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कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जीवनी: 1824 Kittur War, British Resistance और Legacy

कित्तूर रानी चेन्नम्मा का इतिहास Kittur Rani Chennamma History in Hindi
विषय सूची
  1. 1  कित्तूर रानी चेन्नम्मा का इतिहास Kittur Rani Chennamma History in Hindi
  2. 2  रानी चेन्नम्मा का जन्म व प्रारंभिक जीवन Birth & Early Life of Rani Chennamma in Hindi
  3. 3  विवाह और पुत्र की मृत्यु Marriage & Son's Death
  4. 4  ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रानी चेन्नम्मा का विद्रोह Rebel Against British Government
  5. 5  रानी चेन्नम्मा का निधन (पुण्यतिथि) Death of Legend Kittur Rani Chennamma in Hindi
  6. 6  कित्तूर रानी चेन्नम्मा कि मृत्यु के बाद After Death Rani Chennama Information in Hindi
  7. 7  कित्तूर रानी चेन्नम्मा के स्मारक Memorials of Kittur Ki Rani Chennamma
  8. 8  कित्तूर रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व
  9. 9  Doctrine of Lapse से पहले succession dispute
  10. 10  1824 Kittur War
  11. 11  British counterattack और capture
  12. 12  Sangolli Rayanna की भूमिका
  13. 13  Rani Chennamma को freedom fighter क्यों कहा जाता है?
  14. 14  Kittur today
  15. 15  Related reading
  16. 16  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  17. 17  स्रोत और संदर्भ

इस लेख में आप कित्तूर रानी चेन्नम्मा का इतिहास Kittur Rani Chennamma History in Hindi पढ़ेंगे। इसमें आप रानी चेन्नम्मा का परिचय, जन्म, निजी जीवन, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह, निधन तथा समरकों के विषय में जानकारी दी गई है।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा का इतिहास Kittur Rani Chennamma History in Hindi

कित्तूर रानी चेन्नम्मा भारत की पहली महिला स्वतंत्रता प्रचारक थीं। वह ब्रिटिश साम्राज्य के सामने अकेली खड़ी थी, उसकी आँखें चमकीली और उग्र थीं। हालाँकि रानी चेन्नम्मा ब्रिटिश सरकार को भगाने में असफल रहीं, परंतु उन्होंने कई महिलाओं को ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया। 

कर्नाटक की एक रियासत, कित्तूर की रानी थी चेन्नम्मा रानी। कित्तूर रानी चेन्नम्मा के नाम से वह बहुत ही प्रचलित हैं। आइए उसके बारे में और जानें।

रानी चेन्नम्मा का जन्म व प्रारंभिक जीवन Birth & Early Life of Rani Chennamma in Hindi

रानी चेन्नम्मा का जन्म 1778 में झांसी की रानी लक्ष्मी बाई से लगभग 56 साल पहले काकतीय राजवंश, बेलगाम (उत्तर कर्नाटक का एक छोटा सा शहर) में हुआ था। उन्हें कम उम्र से ही घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी का प्रशिक्षण दिया गया था। वह अपनी बहादुरी के लिए अपने समुदाय में प्रसिद्ध थी।

विवाह और पुत्र की मृत्यु Marriage & Son’s Death

15 साल की उम्र में रानी चेन्नम्मा ने कित्तूर के राजा मल्लसरजा देसाई से शादी कर ली। 1816 में उनके पति की मृत्यु के बाद, उनका वैवाहिक जीवन दुखद लगने लगा। इस शादी से उनका केवल एक ही बेटा था, लेकिन भाग्य उनके जीवन के साथ एक क्रूर खेल खेल रहा था। 

1824 में उनके बेटे का निधन हो गया और वह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए अकेली रह गई। साल 1824 में अपने बेटे की मृत्यु के बाद उन्होंने शिवलिंगप्पा को अपना उत्तराधिकारी बनाया। अंग्रेजों ने रानी के इस कदम को स्वीकार नहीं किया और शिवलिंगप्पा को पद से  हटाने का आदेश दिया।

