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इंडिया गेट का इतिहास: निर्माण, शिलालेख, अमर जवान ज्योति, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कर्तव्य पथ

दिल्ली इंडिया गेट का इतिहास History of India Gate in Hindi
विषय सूची
  1. 1  इंडिया गेट कहाँ स्थित है?
  2. 2  इंडिया गेट का मूल नाम क्या था?
  3. 3  इंडिया गेट की आधारशिला कब रखी गई?
  4. 4  इंडिया गेट का डिजाइन किसने बनाया?
  5. 5  इंडिया गेट की ऊँचाई कितनी है?
  6. 6  इंडिया गेट किन सैनिकों की स्मृति में बनाया गया?
  7. 7  इंडिया गेट पर कितने नाम अंकित हैं?
  8. 8  इंडिया गेट पर क्या लिखा है?
  9. 9  अमर जवान ज्योति क्या थी?
  10. 10  अमर जवान ज्योति की लौ कहाँ गई?
  11. 11  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक कब बना?
  12. 12  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की संरचना
  13. 13  इंडिया गेट और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अंतर
  14. 14  राजपथ का नाम कर्तव्य पथ कब हुआ?
  15. 15  कर्तव्य पथ के पुनर्विकास में क्या बदला?
  16. 16  नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा
  17. 17  इंडिया गेट और गणतंत्र दिवस
  18. 18  क्या इंडिया गेट स्वतंत्रता सेनानियों का स्मारक है?
  19. 19  क्या इंडिया गेट विश्व धरोहर स्थल है?
  20. 20  इंडिया गेट की वास्तुकला
  21. 21  इंडिया गेट के आसपास का केंद्रीय विस्टा
  22. 22  दिल्ली के अन्य स्मारकों से इंडिया गेट कैसे अलग है?
  23. 23  इंडिया गेट घूमने का वर्तमान अनुभव
  24. 24  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाने से पहले क्या जानें?
  25. 25  इंडिया गेट का आधुनिक राष्ट्रीय महत्व
  26. 26  विद्यार्थियों को इंडिया गेट पर निबंध कैसे लिखना चाहिए?
  27. 27  निष्कर्ष
  28. 28  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  29. 29  स्रोत और संदर्भ

नई दिल्ली के हृदय में स्थित इंडिया गेट भारत के सबसे पहचानने योग्य स्मारकों में से एक है। यह विशाल मेहराब प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की स्मृति से जुड़ा है। आज यह केवल औपनिवेशिक काल का युद्ध स्मारक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय समारोहों, कर्तव्य पथ, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा से जुड़े व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा है।

इंडिया गेट के बारे में कई पुराने लेखों में अमर जवान ज्योति, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और राजपथ की वर्तमान स्थिति को लेकर भ्रम मिलता है। 2019 में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक राष्ट्र को समर्पित हुआ, 21 जनवरी 2022 को इंडिया गेट के नीचे स्थित अमर जवान ज्योति की लौ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की शाश्वत ज्योति में विलय की गई और 8 सितंबर 2022 को राजपथ का नाम कर्तव्य पथ रखा गया। इसलिए आज इंडिया गेट को उसके ऐतिहासिक और वर्तमान दोनों संदर्भों में समझना जरूरी है।

इंडिया गेट कहाँ स्थित है?

इंडिया गेट नई दिल्ली के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र में स्थित है। यह कर्तव्य पथ के पूर्वी छोर के पास विशाल वृत्ताकार क्षेत्र में खड़ा है। आसपास राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा, हरित मैदान और केंद्रीय विस्टा क्षेत्र स्थित हैं।

नई दिल्ली की योजना इस प्रकार बनाई गई थी कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक भवन, समारोह मार्ग और सार्वजनिक स्मारक एक व्यवस्थित अक्ष पर दिखाई दें। इंडिया गेट इसी नगर नियोजन का प्रमुख दृश्य केंद्र बना।

इंडिया गेट का मूल नाम क्या था?

इंडिया गेट को मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में बनाया गया था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश भारतीय सेना के उन सैनिकों की स्मृति को दर्ज करना था जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और उससे जुड़े अभियानों में जान गंवाई।

समय के साथ इसका लोकप्रिय नाम इंडिया गेट बन गया। स्वतंत्र भारत में इस स्मारक की सार्वजनिक पहचान औपनिवेशिक युद्ध स्मृति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख प्रतीक के रूप में विकसित हुई।

इंडिया गेट की आधारशिला कब रखी गई?

