इस लेख में आप सुनामी पर निबंध हिन्दी में पढ़ेंगे। इसमें हमने सुनामी क्या है? इसके कारण, प्रभाव, और इससे बचने (प्रबंधन) के विषय में पूरी जानकारी दी है।
सुनामी पर निबंध
इस सुनामी पर निबंध को पढ़ कर न सिर्फ परीक्षा में इस टॉपिक से मदद मिल सकती है बल्कि साथ ही सुनामी आने पर नीचे दिए हुए बचाव के टिप्स पढ़ कर मदद भी की जा सकती है।
सुनामी क्या है?

ऊँची समुद्री लहरें जो 10 से 18 मीटर ऊंची होती हैं उनको सुनामी कहते हैं। यह एक प्रकार का समुद्री तूफान होता है जो समुद्र तटों पर भारी तबाही मचाता है।
सुनामी पहली लहर सबसे बड़ी नहीं हो सकती है, और अक्सर यह 2, 3, 4 या बाद की तरंगें होती हैं जो सबसे बड़ी होती हैं। 26 दिसम्बर 2004 में हिंद महासागर में भयंकर सुनामी लहरें उत्पन्न हुई थी जिसमें 2.5 लाख से अधिक लोग मारे गये थे।
भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाइलैंड, मेडागास्कर, मालदीव, मलेशिया, म्यांमार, सेशेल्स, सोमालिया, तंजानिया, केन्या, बंगलादेश समेत 13 देशों में इस सुनामी ने भीषण तबाही मचाई।
सुनामी आने पर समुद्र की लहरों की गति 420 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाती है। अपने रास्ते में आने वाले सभी जहाजों, नावों को यह तोड़ कर नष्ट कर देती है। जिस समुद्र में सुनामी आती है वहां पर समुद्र तट नष्ट हो जाते हैं, पेड़-पौधे टूट जाते हैं, मानव बस्तियां, मकान, इमारत, बंदरगाह नष्ट हो जाते हैं।
इसलिए सुनामी से सभी लोग बहुत डरते हैं। यह बहुत ही भयानक होती है। सुनामी अपने साथ शहर के शहर बहा ले जाती है। कारें, बसे, वाहन समुद्र के पानी में बहने लग जाते हैं। सब कुछ नष्ट हो जाता है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। हजारों लोग की जान चली जाती है।
सुनामी होने के कारण
सुनामी मुख्य रूप से अन्य प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न होती है। आईए जानते हैं इसके मुख्य कारणों को –
1. भूकंप
जब समुद्र के अंदर दो प्लेट भूकंप के कारण खिसक जाते हैं तो उनसे समुद्र के अंदर बहुत तेज कंपन होता है। इससे समुद्र के मध्य भाग से छोटी-छोटी लहरें उत्पन्न होती है और तटीय क्षेत्रों मे जाते-जाते वह लहरें बहुत बड़ी और तेज रफ्तार की हो जाती है।
इन लहरों की तीव्रता 300-400 किलोमीटर की होती है और ऊंचाई 30-40 मीटर भी हो सकती है। यही लहरें सूनामी के नाम से जानी जाती है। यह जब समुद्र तट से टकराती है तो सब कुछ तबाह कर देती हैं। (भूकंप के विषय में पूरा पढ़ें)
2. भूस्खलन
जब कभी भी समुद्र के किसी त्यात पर भूस्खलन होता है तो पत्थर, मिट्टी के बड़े-बड़े टुकड़े समुद्र के पानी मे गिरते हैं। यही सब समुद्र के अंदर बड़ी-बड़ी लहरों को उत्पन्न करते हैं जो बाद में सुनामी का रूप ले सकता है।
3. ज्वालामुखी का फटना
जब समुद्र के तट पर या किसी टापू पर स्थित ज्वालामुखी विस्फोट होता है तो ज्वालामुखी से निकलने वाली आग की लहरें पानी की एक बड़ी मात्रा को विस्थापित कर सकते हैं। ऐसे होने से समुद्र के पानी में बड़ी-बड़ी लहरें उत्पन्न हो कर सुनामी का खतरा बढ़ सकता है।
4. क्षुद्रग्रह या उल्का के गिरने से
क्षुद्रग्रह या उल्का का गिरना कोई आम बात नहीं है और न ही कभी इनके कारण कोई सुनामी इतिहास में कभी उत्पन्न हुई है।
