भूकंप क्या है? कारण, प्रभाव, बचाव और आपदा प्रबंधन

भूकंप पृथ्वी के भीतर चट्टानों के अचानक खिसकने या टूटने से पैदा हुई ऊर्जा के कारण जमीन का हिलना है। झटके महसूस होते ही सबसे सुरक्षित सामान्य तरीका है—झुकें, ढकें और पकड़कर रहें (Drop, Cover and Hold On)। यदि आप किसी मजबूत इमारत के अंदर हैं, तो झटकों के दौरान बाहर की ओर न भागें; खिड़कियों और गिर सकने वाली वस्तुओं से दूर होकर सिर तथा गर्दन की रक्षा करें।

इस लेख में भूकंप के कारण, केंद्र और अधिकेंद्र, परिमाण तथा तीव्रता का अंतर, भारत में जोखिम और भूकंप से पहले, दौरान एवं बाद में अपनाए जाने वाले सुरक्षित उपाय आसान हिंदी में दिए गए हैं। यह जानकारी विद्यार्थियों के साथ-साथ परिवार की आपदा-तैयारी के लिए भी उपयोगी है।

Table of Content

भूकंप क्या है?

पृथ्वी की ऊपरी ठोस परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी है। ये प्लेटें बहुत धीमी गति से चलती रहती हैं। जहां प्लेटें मिलती हैं, अलग होती हैं या एक-दूसरे के पास से खिसकती हैं, वहां चट्टानों में तनाव जमा हो सकता है। जब तनाव चट्टानों की सहन-सीमा से अधिक हो जाता है, तो वे किसी भ्रंश (fault) के सहारे अचानक खिसकती हैं। इससे निकली ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और जमीन हिलती है।

पृथ्वी के भीतर जिस स्थान से टूटना शुरू होता है उसे उद्गम केंद्र या फोकस (hypocentre) कहते हैं। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु अधिकेंद्र (epicentre) कहलाता है। आम तौर पर अधिकेंद्र के आसपास कंपन अधिक महसूस हो सकता है, लेकिन वास्तविक प्रभाव भूकंप की गहराई, दूरी, मिट्टी, भवन की बनावट और स्थानीय भूगर्भीय दशाओं पर भी निर्भर करता है।

भूकंप आने के प्रमुख कारण

1. टेक्टोनिक प्लेटों की गति

अधिकांश भूकंप प्लेटों की सीमाओं या सक्रिय भ्रंशों पर होते हैं। प्लेटों के टकराने, दूर जाने या एक-दूसरे के समानांतर खिसकने से तनाव बनता है। हिमालय का क्षेत्र भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट की परस्पर क्रिया के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है। हिमालय के निर्माण और भौगोलिक विशेषताओं को समझने के लिए हिमालय पर्वत की विस्तृत जानकारी भी पढ़ सकते हैं।

2. ज्वालामुखीय गतिविधि

मैग्मा की गति और ज्वालामुखी विस्फोट के आसपास भी कंपन हो सकते हैं। ऐसे भूकंप सामान्यतः ज्वालामुखीय क्षेत्रों से जुड़े होते हैं। प्रत्येक भूकंप का कारण ज्वालामुखी नहीं होता; विश्व के अधिकांश बड़े भूकंप टेक्टोनिक हलचलों से संबंधित हैं।

3. मानवीय गतिविधियां

कुछ स्थानीय और अपेक्षाकृत छोटे भूकंपीय घटनाक्रम खनन, गहरे द्रव इंजेक्शन, बड़े जलाशयों या भूमिगत विस्फोटों जैसी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। किसी खास घटना का कारण वैज्ञानिक आंकड़ों और भूकंपीय निगरानी के बाद ही तय किया जाना चाहिए।

भूकंप का परिमाण और तीव्रता: क्या अंतर है?