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रानी चेन्नम्मा का विद्रोह Rebel Against British Government

यहीं से कित्तूर रानी चेन्नम्मा का अंग्रेजों से टकराव शुरू हुआ और उन्होंने अंग्रेजों का आदेश स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अंग्रेजों की नीति ‘डाक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ (1848 और 1856) के तहत दत्तक पुत्रों को राज करने का अधिकार नहीं था। लेकिन कित्तूर रानी चेन्नम्मा ने आदेश को खारिज कर दिया।

रानी चेन्नम्मा ने कित्तूर में हो रही ब्रिटिश अधिकारियों की मनमानी को देखते हुए बॉम्बे प्रेसीडेंसी के गवर्नर को सन्देश भी भेजा था लेकिन लार्ड एलफिन्स्टोन ने बाहरी युद्ध के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

ब्रिटिश अधिकारी, कित्तूर की रानी चेन्नम्मा के खजाने और बहुमुल्य आभूषणों और जेवरात को हथियाना चाहते थे। उस समय रानी के खजाने की कीमत तकरीबन (पंद्रह लाख रुपये थी। 

इसीलिये ब्रिटिशों ने मुख्य रूप से मद्रास नेटिव हार्स आर्टिलरी के तीसरे दल के साथ 200 आदमियो और 4 बंदूको की विशाल सेना के साथ आक्रमण किया।

परंतु युद्ध के पहले दौर में, अक्टूबर 1824 के दौरान, रानी की सेनाओं द्वारा जॉन ठाकरे, और राजनीतिक एजेंट के साथ ब्रिटिश सेना की भारी हार हुई और कई लोग मारे गए । दो ब्रिटिश अधिकारी, सर वाल्टर इलियट और श्री स्टीवेंसन को बंधक बना लिया गया था।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा ने चैपलिन के साथ एक समझौते में बंधकों को रिहा कर दिया और युद्ध समाप्त हो गया लेकिन चैपलिन ने धोखेबाज़ी से और भी सैनिकों के साथ युद्ध जारी रखा। रानी चेन्नम्मा ने अपने लेफ्टिनेंट, संगोल्लीरायान्ना की सहायता से जमकर युद्ध की लड़ाई लड़ी। 

रानी चेन्नम्मा का निधन (पुण्यतिथि) Death of Legend Kittur Rani Chennamma in Hindi

ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ दूसरी लड़ाई में कित्तूर चेन्नम्मा और उनके डिप्टी संगोली रायन्ना ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। दुर्भाग्य से सेना में गद्दारों ने बारूद में गोबर मिलाकर रानी और उसके शीर्ष कमांडरों को धोखा दिया, हथियारों को बेकार कर दिया। 

रानी चेन्नम्मा को गिरफ्तार कर लिया गया और बैलहोंगल किले में कैद कर लिया गया। कित्तूर रानी चेन्नम्मा, जो उस समय 51 वर्ष की थीं, 2 फरवरी, 1829 को ब्रिटिश जेल में मृत्यु हो गई।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा कि मृत्यु के बाद After Death Rani Chennama Information in Hindi

कित्तूर रानी चेन्नम्मा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने कई दशकों तक इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी। उन्हें कर्नाटक में ओनाके ओबाव्वा, अब्बक्का रानी और केलाडी चेन्नम्मा के साथ साहस के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

रानी चेन्नम्मा अपने आप में एक महानायिक बन गई हैं। ब्रिटिश सरकार के प्रति उनका बहादुर प्रतिरोध स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नाटकों, गाथागीतों और गीतों की कहानियों का एक रूप बन गया।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा के स्मारक Memorials of Kittur Ki Rani Chennamma

रानी चेन्नम्मा को बैलहोंगल में दफनाया गया था, जो अब समाधि के स्मारक के रूप में कार्य करता है। पूर्व भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी 11 सितंबर, 2007 को भारतीय संसद परिसर में कित्तूर रानी चेन्नम्मा के स्मारक का उद्घाटन किया।

