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प्रतिभा पलायन पर निबंध Essay on Brain Drain in Hindi

प्रतिभा पलायन पर निबंध Essay on Brain Drain in Hindi (Talent Transfer in Hindi)
विषय सूची
  1. 1  प्रतिभा पलायन पर निबंध
  2. 2  निष्कर्ष निष्कर्ष
  3. 3  प्रतिभा पलायन की स्पष्ट परिभाषा
  4. 4  देशों के भीतर प्रतिभा का स्थानांतरण
  5. 5  अंतरराष्ट्रीय प्रवास के कारण
  6. 6  शिक्षा और कौशल का योगदान
  7. 7  चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभाव
  8. 8  अनुसंधान और नवाचार
  9. 9  कंपनियों के बीच पलायन
  10. 10  प्रतिभा प्रवाह की अवधारणा
  11. 11  प्रवासी समुदाय का योगदान
  12. 12  प्रेषण की भूमिका
  13. 13  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  14. 14  संबंधित प्रकाशित लेख
  15. 15  संदर्भ

प्रतिभा पलायन पर निबंध

प्रतिभा पलायन- इन शब्दों का आप क्या अर्थ निकाल सकते हैं। क्या गूंजता है मस्तिष्क में जब इन शब्दों को सुनते हैं ? क्या प्रतिभा भी पलायन कर सकती है ?

या प्रतिभा, किसी भी प्रकार की प्रतिभा किसी एक देश, क्षेत्र, या राज्य से बंधी होती है। क्या ऐसा होना मुमकिन है, प्रतिभा का किसी एक स्थान से बंध के रहना या उसकी जागीर होना।

प्रतिभा पलायन पर निबंध

प्रतिभा पलायन- इन शब्दों का आप क्या अर्थ निकाल सकते हैं। क्या गूंजता है मस्तिष्क में जब इन शब्दों को सुनते हैं ? क्या प्रतिभा भी पलायन कर सकती है ? या प्रतिभा, किसी भी प्रकार की प्रतिभा किसी एक देश, क्षेत्र, या राज्य से बंधी होती है। क्या ऐसा होना मुमकिन है, प्रतिभा का किसी एक स्थान से बंध के रहना या उसकी जागीर होना।

प्रतिभा पलायन, जिसे अंग्रेजी में ब्रेन ड्रेन भी कहा जाता है, कि परिभाषा है – उच्च शिक्षित एवं प्रशिक्षित मनुष्यों का एक स्थान (देश, क्षेत्र, राज्य, कंपनी) से दूसरे स्थान पर उपवास करना। अर्थात कम विकसित क्षेत्रों से ज्यादा विकसित क्षेत्रों की ओर कुशल व्यक्तियों की आवाजाही।

प्रतिभा पलायन के कारणवश कई देश, राज्य आदि अपने प्रतिभाशाली एवं शिक्षित श्रमिकों को खो देता है। देश अपने बहुमूल्य पेशेवर खो बैठते हैं, पेशेवर जैसे के डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर अथवा वित्तीय पेशेवर जब उतप्रवास करते हैं, तो दो बड़े प्रभाव सामने आते हैं – विशेषज्ञता खो जाती है, जिसके उपरांत किसी एक व्यवसाय की आपूर्ति में कमी आ जाती है। ब्रेन ड्रेन शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1960 में किया गया।

शिक्षित व्यक्तियों का प्रस्थान ज्यादातर अच्छे वेतन, बेहतर रहने की स्थितियां, जीवन की गुणवत्ता, उन्नत प्रौद्योगिकी एवं अच्छी राजनीतिक स्थितियों की खोज के कारण होता है। प्रतिभा पलायन को मानव पूंजी की उड़ान भी कहा जाता है और यह कई स्तर पर होता है अथवा इसके कई प्रकार हैं -:

भौगोलिक प्रतिभा पलायन भौगोलिक प्रतिभा पलायन

एक देश, राज्य, क्षेत्र से दूसरे देश, राज्य, क्षेत्र में प्रतिभाशाली पेशेवरों का पलायन।

संगठनात्मक प्रतिभा पलायन संगठनात्मक प्रतिभा पलायन

प्रशिक्षित पेशेवरों का एक संगठन से दूसरे संगठन में प्रस्थान, जिसका कारण हो सकता है पूर्व संगठन की अस्थिरता तथा अवसरों की कमी।