इंडिया गेट की आधारशिला 1921 में ड्यूक ऑफ कॉनॉट ने रखी थी। उस समय नई दिल्ली के निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा था। युद्ध स्मारक को नई राजधानी के औपचारिक नगर दृश्य का महत्वपूर्ण भाग बनाया गया।

लगभग एक दशक के निर्माण के बाद स्मारक 1931 में पूर्ण हुआ। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट भी इंडिया गेट के निर्माण वर्ष को 1931 बताती है।

इंडिया गेट का डिजाइन किसने बनाया?

इंडिया गेट का डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने तैयार किया। वे नई दिल्ली की कई प्रमुख औपनिवेशिक इमारतों और केंद्रीय प्रशासनिक योजना से जुड़े थे।

स्मारक की संरचना विजय मेहराब जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसका उद्देश्य युद्ध विजय का प्रदर्शन नहीं, सैनिकों की स्मृति को स्थायी रूप देना था। यही कारण है कि इसकी दीवारों पर नाम और युद्धकाल के संकेत अंकित किए गए।

इंडिया गेट की ऊँचाई कितनी है?

दिल्ली पर्यटन के अनुसार इंडिया गेट लगभग 42 मीटर ऊँचा है। लाल और हल्के रंग के पत्थर से बनी यह संरचना चौड़े आधार से ऊपर उठती हुई विशाल मेहराब बनाती है।

ऊँचाई के साथ इसका खुला स्थान और दूर तक दिखाई देने वाला मार्ग इसे नई दिल्ली के सबसे प्रभावशाली दृश्य स्मारकों में शामिल करता है। रात में प्रकाश व्यवस्था के कारण इसका स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देता है।

इंडिया गेट किन सैनिकों की स्मृति में बनाया गया?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इंडिया गेट प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की स्मृति से जुड़ा है। उस समय भारतीय सैनिक ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा थे और यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका तथा एशिया के कई मोर्चों पर तैनात किए गए थे।

इंडिया गेट इसलिए स्वतंत्र भारत में निर्मित युद्ध स्मारक नहीं है। उसका मूल ऐतिहासिक संदर्भ ब्रिटिश शासनकाल और उस समय की भारतीय सेना से जुड़ा है। स्वतंत्र भारत के शहीद सैनिकों के लिए बाद में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाया गया।

इंडिया गेट पर कितने नाम अंकित हैं?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इंडिया गेट पर 13,516 नाम अंकित हैं। ये नाम भारतीय और ब्रिटिश भारतीय सेना से जुड़े उन सैनिकों की स्मृति में हैं जिनकी मृत्यु संबंधित युद्ध अभियानों में हुई।

कई पुराने लेख केवल कुल युद्ध मृतकों की बड़ी संख्या लिखकर यह भ्रम पैदा करते हैं कि सभी नाम इंडिया गेट पर अंकित हैं। सही बात यह है कि स्मारक व्यापक सैनिक बलिदान का प्रतीक है, लेकिन पत्थर पर लिखे नामों की संख्या अलग और सीमित है।

इंडिया गेट पर क्या लिखा है?

मेहराब के ऊपर बड़े अक्षरों में इंडिया नाम अंकित है। उसके साथ प्रथम विश्व युद्ध की अवधि को दर्शाने वाले 1914 और 1919 के रोमन अंक भी दिखाई देते हैं।

स्मारक पर अंग्रेजी में समर्पण लेख भी है जो भारतीय सेना के सैनिकों की स्मृति से जुड़ा है। नामों की खुदाई और औपचारिक भाषा उस समय के औपनिवेशिक युद्ध स्मारक की शैली को दर्शाती है।

अमर जवान ज्योति क्या थी?

अमर जवान ज्योति स्वतंत्रता के बाद इंडिया गेट के नीचे स्थापित सैनिक स्मृति चिन्ह था। इसमें उलटी रखी बंदूक, उसके ऊपर सैनिक की टोपी और चारों ओर ज्योति की व्यवस्था थी।

यह स्मारक जनवरी 1972 में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृति से जुड़ा था। स्वतंत्र भारत के कई राष्ट्रीय श्रद्धांजलि समारोह लंबे समय तक यहीं आयोजित होते रहे।

अमर जवान ज्योति की लौ कहाँ गई?