इन दोनों शब्दों को अक्सर एक समझ लिया जाता है, जबकि इनका अर्थ अलग है।

आधार परिमाण (Magnitude) तीव्रता (Intensity)
क्या बताता है? भूकंप के स्रोत पर उसके आकार या निकली ऊर्जा का माप किसी विशेष स्थान पर महसूस हुए कंपन और प्रभाव
मानों की संख्या किसी एक भूकंप के लिए एक परिमाण स्थान बदलने पर तीव्रता बदल सकती है
आधार सीस्मोमीटर से दर्ज तरंगें कंपन, लोगों के अनुभव और भवनों पर प्रभाव
प्रचलित पैमाना आज बड़े भूकंपों के लिए प्रायः Moment Magnitude (Mw) Modified Mercalli जैसे तीव्रता पैमाने

हर भूकंप को केवल “रिक्टर स्केल” से मापा गया कहना हमेशा सटीक नहीं है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में अलग-अलग magnitude scales प्रयोग होते हैं और बड़े भूकंपों के लिए Moment Magnitude प्रचलित है। USGS के अनुसार, magnitude स्रोत पर भूकंप का आकार बताता है, जबकि intensity किसी स्थान पर हुए कंपन और प्रभाव को दर्शाती है।

भूकंप के प्रभाव

  • जमीन का कंपन: कमजोर या बिना इंजीनियरिंग वाली इमारतों में दरार और गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
  • सतही भ्रंश: कुछ घटनाओं में जमीन की सतह भ्रंश के दोनों ओर खिसक सकती है।
  • भूस्खलन: पहाड़ी क्षेत्रों में कंपन ढलानों को अस्थिर कर सकता है।
  • मृदा द्रवीकरण: पानी से भरी ढीली मिट्टी तेज कंपन में कुछ समय के लिए अपनी मजबूती खो सकती है।
  • आग और सेवाओं में बाधा: गैस, बिजली, पानी और संचार व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो सकती है।
  • सुनामी: समुद्र के नीचे कुछ बड़े भूकंप समुद्री जल को विस्थापित करके सुनामी पैदा कर सकते हैं। विस्तार से सुनामी और उसके प्रबंधन का लेख देखें।

भूकंप से पहले क्या तैयारी करें?

घर को सुरक्षित बनाएं

  • भारी अलमारी, बुकशेल्फ और अन्य ऊंचे फर्नीचर को दीवार से मजबूती से बांधें।
  • भारी सामान ऊंची शेल्फ पर न रखें। टूटने वाली वस्तुएं बंद अलमारी में रखें।
  • बिस्तर और बैठने की जगह को भारी शीशे, ढीले पंखे तथा गिर सकने वाली वस्तुओं से दूर रखें।
  • गैस, बिजली और पानी की मुख्य सप्लाई बंद करने का सुरक्षित तरीका जानें। इन्हें केवल तब बंद करें जब नुकसान का संकेत हो और ऐसा करना सुरक्षित हो।
  • नया निर्माण या संरचनात्मक सुधार योग्य structural engineer और लागू building codes के अनुसार कराएं। केवल बीम, खिड़की या छत के बारे में कोई एक सामान्य उपाय भवन को “भूकंपरोधी” नहीं बना देता।

परिवार की आपदा योजना बनाएं

परिवार के प्रत्येक सदस्य को घर के सुरक्षित स्थान, निकास मार्ग और बाहर मिलने की जगह पता होनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और पालतू जानवरों की जरूरतों को योजना में शामिल करें। फोन नेटवर्क व्यस्त हो सकता है, इसलिए एक स्थानीय और एक दूसरे शहर के संपर्क व्यक्ति का नंबर लिखकर रखें। समय-समय पर “झुकें, ढकें और पकड़कर रहें” अभ्यास करें। अन्य परिस्थितियों की तैयारी के लिए प्राकृतिक आपदाओं और उनके प्रबंधन की जानकारी उपयोगी हो सकती है।

आपातकालीन किट तैयार रखें

  • पीने का पानी और खराब न होने वाला भोजन
  • डॉक्टर द्वारा दी गई जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार सामग्री
  • टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी और बैटरी या हैंड-क्रैंक रेडियो
  • पावर बैंक, सीटी और मजबूत जूते
  • मास्क, स्वच्छता सामग्री तथा बच्चों या बुजुर्गों की विशेष वस्तुएं
  • महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षित प्रतियां और कुछ नकदी

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) परिवार की disaster plan, emergency kit, सुरक्षित meeting places और नियमित mock drills की सलाह देता है। अपनी किट की सामग्री और expiry dates समय-समय पर जांचें।

भूकंप के दौरान क्या करें?