औद्योगिक प्रतिभा पलायन औद्योगिक प्रतिभा पलायन

एक उद्योग से दूसरे उद्योग की और कुशल श्रमिकों का प्रस्थान।

व्यक्तिगत वरीयता, पारिवारिक दबाव, कैरियर महत्वकाक्षाऐं, अवसरों की कमी, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक मंदी, स्वास्थ्य को जोखिम, कम वेतन : यही सब बिंदु मुख्यतः प्रस्थान का कारण बनते हैं। मानव पूंजी की उड़ान प्राप्त देशों के लिए ‘ब्रेन गेन’ होता है क्योंकि वह लाभ में है जबकि आवासीय देश मुख्यतः हानी में होते हैं, इसलिए ‘ब्रेन ड्रेन’ शब्द दिया गया।

एक सबसे अहम उदाहरण होगा अल्बर्ट आइंस्टीन का, जो कि एक मशहूर सिद्धांतिक भौतिक विज्ञानी रहे हैं, आइंस्टीन ने अमेरिका की ओर प्रस्थान किया था ताकि वह नाज़ी उत्पीड़न से बच सकें। सन 2000 में किए गए एक सर्वे के अनुसार लगभग 175 मिलियन लोग (दुनिया की 2.9% आबादी) अपने आवासीय देश से बाहर रहते हैं, जिनमें से 65 मिलियन लोग आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवास 1940 के दशक में पहली बार चिंता का कारण बना जब हजारों लाखों यूरोपीय पेशेवरों ने अपना घर छोड़कर इंग्लैंड तथा अमेरिका की ओर प्रस्थान किया। 1970 में हुए एक शोध के अनुसार W.H.O. ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें मुख्य रूप से प्रतिभा पलायन का बहाव दर्शाया गया था, रिपोर्ट के अनुसार 90% प्रवासी 5 देशों की ओर पलायन कर रहे थे, यह देश थे – ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड, अमेरिका तथा दाता देशों में सबसे अधिक एशियाई देश थे – भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, चाइना, आदि।

प्रशिक्षित, उच्च शिक्षित पेशेवर अथवा श्रमिक अपना देश क्यों छोड़ना चाहेंगे ? क्या उन्हें अपनी मिट्टी से प्रेम नहीं है ? अपनी जमीन छोड़ चले जाने से भावनाएं आहत नहीं होती होंगी ? क्या हम प्रवासी की भावनाओं को कभी समझ भी पाएंगे या नहीं ?

क्या परिणाम होते हैं उत्प्रवास के, क्या वाकई जीवन की गुणवत्ता बढ़े हुए वेतन से बढ़ जाती है ? प्रवासी अपना देश तो छोड़ जाता है पर उससे जुड़ी यादें जीवनभर जीवित ही रहती हैं। सरकार प्रतिभा पलायन को रोकने के लिए क्या प्रयास कर सकती है ? काफी सवाल है, और हर व्यक्ति के अनुसार अनगिनत जवाब।

प्रतिभा पलायन के कारण प्रतिभा पलायन के कारण

प्रतिभा पलायन होने के सबसे बड़े कारण है -:

  • हाल के वर्षों में कुछ चोटी के भारतीय विश्वविद्यालयों के कटऑफ अंक 100% के करीब तक पहुंचे, जिससे के काफी छात्रों को बहुत अच्छे अंक होने के बावजूद दाखिला लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर विदेशों में छात्रों को पढ़ाई के अवसर मिले और छात्रों ने मौके को बिल्कुल नहीं गंवाया क्योंकि, शिक्षा प्रणाली हमारे यहां ज्यादा कठोर है, कारणवश भारतीय छात्र आमतौर पर औरों से बेहतर ही माने जाते हैं इसलिए बाहरी विश्वविद्यालयों में इतनी दिक्कतें सामने नहीं आती।
  • उच्च शिक्षित पेशेवर भी उच्च अनुसंधान के लिए विदेश जाना ही पसंद करते हैं, कारण है भारत में संसाधनों और सुविधाओं का अभाव। प्रवासियों की पहली पसंद अमेरिका तथा इंग्लैंड है।
  • ज्यादातर विदेशों में पढ़ें छात्र वही रहना पसंद करते हैं, क्योंकि विदेशों मे काम की बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ अच्छा वेतन भी उपलब्ध है।
  • अच्छे वैश्विक अवसर एवं जीवन और सुविधाओं की उच्च गुणवत्ता प्रवासियों को हमेशा से ही विदेशों की ओर खींचती है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत युवा व प्रशिक्षित पेशेवरों के मामले में प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर कर आया है। आज से 20 वर्ष पहले ज्यादातर लोग अमेरिका, इंग्लैंड या यूरोप ही जाना पसंद करते थे, पर अब ज्यादा से ज्यादा पेशेवर पोलैंड, फ्रांस, आयरलैंड, स्वीडन जैसे देशों की ओर भी रुख कर रहे हैं।
  • उच्च एवं उत्तम शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत भी भारतीय कंपनियां कुछ खास वेतन अथवा संसाधन पेश नहीं करती, जिसके कारण काबिल पेशेवर विदेशों की ओर प्रस्थान करते हैं।

