साइलेंटघाटी आंदोलन Save Silent Valley movement in Hindi

इस लेख में हम आपको साइलेंटघाटी आंदोलन Save Silent Valley movement in Hindi के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

साइलेंटघाटी आंदोलन Save Silent Valley movement in Hindi

साइलेंटघाटी आंदोलन की पृष्ठभूमि

साइलेंट घाटी केरला में स्थित है। यह एक विशाल जंगल है जो केरला के पालघाट जिले में स्थित है। इस जंगल में  कुंथीपुज्हा नदी मुख्य रूप से बहती है। 1928 में कुंथीपुज्हा नदी के निकट सैरंध्री स्थान को राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए चिन्हित किया। यह जगह उनको बिजली उत्पादन के लिए आदर्श लगी।

1970 में केरला राज्य विद्युत बोर्ड ने इस स्थान पर जल विद्युत् बांध (हाइड्रो इलेक्ट्रिक डैम) बनाने का प्रस्ताव रखा जिससे 8.9 किलोमीटर का क्षेत्र पानी में डूब जाता। योजना आयोग ने इस बांध को बनाने के लिए 25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी।

साइलेंटघाटी आंदोलन की शुरूवात

जैसे ही बांध बनने की घोषणा हुई लोगों ने उसका विरोध शुरू कर दिया। शांति घाटी (साइलेंट वैली) अपने हरियाली पेड़ पौधों और जंगल के लिए जानी जाती है। यह क्षेत्र जैव विविधता से संपन्न है, इसलिए लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। शांति घाटी में लंबी पूंछ वाले मकाक बंदर भी पाए जाते हैं जिनको दुर्लभ प्रजाति समझा जाता है।

रोमुलस वीटाकर जिन्होंने मद्रास सर्प उद्यान की स्थापना की थी, उन्होंने सबसे पहले बांध योजना का विरोध करना शुरू किया। 1977 में केरला वन रिसर्च संस्थान ने सर्वे करना शुरु किया कि बांध बनने के बाद पर्यावरण को कितना नुकसान होगा।

शांति घाटी को बचाने के लिए “केरला शस्त्र साहित्य परिषद” ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कई पब्लिक मीटिंग की, इसमें लोगों को बांध बनने के बाद पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सुगाथाकुमारी जो केरला की विख्यात कवित्री थी, वह भी इस आंदोलन में जुड़ गई। उन्होंने “शांति घाटी बचाओ” (सेव साइलेंट वैली Save Silent Valley) का नारा दिया।

शांति घाटी को बचाने के लिए उन्होंने कई कविताएं भी लिखी जिन्होंने जिन्होंने आंदोलन में लोगो को जागरूक बनाया। डॉक्टर सलीम अली जो एक प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी थे और मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सदस्य थे उन्होंने इस जलविद्युत बांध परियोजना को बंद करने की अपील की। शांति घाटी के पेड़ों को काटने को रोकने के लिए केरला हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

डॉ एम एस स्वामीनाथन जो एक जाने-माने कृषि वैज्ञानिक थे और कृषि विभाग के सचिव थे उन्होंने शांति घाटी को एक आरक्षित पर्यावरण पार्क बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि शांति घाटी के 8.9 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र और इससे लगे हुए अमाराबालम (80 वर्ग किमी), अट्टापड्डी (120 वर्ग किमी), जैसे क्षेत्रों को मिलाकर एक प्राकृतिक पार्क बनाने की बात कही।

1980 जनवरी महीने में केरला हाईकोर्ट ने फिर से शांति घाटी के पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने केरल सरकार से इस जलविद्युत बांध परियोजना को बंद करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस पर विस्तार से विचार करना चाहिए, उसके बाद ही बांध बनाना चाहिए। 1982 में एक कमेटी बनाई गई जिसका चेयरमैन एन जी के मेनन और माधव गडगिल, दिलीप के विश्वास को बनाया गया।

कुछ अन्य लोग इस कमेटी में शामिल थे। 1983 में मेनन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट को अच्छी तरह पढ़ने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने शांति घाटी में बनने वाले जल विद्युत बांध परियोजना को बंद करने का आदेश दे दिया। 15 नवंबर 1984 को इसे एक राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दे दिया गया और इसे संरक्षित पार्क बना दिया गया।

7 सितंबर 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शांति घाटी नेशनल पार्क का उद्घाटन किया और सैरंध्री में इंदिरा गांधी का मेमोरी भी इस पार्क में बनाया गया। वर्तमान में यह घाटी नीलगिरी जैव विविधता पार्क के अंतर्गत संरक्षित कर ली गई है।

Featured Image -flickr

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