मुख्य सामग्री पर जाएँ

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण: 21 जून का महत्व, भाषण और सावधानियाँ

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण Speech on International Yoga Day in Hindi
विषय सूची
  1. 1  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण Speech on International Yoga Day in Hindi
  2. 2  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: विस्तृत भाषण और उपयोगी जानकारी

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण Speech on International Yoga Day in Hindi : सभी आदरणीय श्रोताओं को सुप्रभात। आज मैं आप सभी के साथ विश्व योग दिवस पर अपने विचार साझा करना चाहता हूं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण Speech on International Yoga Day in Hindi

आप सभी जानते हैं कि योग का महत्व जीवन में कितना ज्यादा है। योग की मदद से हम कई सारे विकारों को दूर कर सकते हैं। योग हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। अगर नियमित तौर पर, रोज सुबह उठकर योग का अभ्यास किया जाया करे, तो योग हर तरह के उपचार एवं चिकित्सा से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। 

आदरणीय श्रोताओं, आप सभी जानते हैं कि योग का महत्व जाने हुए हमें केवल कुछ ही साल हुए हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि योग को जन्म लिए कुछ ही दिन हुए हों। योग कई सदियों पुराना है और प्राचीन काल के मनुष्यों द्वारा इसका नियमित तौर पर अभ्यास किया जाता था।

आप सभी ने वेदों पुराणों और ग्रंथों में पढ़ा ही होगा कि प्राचीन लोग बहुत ही ज्यादा मजबूत और शक्तिशाली हुआ करते थे। ऐसा होने के कई कारणों में से एक योग भी है। योग का अभ्यास करने से शरीर को मजबूती मिलती है और हमारा शरीर भिन्न भिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार कर लेता है। 

योग शरीर के लिए फायदेमंद है, यह तो मैं आपको बता चुका हूं, लेकिन किस हद तक। क्या योग की शक्तियां सीमित हैं? बिल्कुल भी नहीं। योग करने के विभिन्न विभिन्न योगासनों का अभ्यास करना होता है और योग में कई ऐसे योगासन हैं जिनसे की अलग अलग विकारों को दूर किया जा सकता है, आंतरिक शरीर के अलावा ऐसा कोई बाह्य विकार नहीं हैं जिसे योग द्वारा दूर न किया जा सकता हो। योग को आप एक पूर्ण उपचार के रूप में भी देख सकते हैं। 

मैं अबतक आपको योग के फायदे और उसका इतिहास बता चुका हूं। मैं यह बता चुका हूं कि योग कितना ज्यादा फायदेमंद है। लेकिन आपके मन में यह सवाल नहीं कौंधता कि हमें योग के विषय में इतने समय बाद ही क्यूँ ज्ञात हुआ, पहले क्यूं नहीं।

ऐसा इस कारण की हम योग के प्रति बिल्कुल भी जागरूक नहीं थे। दरअसल योग को भारतीय संस्कृति और पिछड़ेपन के तौर पर देखा जाता था। हम दिन रात पश्चिम से आई जिम वाली कसरत की मशीनों पर खुद को घिसते रहते थे। ऐसा करने से केवल शरीर की ऊर्जा नष्ट होती थी, शरीर का विकास एवं विकरहीनता बिल्कुल भी नहीं। 

आज के दौर में जहां सभी लोग पश्चिमी सभ्यता के दीवाने हैं, पश्चिम द्वारा भी योग के महत्व को समझा गया है। उनके द्वारा भी यह माना गया है कि योग अत्यधिक फायदेमंद हैं। इसी कारण वर्ष 2014 के 11 दिसंबर को, संयुक्त राष्ट्र जनरल सभा द्वारा 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई। हमारे पूरे शरीर के लिए फायदेमंद योग के प्रति लोगों को जागरूक करने का यह फैसला सराहनीय और असरदार है।