प्रतिभा पलायन के लाभ और हानि प्रतिभा पलायन के लाभ और हानि

प्रतिभा पलायन के अपने कुछ लाभ अथवा हानी भी है।

लाभ लाभ

  • प्रवासियों द्वारा भेजी गई धनराशि से उनके घरों के हालात सुधरे हैं एवं जीवन शैली बेहतर हुई है।
  • प्रतिभा पलायन के चुनिंदा फायदे – कम बाल श्रम, बच्चों की स्कूली शिक्षा में बढ़त, स्वरोजगार की उच्च दर, पूंजी प्रधान उद्दम का आरंभ।
  • अधिकतर व्यक्ति आर्थिक रूप से विकसित हुए हैं।
  • पेशेवरों पर ज्यादा अवसरों की बारिश।
  • पेशेवरों को वृतिक कौशल में बढ़ोतरी लाने की सुविधाएं मिली है।
  • व्यक्तियों को व्यवसायिकता के बेहतर अवसर मिले हैं, जिसके कारण जीवन के उच्च मानक प्राप्त हुए हैं।

हानी हानियाँ

  • जब एक उच्च शिक्षित और अशिक्षित व्यक्ति अच्छे अवसरों की तलाश में भारत छोड़कर विदेशों में पलायन करता है, तब हमारा देश अपनी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति व मुख्य पूंजी को खो देता है।
  • विदेशों की ओर प्रस्थान करने के कारण स्वदेश की सामाजिक पूंजी में भी गिरावट आती है।
  • प्रतिभा पलायन के कारण स्वदेश में शिक्षित पेशेवरों, प्रशिक्षित व्यक्तियों, सक्षम लोगों का अभाव एक चिंताजनक विषय है।
  • प्रशिक्षित पेशेवरों की भारी मात्रा में कमी।
  • प्रतिभा पलायन की भारी दर के कारण स्वदेश स्वयं अविकसित रह जाते हैं।
  • अधिकतर प्रस्थान के कारण स्वदेश के आर्थिक कारकों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।

निष्कर्ष निष्कर्ष

प्रतिभा पलायन एक चिंताजनक विषय है, और अगर नजर अंदाज किया गया तो शायद परिणाम अच्छे ना हो। भारत सरकार को प्रतिभा पलायन जैसे मुद्दे के लिए सख्त कदम उठाने ही होंगे। देश की प्रतिभा अगर देश में ही रहकर देश के हित में काम करें तो यही सबसे बेहतर होगा, इसी प्रकार हम पूर्ण रूप से अपना सामाजिक विकास कर पाएंगे।

प्रतिभा पलायन की स्पष्ट परिभाषा

जब उच्च शिक्षा या विशेष कौशल प्राप्त व्यक्ति काम, अध्ययन अथवा सुरक्षित जीवन के अवसरों के लिए दूसरे देश या क्षेत्र में जाता है, तो इस घटना पर प्रतिभा पलायन की चर्चा हो सकती है। हर प्रवास प्रतिभा पलायन नहीं होता। किसी व्यक्ति की यात्रा, अस्थायी पढ़ाई और स्थायी प्रवास के बीच अंतर जरूरी है।

देशों के भीतर प्रतिभा का स्थानांतरण

कई विशेषज्ञ एक राज्य से दूसरे शहर या ग्रामीण क्षेत्र से महानगर में जाते हैं। इससे कुछ क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी पैदा हो सकती है, जबकि दूसरे को लाभ मिलता है। इस अंतर को समझने के लिए क्षेत्रीय अवसर और सेवाओं की उपलब्धता देखनी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय प्रवास के कारण

