असहयोग आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण चरण था, जिसे महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1920 में व्यापक रूप से आगे बढ़ाया। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग कम करके अहिंसक दबाव बनाना था।
असहयोग आंदोलन के प्रमुख कारण
- रॉलेट एक्ट के खिलाफ असंतोष
- जलियांवाला बाग हत्याकांड
- खिलाफत आंदोलन से जुड़ा प्रश्न
- औपनिवेशिक शासन से बढ़ता राजनीतिक असंतोष
- स्वराज की मांग
आंदोलन का कार्यक्रम क्या था?
- सरकारी उपाधियाँ वापस करना
- सरकारी शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार
- कानूनी अदालतों और कुछ सरकारी संस्थाओं से दूरी
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
- खादी और स्वदेशी को बढ़ावा
- शांतिपूर्ण सभाएँ और जनजागरण
आंदोलन में जनता की भागीदारी
छात्र, शिक्षक, वकील, व्यापारी, किसान और शहरी मध्यम वर्ग के अनेक लोग आंदोलन से जुड़े। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय समस्याएँ भी असहयोग के साथ जुड़ गईं, इसलिए इसका स्वरूप पूरे देश में एक जैसा नहीं था।
विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और खादी के उपयोग को आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बनाया गया। इसका उद्देश्य औपनिवेशिक आर्थिक संरचना को चुनौती देना और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना था।
चौरी-चौरा की घटना
फरवरी 1922 में संयुक्त प्रांत के चौरी-चौरा में प्रदर्शन हिंसक हो गया और पुलिस थाने में आग लगा दी गई, जिसमें पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई। गांधीजी ने इसे आंदोलन के अहिंसक सिद्धांत के विपरीत माना।
आंदोलन वापस क्यों लिया गया?
चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। इस फैसले पर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने असहमति जताई, लेकिन गांधीजी का मानना था कि व्यापक आंदोलन के लिए अहिंसक अनुशासन आवश्यक है।
असहयोग आंदोलन का महत्व
- राष्ट्रीय आंदोलन का सामाजिक आधार बहुत व्यापक हुआ।
- कांग्रेस का प्रभाव शहरों से गाँवों तक बढ़ा।
- खादी और स्वदेशी राष्ट्रीय प्रतीक बने।
- अहिंसक जनआंदोलन की शक्ति स्पष्ट हुई।
- स्वराज की मांग अधिक व्यापक हुई।
क्या आंदोलन असफल था?
यह अपने तत्काल राजनीतिक लक्ष्य तक नहीं पहुँचा, लेकिन इसे केवल असफल कहना उचित नहीं है। इसने भारतीय राजनीति में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी बढ़ाई और आगे के सविनय अवज्ञा तथा अन्य आंदोलनों के लिए आधार बनाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?
1920 में इसे व्यापक राष्ट्रीय अभियान के रूप में शुरू किया गया।
यह कब समाप्त हुआ?
1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद इसे वापस लिया गया।
निष्कर्ष
असहयोग आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को अभिजात राजनीतिक मांग से आगे बढ़ाकर व्यापक जनआंदोलन बनाया। इसका सबसे बड़ा योगदान जनता को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संगठित राजनीतिक कार्रवाई का अनुभव देना था।

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