कित्तूर रानी चेन्नम्मा मेमोरियल कमेटी के सदस्यों का निर्माण विजय गौर ने किया था। अन्य रानी चेन्नम्मा स्मारक बेंगलुरु, कित्तूर, बेलगावी और हुबली में देखे जा सकते हैं।

आशा करते हैं आपको कित्तूर रानी चेन्नम्मा का इतिहास (Kittur Rani Chennamma History in Hindi) से रानी चेन्नम्मा के विषय में पूरी जानकारी मिल पाई होगी। 

और पढ़ें:

-रानी पद्मिनी – पद्मावती का इतिहास
-झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की जीवनी
-रानी दुर्गावती के जीवन का इतिहास

कित्तूर रानी चेन्नम्मा का ऐतिहासिक महत्व

Kittur Rani Chennamma 19वीं सदी की शुरुआती anti-colonial resistance leaders में गिनी जाती हैं। 1824 में Kittur की sovereignty को लेकर British East India Company से उनका संघर्ष हुआ, यानी 1857 के बड़े uprising से लगभग तीन दशक पहले। Ministry of Culture ने 2024–25 में उनकी 1824 victory की 200वीं anniversary पर national-level commemorations आयोजित कीं।

Doctrine of Lapse से पहले succession dispute

Rani Chennamma का conflict अक्सर Doctrine of Lapse से सीधे जोड़ा जाता है, लेकिन formal Doctrine of Lapse बाद में Lord Dalhousie के समय institutionalised हुई। Kittur case में adopted heir Shivalingappa की succession को East India Company ने स्वीकार नहीं किया और political control का प्रश्न conflict का कारण बना। इसलिए इसे broader British annexation policy context में समझना अधिक accurate है।

1824 Kittur War

British officials ने Kittur administration में हस्तक्षेप किया और tension armed conflict में बदली। Kittur forces ने शुरुआती encounter में British troops को serious setback दिया। Collector St. John Thackeray conflict में मारा गया। यह victory later Karnataka memory में resistance के powerful symbol के रूप में remembered हुई।

British counterattack और capture

Early success के बाद East India Company ने larger military force भेजी। Fort siege, internal pressures और military imbalance के कारण Kittur eventually British control में गया। Rani Chennamma को capture करके Bailhongal में imprisoned किया गया, जहाँ 1829 में उनकी death हुई।

Sangolli Rayanna की भूमिका

Rani Chennamma के associate Sangolli Rayanna ने British rule के खिलाफ resistance जारी रखा। Guerrilla-style attacks और local mobilisation के कारण वे भी Karnataka के anti-colonial memory में major figure बने। Rani Chennamma और Rayanna को same event में collapse करने के बजाय उनके अलग phases समझना चाहिए।

Rani Chennamma को freedom fighter क्यों कहा जाता है?

उनका struggle modern Indian nationalism के fully developed era से पहले का था, लेकिन British territorial expansion के खिलाफ sovereign resistance था। इसी कारण उन्हें India’s earliest women resistance leaders में honour किया जाता है। “First freedom fighter” जैसी absolute ranking से बचना बेहतर है, क्योंकि अलग regions में earlier anti-colonial uprisings भी हुए थे।

Kittur today

Kittur, Karnataka में memorials और museum उनकी legacy से जुड़े हैं। Government museum collections में arms, inscriptions और regional historical material रखा गया है। Visitors को current timings और access local/official museum sources से verify करना चाहिए।

Related reading

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Rani Chennamma किस राज्य से थीं?

Kittur, present-day Karnataka से।

British से war कब हुई?

1824 में।

क्या conflict Doctrine of Lapse के तहत हुआ?

Formal Doctrine of Lapse बाद में institutionalised हुई; Kittur dispute adopted heir and British annexation pressure से जुड़ा था।

Rani Chennamma की death कब हुई?

1829 में imprisonment के दौरान।

Sangolli Rayanna कौन थे?

Kittur resistance के प्रमुख military associate जिन्होंने बाद में भी British के खिलाफ संघर्ष जारी रखा।

200th anniversary कब commemorate हुई?

1824 victory की bicentenary commemorations 2024–25 में हुईं।

स्रोत और संदर्भ

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