बेहतर वेतन, शोध सुविधा, परिवार की जिम्मेदारी, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा जीवनशैली जैसे अलग कारण किसी व्यक्ति के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। सभी प्रवासियों का उद्देश्य एक जैसा नहीं होता। किसी दूसरे देश में काम करना देश के प्रति प्रेम की कमी का प्रमाण नहीं है।

शिक्षा और कौशल का योगदान

उच्च शिक्षा के लिए बेहतर प्रयोगशाला, विशेषज्ञ शिक्षक और आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण होते हैं। कुछ विद्यार्थी पढ़ाई के बाद वापस लौटते हैं, जबकि अन्य विदेश में काम जारी रखते हैं। दोनों अनुभवों का समाज पर प्रभाव अलग हो सकता है और समय के साथ बदल भी सकता है।

चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभाव

किसी क्षेत्र से बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर या नर्स बाहर जाते हैं तो स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। लेकिन कमी का पूरा कारण केवल प्रवास नहीं होता; प्रशिक्षण सीटें, सेवा परिस्थितियाँ तथा वितरण भी महत्वपूर्ण हैं। समाधान के लिए वास्तविक कर्मचारी आँकड़े और स्थानीय जरूरत समझें।

अनुसंधान और नवाचार

वैज्ञानिक अच्छी प्रयोगशालाएँ, स्थिर अनुदान तथा सहयोगी शोध वातावरण चाहते हैं। शोध संस्थाओं में निवेश और पारदर्शी अवसर प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग हमेशा हानि नहीं; साझा शोध से कई देशों को लाभ भी मिल सकता है।

कंपनियों के बीच पलायन

किसी संस्था से दूसरी संस्था में विशेषज्ञों का जाना भी कभी संगठनात्मक प्रतिभा पलायन कहलाता है। बेहतर काम परिस्थिति और उचित प्रबंधन कर्मचारियों को रोकने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। श्रमिकों की वैध नौकरी चुनने की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रतिभा प्रवाह की अवधारणा

आज कई विशेषज्ञ अलग देशों के बीच काम करके वापस आते या दूरस्थ रूप से सहयोग करते हैं। इस प्रक्रिया को प्रतिभा प्रवाह या ज्ञान का आदान-प्रदान कहा जा सकता है। इसे केवल एकतरफा स्थायी नुकसान मानने से आधुनिक प्रवास की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

प्रवासी समुदाय का योगदान

विदेशों में रहने वाले लोग अपने मूल देश के साथ परिवार, निवेश, अध्ययन और तकनीकी सहयोग के संबंध बनाए रख सकते हैं। यह योगदान व्यक्ति के अवसर और इच्छाओं पर निर्भर है। हर प्रवासी को धन भेजने या काम छोड़कर लौटने के लिए बाध्य करना उचित नहीं।

प्रेषण की भूमिका

कुछ प्रवासी अपने परिवारों को धन भेजते हैं, जिससे स्थानीय खर्च तथा शिक्षा में सहायता हो सकती है। लेकिन भेजी गई राशि का प्रभाव देश, परिवार और विनिमय स्थिति पर निर्भर करता है। इसे प्रतिभा पलायन के सभी सामाजिक प्रभावों का पूरा मापदंड नहीं मानना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतिभा पलायन क्या है?

विशेष कौशल वाले लोगों का दूसरे क्षेत्र या देश में अवसर के लिए जाना।

क्या विदेश पढ़ने जाना हमेशा प्रतिभा पलायन है?

नहीं। अस्थायी शिक्षा तथा स्थायी पेशेवर प्रवास अलग हैं।

क्या प्रवास से देश को केवल हानि होती है?

नहीं। ज्ञान, निवेश और सहयोग का लाभ भी हो सकता है।

प्रतिभा पलायन कम करने के उपाय क्या हैं?

शिक्षा, शोध, काम की स्थिति तथा स्थानीय अवसर बेहतर करना।

सही आँकड़े कैसे देखें?

माइग्रेशन की श्रेणी, समय और स्रोत की पहचान करें।

संबंधित प्रकाशित लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा करियर पर निबंध तथा वैश्वीकरण।

संदर्भ

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन तथा विश्व बैंक: प्रवासन।

टिप्पणियाँ (1)

1 टिप्पणियाँ

  1. प्रतिभा पलायन से पारिवारिक संबंधों पर भी नकारात्मक प्रभाव पङता है।

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