यदि आप घर या इमारत के अंदर हैं

  1. झुकें (Drop): हाथों और घुटनों के बल नीचे झुक जाएं ताकि तेज कंपन से गिरें नहीं।
  2. ढकें (Cover): मजबूत मेज या डेस्क के नीचे जाकर सिर और गर्दन ढकें। मेज पास न हो तो खिड़की से दूर किसी अंदरूनी दीवार के पास नीचे बैठकर सिर-गर्दन को हाथों से बचाएं।
  3. पकड़कर रहें (Hold On): मेज को पकड़ें और झटके बंद होने तक उसी के साथ रहें।

झटकों के दौरान बाहर न दौड़ें। भवन के बाहरी हिस्सों से कांच, ईंट या दूसरी वस्तुएं गिर सकती हैं। खिड़कियों, शीशों, लटकती वस्तुओं और भारी अलमारियों से दूर रहें। लिफ्ट का उपयोग न करें। यदि बिस्तर पर हैं और ऊपर भारी वस्तु गिरने का खतरा नहीं है, तो वहीं रहें और तकिए से सिर तथा गर्दन ढकें। यह सलाह USGS की earthquake safety guidance और NIDM के निर्देशों के अनुरूप है।

यदि आप बाहर हैं

वहीं रहें और सावधानी से भवनों, बाहरी दीवारों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइट, पुलों और बिजली के तारों से दूर किसी खुले स्थान की ओर जाएं। नीचे झुककर सिर तथा गर्दन को सुरक्षित रखें। किसी भवन के निकास के ठीक बाहर खड़े न हों, क्योंकि वहां मलबा गिर सकता है।

यदि आप वाहन चला रहे हैं

गति धीरे-धीरे कम करें और पुल, फ्लाईओवर, सुरंग, पेड़, इमारत तथा बिजली के तारों से दूर सुरक्षित स्थान पर वाहन रोकें। पार्किंग ब्रेक लगाएं और झटके बंद होने तक वाहन के अंदर रहें। सड़क क्षतिग्रस्त हो सकती है, इसलिए बाद में प्रशासन के निर्देशों और मार्ग की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ें।

यदि आप समुद्र तट के पास हैं

पहले Drop, Cover and Hold On से अपनी रक्षा करें। मजबूत या लंबे झटके बंद होने के बाद स्थानीय चेतावनी की प्रतीक्षा किए बिना ऊंचे स्थान या तट से दूर सुरक्षित क्षेत्र की ओर जाएं, क्योंकि समुद्र के नीचे का भूकंप सुनामी का कारण बन सकता है। स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक चेतावनी का पालन करें।

भूकंप के बाद क्या करें?

  • अपने और आसपास के लोगों की चोट जांचें। गंभीर घायल व्यक्ति को तत्काल खतरा न हो तो अनावश्यक रूप से न हिलाएं; आपात सेवा से सहायता लें।
  • Aftershocks यानी बाद के झटकों के लिए तैयार रहें। झटका आए तो फिर Drop, Cover and Hold On करें।
  • क्षतिग्रस्त भवन से झटके बंद होने के बाद सावधानी से सीढ़ियों द्वारा निकलें। लिफ्ट का प्रयोग न करें और भवन में दोबारा तभी जाएं जब अधिकारी उसे सुरक्षित बताएं।
  • गैस की गंध, चिंगारी या टूटी लाइन दिखे तो आग न जलाएं और electrical switch न छुएं। सुरक्षित हो तो मुख्य सप्लाई बंद करके संबंधित सेवा को सूचित करें।
  • गिरे बिजली के तारों से दूर रहें। उन्हें चालू मानें और दूसरों को भी पास न जाने दें।
  • फोन कॉल केवल आपात स्थिति में करें; संभव हो तो छोटा संदेश भेजें। आधिकारिक रेडियो, सरकारी alert और स्थानीय प्रशासन की सूचना सुनें।
  • मलबे में स्वयं घुसकर rescue करने से दूसरा हादसा हो सकता है। प्रशिक्षित बचाव दल को स्थान और फंसे व्यक्ति की जानकारी दें।
  • अफवाह, अपुष्ट वीडियो या “अगला भूकंप किस समय आएगा” जैसे दावों को साझा न करें। भारत में दर्ज घटनाओं की जानकारी National Center for Seismology से देखी जा सकती है।

