिक परिभाषा
जब किसी क्षेत्र में पानी सामान्य सीमा से बाहर फैलकर जमीन, घर तथा अन्य गतिविधियाँ प्रभावित करता है, तो उसे बाढ़ कहा जाता है। बाढ़ का संबंध नदी, वर्षा, समुद्री तूफान तथा जल निकासी से हो सकता है। हर क्षेत्र में कारण समान नहीं होता।
अत्यधिक बारिश से बाढ़
बहुत तेज या लंबे समय तक वर्षा होने पर कुछ स्थानों में पानी भर सकता है। कितना नुकसान होगा यह केवल बारिश की मात्रा पर नहीं, जमीन, निकासी और निवास की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
नदी में बढ़ा जलस्तर
बारिश तथा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से बहने वाला पानी नदी का स्तर बढ़ा सकता है। तट के निचले क्षेत्रों में जलभराव का जोखिम अधिक हो सकता है। सुरक्षित निर्णय के लिए अधिकृत नदी निगरानी और चेतावनी महत्वपूर्ण हैं।
शहरी जलभराव
शहरों में नालियों की क्षमता कम होना, जमीन का अत्यधिक पक्का होना और कचरा जमना जलभराव बढ़ा सकते हैं। सभी घटनाओं को केवल एक नाली की सफाई से रोकना संभव नहीं। भूमि उपयोग और निचले क्षेत्रों की पहचान भी जरूरी है।
तटीय बाढ़ का जोखिम
समुद्र के किनारे तूफानी लहर और अत्यधिक ज्वार कुछ क्षेत्रों में बाढ़ पैदा कर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में स्थानीय मौसम और आपदा प्रबंधन संस्थाओं की चेतावनी मानना आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन और जोखिम
दीर्घकालीन जलवायु बदलाव वर्षा की कुछ चरम परिस्थितियों और बाढ़ जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। किसी एक बाढ़ का पूरा कारण केवल जलवायु परिवर्तन कहना वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं; स्थानीय परिस्थिति का अध्ययन जरूरी है।
बाढ़ चेतावनी का महत्व
मौसम विभाग तथा नदी संबंधी अधिकारी समय-समय पर चेतावनी जारी कर सकते हैं। नागरिकों को वर्तमान स्थान-विशेष सूचना और स्थानीय प्रशासनिक निर्देश देखना चाहिए। पुराने सोशल मीडिया संदेश को आज का अलर्ट न मानें।
सुरक्षित निकासी की तैयारी
परिवार पहले से सुरक्षित मार्ग, आवश्यक दवाएँ और संपर्क विवरण समझ सकता है। निकासी का आदेश मिले तो निर्धारित सुरक्षित स्थान पर जाएँ। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों की जरूरत अलग हो सकती है।
बाढ़ के पानी से दूरी
तेज बहते या अज्ञात गहराई वाले बाढ़ के पानी में पैदल उतरना खतरनाक है। नीचे गड्ढे, तेज बहाव और बिजली संबंधी जोखिम हो सकते हैं। सड़क पर पानी भरा हो तो वाहन से पार करने का प्रयास भी जोखिमपूर्ण है।
बिजली और उपकरणों की सावधानी
पानी लगे विद्युत तार और उपकरण गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। बाढ़ वाले स्थान पर गीले उपकरण को छूने या मरम्मत करने का प्रयास न करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखकर प्रशिक्षित बिजली सेवा की सहायता लें।
स्वच्छ पेयजल की समस्या
बाढ़ के बाद पीने के पानी के स्रोत दूषित हो सकते हैं। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताई सुरक्षित जल व्यवस्था का पालन करना आवश्यक है। बीमारी के लक्षण होने पर योग्य स्वास्थ्य सहायता लें।
कचरा और बीमारियों का जोखिम
खड़ा पानी और दूषित वातावरण कुछ संक्रमणों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सभी बीमारियों को केवल बाढ़ का निश्चित परिणाम मानना उचित नहीं है।
फसल और पशुओं की सुरक्षा
बाढ़ में खेत, पशु और कृषि उपकरण प्रभावित हो सकते हैं। किसानों को सुरक्षित आश्रय तथा संबंधित सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है। किसी पशु को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालना उचित नहीं; प्रशिक्षित सहायता लें।
राहत शिविरों की व्यवस्था
अस्थायी राहत स्थानों में साफ पानी, स्वच्छ शौचालय, भोजन और सुरक्षा के संसाधन महत्वपूर्ण हैं। महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों की अलग जरूरतों का सम्मान आवश्यक है। शिविर की व्यवस्था स्थानीय अधिकारियों द्वारा निर्देशित हो सकती है।
सरकारी एजेंसियों का समन्वय
स्थानीय प्रशासन, राज्य आपदा प्रबंधन संस्थाएँ और विशेष बचाव दल अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। आवश्यकता होने पर सैन्य सेवाओं से भी सहयोग लिया जा सकता है। नागरिकों को अफवाह के बजाय आधिकारिक सूचना माननी चाहिए।
बाँध और जल निकासी की सीमाएँ
बाँध कुछ परिस्थितियों में जल प्रबंधन में योगदान देते हैं, लेकिन उनका संचालन तथा पर्यावरणीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। सभी बाढ़ों का एक ही समाधान अधिक बाँध बनाना नहीं है। स्थानीय नदी तंत्र और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाढ़ क्या है?
पानी का सामान्य सीमाओं से बाहर फैलकर आबादी या भूमि को प्रभावित करना।
क्या बाढ़ का कारण केवल वर्षा है?
नहीं। नदी, तटीय तूफान और निकासी की व्यवस्था भी असर डाल सकती है।
बाढ़ के पानी में चलना सुरक्षित है?
नहीं। अज्ञात गहराई और बहाव गंभीर जोखिम हैं।
बाढ़ चेतावनी कहाँ देखें?
अधिकृत मौसम, नदी निगरानी और स्थानीय आपदा प्रबंधन स्रोतों में।
बाढ़ से दीर्घकाल में कैसे बचें?
सही भूमि उपयोग, चेतावनी, जल निकासी और सुरक्षित निर्माण से जोखिम घटाया जा सकता है।
संबंधित विषय
और पढ़ें 1 तथा और पढ़ें 2 तथा और पढ़ें 3।
विश्वसनीय संदर्भ
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग।
निष्कर्ष
बाढ़ प्रबंधन पर चर्चा में वर्तमान जानकारी, स्थानीय परिस्थितियाँ और सभी लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। सामाजिक सहयोग तथा जिम्मेदार व्यवहार इस विषय की महत्वपूर्ण सीख है।

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Inter connectivity of river shall be added in above post to minimise the ill effect of flood.
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