परंतु वज्ञानिकों का मानना है की अगर कोई बड़ा 5-6 किलोमीटर व्यास का क्षुद्रग्रह समुद्र में गिरता है तो वह ऐसी सुनामी उत्पन्न करेगा जो कनाडा, अमेरिका और मैक्सिको के पश्चिमी तटों पर सभी शहरों को तबाह कर देगा।
सुनामी का प्रभाव

सूनामी के बहुत ही खतरनाक प्रभाव देखने को मिलते हैं –
1. घरों का विनाश
जब सुनामी तटों की इमारतों से टकराती है तो इमारतों को नष्ट कर सकती है और संपत्ति के गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है। सुनामी की चपेट में आने वाले इलाके में रहने वाले ज्यादातर लोग अपना सबकुछ खो देते हैं।
सूनामी के कुछ प्रभावों से घरों को नींव तक उजड़ जाती है। सुनामी से प्रभावित लोगों को पुनर्निर्माण की महंगी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
2. जान गंवाना
सुनामी कितना हद तक नुकसान पहुंचा सकता है यह सोचपाना मुश्किल है परंतु यह तो है की इसके आने से भारी तागाद में लोगों को जान गवाना पड़ता है।
11 मार्च, 2011 को एक विनाशकारी भूकंप के बाद उत्तरी जापान में आई सूनामी ने कम से कम 14,340 लोगों की जान ले ली। इस सुनामी में इमारतें उखड़ गईं और हजारों लोग मलबे के नीचे फंस गए और कई समुद्र में बह गए।
3. अर्थव्यवस्था को नुकसान
सुनामी से प्रभावित देशों में व्यक्तियों के लिए दैनिक जीवन, सुरक्षा, खाद्य-सामग्री, राहत सामग्री, दवाईयों, की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। साथ ही सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण के दौरान भी बहुत खर्च आता है।
इसके कारण देश की सरकार पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय दबाव डलता है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक मंदी जैसे मुश्किलों का सामना से उस राष्ट को गुजरना पड़ता है।
4. रोग और संदूषण
सुनामी के बाद दूषित पानी और भोजन की आपूर्ति लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करती है। बाढ़ का पानी गंदगी या तेल जैसे संदूषण के कई स्रोतों को घरों और अन्य रहने वाले क्षेत्रों में ले जाता है।
इसके अलावा, सुनामी के बाद संक्रामक रोग बढ़ जाते हैं। मलेरिया और हैजा जैसे संक्रामक रोग आम बात हो सकते है।लोगों को भीड़ में एक ही राहत शिविरों में रहना पड़ सकता है जो फैलने वाली बीमारियों को आसान बनाता है।
5. गंभीर पर्यावरणीय परिवर्तन
सुनामी के आतंक के बाद, पहले से ही समुद्र तटीय शहर बंजर भूमि बन जाते हैं। मानव निर्माण के विनाश के अलावा, सुनामी वनस्पति जैसे वृक्षों को नष्ट कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप भूस्खलन और तट रेखाएं समुद्र में फिसल जाती हैं।
यह सभी प्राकृतिक परिवर्तन मानव निवासियों को एक नए रूप से पुनर्निर्माण करने के लिए मजबूर करते हैं। अपने जीवन को फिर से राह में लाने के लिए उन्हें बहुत समय लग जाता है।
सुनामी से बचने के 10 उपाय व प्रबंधन

सुनामी का सही अनुमान लगा पाना बहुत मुश्किल है। कोई नहीं जानता कि यह कब आएगी लेकिन इससे बचने के लिए हम कुछ उपाय कर सकते हैं-
1. किसी सुरक्षित जगहों पर चले जाएं
सुनामी आने पर सबसे पहले आप फौरन ही अपना जरूरी सामान अपने साथ ले लीजिए और घर को अच्छी तरीके से बंद कर दें और किसी ऊंचाई पर स्थित सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। यह सबसे अच्छा विकल्प होगा।
2. खड़े होकर सुनामी ना देखें