21 जनवरी 2022 को इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति की लौ को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की शाश्वत ज्योति में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ विलय किया गया। इसका अर्थ यह नहीं कि सैनिक स्मृति समाप्त हुई; औपचारिक श्रद्धांजलि का केंद्र राष्ट्रीय युद्ध स्मारक हो गया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय दिवसों सहित आधिकारिक श्रद्धांजलि समारोह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में आयोजित किए जाने लगे। इसलिए आज पुराने लेख में यह लिखना कि अमर जवान ज्योति की लौ इंडिया गेट के नीचे उसी रूप में लगातार जल रही है, वर्तमान स्थिति के अनुसार सही नहीं है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक कब बना?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास सी-षट्भुज क्षेत्र में बनाया गया और 25 फरवरी 2019 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के सैनिकों को समर्पित व्यापक राष्ट्रीय स्मारक बनाना था।

यह इंडिया गेट से अलग स्मारक है। दोनों पास-पास स्थित होने के कारण भ्रम हो सकता है, लेकिन उनका निर्माण काल, उद्देश्य और स्मृति संदर्भ अलग हैं।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की संरचना

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक चार प्रमुख चक्रों की अवधारणा पर बनाया गया है—अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र और रक्षक चक्र। इसके केंद्र में शाश्वत ज्योति और ऊँचा स्तंभ है।

स्मारक में स्वतंत्रता के बाद विभिन्न युद्धों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, शांति मिशनों और सैन्य अभियानों में बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम दर्ज हैं। परमवीर चक्र विजेताओं के लिए परम योद्धा स्थल भी बनाया गया है।

इंडिया गेट और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अंतर

इंडिया गेट 1931 का औपनिवेशिक कालीन युद्ध स्मारक है, जबकि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 2019 में स्वतंत्र भारत के सैनिक बलिदान की स्मृति के लिए बनाया गया। इंडिया गेट पर प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध से जुड़े नाम हैं, जबकि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्वतंत्रता के बाद के बलिदानों को केंद्र में रखता है।

दोनों का वास्तु स्वरूप भी अलग है। इंडिया गेट एक ऊँची मेहराब है, जबकि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नीचे की ओर व्यवस्थित वृत्ताकार स्मृति परिसर है ताकि इंडिया गेट की दृश्य रेखा बनी रहे।

राजपथ का नाम कर्तव्य पथ कब हुआ?

8 सितंबर 2022 को पुनर्विकसित केंद्रीय विस्टा एवेन्यू के साथ राजपथ का नाम कर्तव्य पथ रखा गया। उसी दिन प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

कर्तव्य पथ राष्ट्रपति भवन की दिशा से इंडिया गेट तक फैले औपचारिक मार्ग का वर्तमान नाम है। नए संसद भवन और केंद्रीय विस्टा से जुड़े परिवर्तन समझने पर इस क्षेत्र का आधुनिक पुनर्विकास और स्पष्ट होता है।

कर्तव्य पथ के पुनर्विकास में क्या बदला?

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने पैदल मार्ग, हरित क्षेत्र, नहर किनारे सुविधाएँ, संकेतक, शौचालय, पेयजल, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था में सुधार किया। पैदल यात्रियों के लिए भूमिगत मार्ग भी बनाए गए।

इन परिवर्तनों का उद्देश्य बड़े सार्वजनिक समारोहों और सामान्य आगंतुकों के लिए क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित बनाना था। साथ ही वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रित पानी और ऊर्जा दक्ष प्रकाश व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल किए गए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा

8 सितंबर 2022 को इंडिया गेट के पास पुराने छत्र मंडप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विशाल ग्रेनाइट प्रतिमा स्थापित की गई। सरकारी जानकारी के अनुसार यह लगभग 28 फुट ऊँची है और एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से तैयार की गई।

नेताजी के जीवन, आजाद हिंद फौज और पराक्रम दिवस के संदर्भ को समझने के लिए पराक्रम दिवस का इतिहास उपयोगी है। प्रतिमा ने इंडिया गेट क्षेत्र की आधुनिक राष्ट्रीय प्रतीकात्मकता में नया अध्याय जोड़ा।

इंडिया गेट और गणतंत्र दिवस

नई दिल्ली का कर्तव्य पथ गणतंत्र दिवस समारोह और परेड से जुड़ा प्रमुख राष्ट्रीय स्थल है। राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ की दिशा में होने वाला औपचारिक आयोजन भारत की संवैधानिक और सैन्य परंपराओं को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करता है।

गणतंत्र दिवस की परेड, झांकियाँ और सैन्य प्रदर्शन इस पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय समारोह का केंद्र बनाते हैं। इंडिया गेट इस दृश्य पृष्ठभूमि का सबसे पहचान योग्य स्मारक है।

क्या इंडिया गेट स्वतंत्रता सेनानियों का स्मारक है?