भारत में भूकंप का जोखिम

भारत के अलग-अलग हिस्सों में भूकंपीय जोखिम समान नहीं है। हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व भारत, कच्छ और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण tectonic activity है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अन्य स्थानों पर भूकंप असंभव है। भवन की गुणवत्ता, स्थानीय मिट्टी, जनसंख्या घनत्व और तैयारी यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं कि एक घटना कितनी हानि करेगी।

भूकंप की तारीख, समय और सटीक magnitude पहले से निश्चित रूप से बताने वाले सोशल मीडिया संदेशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वर्तमान विज्ञान दीर्घकालीन hazard assessment कर सकता है, लेकिन किसी भूकंप का सटीक समय, स्थान और आकार विश्वसनीय रूप से पहले बताना संभव नहीं है। पृथ्वी की संरचना से जुड़े सामान्य तथ्यों के लिए पृथ्वी के बारे में रोचक तथ्य पढ़ें।

विद्यालय और कार्यालय के लिए संक्षिप्त भूकंप योजना

  1. कमरे में सुरक्षित cover locations और जोखिम वाली वस्तुएं पहचानें।
  2. निकास रास्ते तथा assembly point तय करें, लेकिन evacuation झटके बंद होने के बाद करें।
  3. नियमित Drop, Cover and Hold On drill कराएं।
  4. प्राथमिक उपचार, head count और emergency communication की जिम्मेदारी तय करें।
  5. दिव्यांग व्यक्तियों और छोटे बच्चों के लिए व्यक्तिगत सहायता योजना बनाएं।
  6. हर drill के बाद कमियों की समीक्षा करके योजना सुधारें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूकंप आते ही क्या घर से बाहर भागना चाहिए?

यदि आप मजबूत इमारत के अंदर हैं तो झटकों के दौरान बाहर न भागें। झुकें, मजबूत मेज के नीचे ढकें और पकड़कर रहें। झटके बंद होने के बाद नुकसान देखकर सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलें।

क्या दरवाजे के नीचे खड़ा होना सबसे सुरक्षित है?

आधुनिक भवनों में सामान्य doorway बाकी हिस्सों से अनिवार्य रूप से मजबूत नहीं होता और झूलता दरवाजा चोट पहुंचा सकता है। मजबूत मेज के नीचे Drop, Cover and Hold On सामान्यतः बेहतर सलाह है।

भूकंप की भविष्यवाणी पहले से हो सकती है?

वैज्ञानिक जोखिम वाले क्षेत्रों और लंबे समय की संभावना का अध्ययन कर सकते हैं, पर किसी भूकंप की सटीक तारीख, समय, स्थान और magnitude पहले से विश्वसनीय रूप से बताना संभव नहीं है।

भूकंप के बाद उसी इमारत में वापस जा सकते हैं?

क्षतिग्रस्त इमारत में वापस न जाएं। Aftershocks से अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। स्थानीय अधिकारी या योग्य structural professional के सुरक्षित घोषित करने के बाद ही प्रवेश करें।

Magnitude और intensity एक ही हैं?

नहीं। Magnitude भूकंप के स्रोत पर उसके आकार का एक माप है। Intensity किसी विशेष स्थान पर महसूस हुए कंपन और नुकसान का स्तर है, इसलिए वह अलग-अलग जगह बदल सकती है।

निष्कर्ष

भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सुरक्षित निर्माण, घर की वस्तुओं को मजबूती से बांधने, परिवार की योजना, emergency kit और नियमित अभ्यास से चोट तथा नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात याद रखें—झटके महसूस होते ही झुकें, ढकें और पकड़कर रहें; झटकों के दौरान बाहर न दौड़ें और बाद में केवल आधिकारिक सूचना का पालन करें।

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