बहुत बार यह देखा गया है कि लोग जिज्ञासा वश सुनामी को एक मनोरंजन की चीज समझते हैं और जब समुद्र की ऊंची-ऊंची लहरें आती हैं तो वह खड़े होकर उसे देखने लग जाते हैं। कुछ लोग अपने फोन से फोटो लेने लग जाते हैं और वीडियो बनाने लग जाते हैं।
ऐसे लोग भी सुनामी का बड़ी मात्रा में शिकार हो जाते हैं क्योंकि लहरें बहुत तेज होती हैं और पल भर में सभी चीजों को निकल जाती हैं। इसलिए खड़े होकर सुनामी को ना देखें। तुरंत ही सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
3. सरकार आपातकालीन निकासी योजना बनाये
जिन समुद्र तटों पर सुनामी आने का खतरा सबसे अधिक है वहां पर सरकार को आपातकालीन निकासी योजना बनानी चाहिए जिससे अचानक से सुनामी आ जाने पर लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। हलाकी सरकार ने अब लगभग सभी सुनामी से खतरे वाले क्षेत्रों मे सुनामी से बचने के लिए ऊंचाई पर राहत शिविर बनाया है।
4. जानवरों, पक्षियों की हरकतों पर ध्यान दें
यह माना जाता है कि जानवर जैसे कुत्ते, गाय, भैंस और पक्षी मनुष्य से अधिक संवेदनशील होते हैं। वे प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को आसानी से समझ जाते हैं। अनेक बार यह देखा गया है कि कोई प्राकृतिक आपदा सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं।
उनको इसके बारे में पहले ही पता चल जाता है। इसलिए समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जानवरों और पक्षियों के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। यदि जानवर और पक्षी असामान्य व्यवहार करते हैं तो हमें उनका अनुसरण करना चाहिए और किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
5. सुनामी चेतावनी प्रणाली चेतावनी को सुनें
भारत सरकार ने सन 2007 में देशभर में अनेक स्थानों पर सुनामी चेतावनी सिस्टम लगाए हैं जो समुद्र में होने वाली सभी हलचलों, कम्पनो और भूकम्पों की जांच करके सुनामी के बारे में भविष्यवाणी करता है और चेतावनी देता है। हमारे देश की सरकार को चाहिए कि अत्याधुनिक सुनामी चेतावनी सिस्टम का विकास करें।
ऐसे यंत्र बनाएं जो सुनामी की तरंगों को शुरू होते ही पकड़ ले। इससे क्या लाभ होगा कि समुद्र तट पर रहने वाले लोगों को आसानी से चेतावनी देकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सकता है। मछुआरों को समुद्र में जाने से रोका जा सकता है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सुनामी चेतावनी को सुनते रहे।
6. समुद्र में आने वाले भूकंप की खबर रखें
आमतौर पर जब समुद्र में भूकंप उत्पन्न होता है तब ही सुनामी पैदा होती है। इसलिए समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूकंप की जानकारी रखनी चाहिए। रेडियो, टेलिविजन, इंटरनेट के द्वारा उनको नए समाचार लेते रहना चाहिए।
यदि समुद्र में 7।2 से अधिक क्षमता वाला भूकंप आया है तो सुनामी उत्पन्न होने की संभावनाएं बहुत अधिक है। इसलिए हर छोटे-बड़े भूकंप की जानकारी लेते रहें।
7. समुद्र तट से उचित दूरी पर घर, इमारतें,स्कूल और अन्य भवन बनाएं
सुनामी का शिकार सबसे अधिक वह बस्तियां होती हैं जो समुद्र तट से बिल्कुल किनारे पर बसी हुई होती हैं। सुनामी आने पर 10 से 20 मीटर ऊंची लहरें सबसे पहले पास की बस्तियों को नष्ट करती हैं। सारे मकानों को तोड़ देती हैं। इसलिए सबसे अच्छा उपाय है कि समुद्र तट से उचित दूरी पर घर मकान स्कूल कॉलेज और बस्तियां बसाई जाएं।