इस फैसले का असर यह देखने को मिला है कि अलग अलग देशों की सरकारों ने योग के प्रति अपने नागरिकों को जागरूक किया है। विश्व में अनेकों देश इस दिन सामूहिक योग अभ्यास का आयोजन करते हैं। यह भव्य आयोजन होता है और योग के महत्व को दर्शाने की भरसक कोशिश की जाती है। 

भारत में भी योग दिवस के प्रति खासी रुचि देखने को मिलती है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा योग सभा का आयोजन किया जाता है जहां पर अनेकों स्कूली बच्चे भाग लेते हैं। पिछले वर्षों में यह संख्या हजारों में थी। यह एक सराहनीय प्रयास है क्यूंकि एक व्यक्ति के प्रभावित होने से पूरा एक परिवार प्रभावित होता है। 

एक भारतीय नागरिक के नजरिए से योग का मेरे जीवन में एक अलग महत्व भी है। योग एक ऐसी पद्धति है जिसका निर्माण भारतीय लोगों द्वारा किया गया है। यह गौरवान्वित करने वाला है। आप हर ओर देखते हैं कि पश्चिमी सभ्यता फैली हुई है, सब कुछ आधुनिक बनाने के कारण सभ्यता को पीछे छोड़ा जा रहा है।

लेकिन ऐसे में एक ऐसी पद्धति जिसका निर्माण भारतीयों द्वारा किया गया है, जिसका अभ्यास भारतीयों द्वारा सालों पहले किया जाता था, ऐसी पद्धति को विश्व स्तर पर मनाया जाना एक गौरवान्वित करने वाला पल है।

योग को इस स्तर पर पहुंचाने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा, संयुक्त राष्ट्र की सभा में अर्जी सितंबर में दाखिल की गई थी। उसके बाद कई बार चर्चा करने के बाद विश्व योग दिवस को मनाने की घोषणा की गई।

इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुल तीन महीने का समय लगा। लेकिन यह विश्वस्तर पर यह रिकार्ड है कि किसी ही देश द्वारा 90 दिनों के अंदर अर्जी को पास करा लिया गया हो। 

चर्चाओं के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संयुक्त राष्ट्रों के विभिन्न प्रतिनिधियों को योग के फायदों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होने कहा कि, “योग, प्राचीन भारतीय संस्कृति द्वारा, विश्व को दिया गया एक अनमोल तोहफा है।

योग द्वारा मष्तिष्क को एकाग्र किया जा सकता है। योग करने वाला व्यक्ति अपने शरीर को नियंत्रण में रख सकता है। इंद्रियों के ऊपर आपका नियंत्रण सराहनीय होता है। योग केवल एक उपचार से जुड़ी पद्धति ही नहीं, अपितु योग द्वारा आप आलौकिक रूप से ध्यान लगा सकते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा कही गई यह बातें काफी ज्यादा असरदार साबित हुईं और विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों द्वारा योग के महत्व को समझा गया और उसे अपनाया गया। अब योग का स्तर इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि विश्व के 170 से भी अधिक देश विश्व योग दिवस को मनाते हैं।

विश्व योग दिवस को मनाने वाले देशों में अमेरिका, चीन और कनाडा जैसे देश भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय प्राचीन सभ्यता कितनी ज्यादा धनी थी और कितनी ज्यादा महत्वपूर्ण है। 

योग एक भारतीय प्राचीन पद्धति है और एक भारतीय होने के नाते यह आपका और मेरा फर्ज बनता है कि हम विश्व को यह संदेश दें कि हम अपनी सभ्यता को कितना अधिक महत्व देते हैं। मैं आपसे यही गुजारिश करूंगा कि आप दैनिक रूप से नियमित तौर पर रोज सुबह उठकर, उचित योगासनों का अभ्यास करें। शुरुआत आप सूर्य नमस्कार से कर सकते हैं। इसका असर चमत्कारिक होगा। मेरे विचार सुनने के लिए आप सभी का धन्‍यवाद। 

जय हिंद 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: विस्तृत भाषण और उपयोगी जानकारी