नहीं। इंडिया गेट का मूल निर्माण स्वतंत्रता सेनानियों के लिए नहीं हुआ था। यह ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की युद्ध स्मृति के लिए बनाया गया था।

स्वतंत्रता आंदोलन, नेताजी और अन्य राष्ट्रीय नेताओं की स्मृति अलग ऐतिहासिक संदर्भ रखती है। आज इंडिया गेट क्षेत्र में नेताजी की प्रतिमा होने से दोनों इतिहास एक ही सार्वजनिक परिसर में दिखाई देते हैं, लेकिन मूल स्मारक का उद्देश्य बदलकर स्वतंत्रता सेनानी स्मारक नहीं हो गया।

क्या इंडिया गेट विश्व धरोहर स्थल है?

इंडिया गेट यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं है। यह भारत का राष्ट्रीय महत्व वाला प्रसिद्ध सार्वजनिक स्मारक है, लेकिन यूनेस्को सूची में होना अलग अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है।

दिल्ली के कई अन्य स्मारक जैसे कुतुबमीनार और उसके स्मारक यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में हैं। इसलिए लोकप्रियता और यूनेस्को दर्जे को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

इंडिया गेट की वास्तुकला

इंडिया गेट विशाल स्वतंत्र मेहराब के रूप में बनाया गया है। इसकी मजबूत चौकोर आधार संरचना ऊपर जाते हुए संकरी होती है और मध्य में विशाल मार्ग बनाती है।

पत्थर पर अपेक्षाकृत सीमित सजावट और सैन्य स्मारक की औपचारिक गंभीरता दिखाई देती है। यह भव्य है, लेकिन अत्यधिक नक्काशी से भरा नहीं है। यही सादगी उसके स्मृति उद्देश्य के अनुकूल है।

इंडिया गेट के आसपास का केंद्रीय विस्टा

केंद्रीय विस्टा नई दिल्ली का औपचारिक प्रशासनिक और समारोह क्षेत्र है। इसमें कर्तव्य पथ, इंडिया गेट के मैदान, राष्ट्रपति भवन, मंत्रालय भवन और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक इमारतें शामिल हैं।

इस क्षेत्र की योजना दूर से दिखाई देने वाली सीधी दृश्य रेखाओं और विशाल खुले मैदानों पर आधारित है। इंडिया गेट इसी योजना में अंतिम बड़े स्मारकीय केंद्र जैसा दिखाई देता है।

दिल्ली के अन्य स्मारकों से इंडिया गेट कैसे अलग है?

दिल्ली में कुतुबमीनार, लाल किला और जामा मस्जिद जैसे स्मारक मध्यकालीन शासन और धार्मिक वास्तुकला से जुड़े हैं। इंडिया गेट बीसवीं सदी का युद्ध स्मारक है और आधुनिक नई दिल्ली की नगर योजना का हिस्सा है।

इस अंतर के कारण इंडिया गेट का अध्ययन केवल वास्तुकला के रूप में नहीं, बल्कि युद्ध स्मृति, औपनिवेशिक इतिहास और स्वतंत्र भारत में सार्वजनिक प्रतीकों के बदलते अर्थ के संदर्भ में करना अधिक उपयोगी है।

इंडिया गेट घूमने का वर्तमान अनुभव

इंडिया गेट क्षेत्र खुला सार्वजनिक स्थान है और बड़ी संख्या में लोग शाम के समय यहाँ आते हैं। कर्तव्य पथ पुनर्विकास के बाद पैदल मार्ग, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार किया गया है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की यात्रा अलग अनुभव देती है। वहाँ शांत वातावरण, सैनिक नाम, शाश्वत ज्योति और युद्ध स्मृति केंद्र में रहती है। वर्तमान समय में दोनों स्थानों को साथ देखने से पूरे क्षेत्र का ऐतिहासिक विकास समझ आता है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाने से पहले क्या जानें?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान प्रवेश समय और विशेष प्रतिबंध दिए जाते हैं। मौसम और समारोह के अनुसार समय बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर है।