8. अपने क्षेत्र का सुनामी इतिहास जानें
जिस समुद्र तटीय इलाके में आप रह रहे हैं पता करें कि क्या वहां कभी सुनामी आई थी। आपको अपने शहर की लाइब्रेरी में यह जानकारी आराम से मिल जाएगी। यदि आपके शहर में भूतकाल में सुनामी आ चुकी है तो दोबारा भी आ सकती है। इसलिए आप पहले से तैयारी रखें।
9. आपातकालीन सुरक्षा किट बनाकर रखें
ऐसा करना बहुत ही समझदारी भरा काम होगा। यदि आप को डर है कि कभी भी सुनामी आ सकती है तो पहले से एक आपातकालीन सुरक्षा किट बना लें। इसमें पैसे (नकदी), सूखा भोजन, पीने का पानी, टॉर्च, बैटरी, रेडियो, मोबाइल फोन, चाकू रस्सी माचिस, मोमबत्ती, लालटेन जैसी चीजें रखें। यह सभी चीजें आपके आपातकालीन समय में बहुत काम आएंगी।
10. बचाव दल, एंबुलेंस, अग्नि शमन हेल्पलाइन का नंबर अपने पास रखें
सुनामी आने पर इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि आपके घर मकान टूट जाए और उसमें कोई व्यक्ति घायल हो जाए। इसलिए अपने पास सरकारी बचाव दलों के नंबर रखें। इसके अतिरिक्त डॉक्टर, एंबुलेंस और अग्निशमन हेल्पलाइन का नंबर जरूर रखें। कोई आपातकालीन स्थिति आने पर फोन कर कर तुरंत बुलाएं।
आशा करते हैं आपको सुनामी पर निबंध अच्छा लगा होगा।
सुनामी चेतावनी क्यों महत्वपूर्ण है?
समुद्र के भीतर भूकंप या अन्य कारण से उत्पन्न सुनामी बहुत तेजी से तटीय क्षेत्रों तक पहुँच सकती है। चेतावनी प्रणाली समुद्री स्तर और भूकंपीय गतिविधि से जुड़ी जानकारी का उपयोग करके जोखिम वाले क्षेत्रों को समय पर सतर्क करने का प्रयास करती है। चेतावनी मिलने पर तट से दूर ऊँचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए तथा आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए।
प्राकृतिक संकेतों को पहचानना
तटीय क्षेत्र में तेज या लंबे समय तक महसूस होने वाला भूकंप, समुद्र का अचानक असामान्य रूप से पीछे हटना या गर्जना जैसी स्थिति संभावित खतरे का संकेत हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में केवल मोबाइल संदेश की प्रतीक्षा करना उचित नहीं है। तट छोड़कर ऊँचे स्थान की ओर जाना और बाद की लहरों के जोखिम को ध्यान में रखना अधिक सुरक्षित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुनामी क्या है?
समुद्र में बड़े पैमाने पर पानी के विस्थापन से उत्पन्न लंबी तरंगों की श्रृंखला को सुनामी कहा जाता है।
सुनामी का मुख्य कारण क्या है?
समुद्र तल के नीचे शक्तिशाली भूकंप इसका प्रमुख कारण है, हालांकि ज्वालामुखीय गतिविधि और भूस्खलन भी कारण बन सकते हैं।
क्या हर समुद्री भूकंप से सुनामी आती है?
नहीं। भूकंप की गहराई, स्थान और समुद्र तल में होने वाले विस्थापन जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
सुनामी चेतावनी मिलने पर क्या करें?
तटीय क्षेत्र तुरंत छोड़ें, ऊँचे सुरक्षित स्थान पर जाएँ और आधिकारिक आपदा प्रबंधन निर्देशों का पालन करें।
क्या पहली लहर के बाद वापस लौटना सुरक्षित है?
जरूरी नहीं। सुनामी कई लहरों की श्रृंखला हो सकती है, इसलिए आधिकारिक सुरक्षित घोषणा तक वापस नहीं लौटना चाहिए।
स्रोत और संदर्भ
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सुनामी सुरक्षा सामग्री, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र की चेतावनी संबंधी जानकारी तथा आपदा प्रबंधन के मानक शैक्षिक स्रोत।

Thank you so much