स्मारक सैनिकों की स्मृति का स्थान है, इसलिए शांत और सम्मानजनक व्यवहार रखना चाहिए। नाम पट्टिकाओं, शाश्वत ज्योति और परम योद्धा स्थल को सामान्य मनोरंजन स्थल की तरह नहीं देखना चाहिए।

इंडिया गेट का आधुनिक राष्ट्रीय महत्व

इंडिया गेट का मूल निर्माण औपनिवेशिक काल में हुआ, लेकिन स्वतंत्र भारत में उसका सामाजिक अर्थ बदलता गया। अमर जवान ज्योति की स्थापना, राष्ट्रीय समारोहों का विकास, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और नेताजी प्रतिमा ने आसपास के क्षेत्र को नई राष्ट्रीय स्मृति से जोड़ा।

इसलिए इंडिया गेट आज एक ऐसा स्थल है जहाँ बीसवीं सदी के औपनिवेशिक युद्ध इतिहास और स्वतंत्र भारत की सैन्य तथा राष्ट्रीय स्मृति एक ही परिदृश्य में दिखाई देती हैं।

विद्यार्थियों को इंडिया गेट पर निबंध कैसे लिखना चाहिए?

सबसे पहले स्थान और निर्माण इतिहास लिखें। इसके बाद एडविन लुटियंस, 1921 की आधारशिला, 1931 का निर्माण, युद्ध स्मृति और नामों का उल्लेख करें। फिर अमर जवान ज्योति, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कर्तव्य पथ की वर्तमान स्थिति अलग-अलग समझाएँ।

पुराने लेख की तरह यह न लिखें कि अमर जवान ज्योति आज भी इंडिया गेट के नीचे उसी रूप में जल रही है। 21 जनवरी 2022 को उसकी लौ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की शाश्वत ज्योति में विलय की गई थी।

निष्कर्ष

इंडिया गेट नई दिल्ली का प्रसिद्ध युद्ध स्मारक और सार्वजनिक प्रतीक है। 1921 में उसकी आधारशिला रखी गई, एडविन लुटियंस ने डिजाइन तैयार किया और 1931 में स्मारक पूर्ण हुआ। इसकी दीवारों पर 13,516 नाम अंकित हैं। स्वतंत्रता के बाद 1972 में अमर जवान ज्योति जोड़ी गई, लेकिन 21 जनवरी 2022 को उसकी लौ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की शाश्वत ज्योति में विलय कर दी गई। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्वयं 25 फरवरी 2019 को राष्ट्र को समर्पित हुआ। 8 सितंबर 2022 को राजपथ कर्तव्य पथ बना और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित हुई। इन सभी घटनाओं को अलग-अलग समझने पर इंडिया गेट का इतिहास अधिक सही और पूर्ण रूप में सामने आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया गेट कब बनाया गया था?

इंडिया गेट की आधारशिला 1921 में रखी गई और स्मारक 1931 में पूर्ण हुआ। इसे नई दिल्ली की औपचारिक नगर योजना के हिस्से के रूप में बनाया गया था।

इंडिया गेट का डिजाइन किसने बनाया?

इसका डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने तैयार किया था। वे नई दिल्ली की कई प्रमुख प्रशासनिक इमारतों और नगर योजना से भी जुड़े थे।

इंडिया गेट पर कितने सैनिकों के नाम लिखे हैं?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इंडिया गेट पर 13,516 नाम अंकित हैं।

अमर जवान ज्योति अब कहाँ है?

21 जनवरी 2022 को इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति की लौ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की शाश्वत ज्योति में विलय की गई।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक कब बना?

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 25 फरवरी 2019 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृति के लिए बनाया गया है।

राजपथ का नाम कर्तव्य पथ कब रखा गया?

8 सितंबर 2022 को पुनर्विकसित राजपथ का नाम कर्तव्य पथ रखा गया। उसी दिन इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण हुआ।

क्या इंडिया गेट यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?

नहीं। इंडिया गेट अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारक है, लेकिन यह यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं है।

स्रोत और संदर्भ

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक: इंडिया गेट, अमर जवान ज्योति और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का आधिकारिक इतिहास

भारत सरकार: अमर जवान ज्योति की लौ के विलय की आधिकारिक जानकारी

भारत सरकार: कर्तव्य पथ और नेताजी प्रतिमा का उद्घाटन

दिल्ली पर्यटन: इंडिया गेट का इतिहास और वास्तुकला

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