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस क्यों मनाया जाता है

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हर वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को प्रस्ताव 69/131 के माध्यम से इस दिवस की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवनशैली पर विचार करने के लिए प्रेरित करना है। योग की जड़ें भारत की प्राचीन परंपराओं में हैं, लेकिन आज विभिन्न देशों और आयु वर्गों के लोग अपने स्वास्थ्य, रुचि तथा क्षमता के अनुसार इसका अभ्यास करते हैं।

विद्यालय में भाषण की शुरुआत कैसे करें

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों, आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज हम ऐसी परंपरा के बारे में बात करने के लिए एकत्र हुए हैं जो शरीर की गतिविधि, साँस और ध्यान को एक साथ देखने का अवसर देती है। योग को केवल कठिन आसनों की प्रतियोगिता न समझें। इसका वास्तविक अभ्यास अपने शरीर की सीमाओं को पहचानने, नियमितता अपनाने और दूसरों से तुलना करने के बजाय धीरे-धीरे सीखने का मार्ग दिखा सकता है।

योग और दैनिक दिनचर्या

विद्यार्थियों की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठकर पढ़ना, मोबाइल स्क्रीन देखना और परीक्षा की तैयारी करना शामिल हो सकता है। ऐसे में हल्की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और नियमित विश्राम जरूरी हैं। योग इनमें से कुछ आदतों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है, लेकिन यह अकेले सभी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान नहीं है। प्रतिदिन थोड़ा समय अपनी सुविधा के अनुसार अभ्यास के लिए निकालना, शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षक से मार्गदर्शन लेना उचित है।

साँस लेने के अभ्यास में सावधानी

योग से जुड़े श्वसन अभ्यास अलग-अलग प्रकार के होते हैं। शुरुआती लोगों को आरामदायक स्थिति में सामान्य साँस के साथ सरल अभ्यास शुरू करना चाहिए। बहुत तेजी से साँस लेने, लंबे समय तक साँस रोकने या असहज स्थिति में प्रयास करने से चक्कर या परेशानी हो सकती है। हृदय या फेफड़ों की बीमारी, गर्भावस्था, हाल की सर्जरी अथवा अन्य चिकित्सकीय स्थिति में प्रशिक्षित पेशेवर और डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। दर्द या साँस फूलने पर तुरंत अभ्यास रोकना चाहिए।

योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन

विद्यालय योग दिवस पर छोटा परिचय, प्रशिक्षक द्वारा सुरक्षित प्रदर्शन, चर्चा और प्रश्नोत्तर आयोजित कर सकता है। विद्यार्थियों की उम्र तथा शारीरिक क्षमता के अनुसार गतिविधियाँ चुनें। सभी बच्चों को कठिन आसन करने के लिए बाध्य न करें और जिनके लिए कुछ अभ्यास संभव नहीं हैं, उनके लिए वैकल्पिक गतिविधियाँ रखें। पीने का पानी, पर्याप्त स्थान और आराम की व्यवस्था भी जरूरी है। कार्यक्रम का उद्देश्य भागीदारी और सीखना हो, न कि सबसे कठिन आसन करने की होड़ लगाना।

एक मिनट का प्रेरक संदेश

प्रिय साथियों, स्वस्थ रहने का सफर छोटे-छोटे निर्णयों से शुरू होता है। आज हम यह संकल्प लें कि पढ़ाई और काम के बीच अपने शरीर को सक्रिय रखने के लिए समय निकालेंगे। अपने मन की स्थिति पर ध्यान देंगे और दूसरों की अलग-अलग क्षमताओं का सम्मान करेंगे। योग दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि निरंतर देखभाल का विषय है। अपने परिवार और मित्रों को भी सुरक्षित, संतुलित जीवन की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।

योग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

योग के कुछ अभ्यासों से शारीरिक सक्रियता, लचीलेपन और मानसिक विश्राम में लाभ मिल सकता है, लेकिन प्रभाव व्यक्ति, अभ्यास के प्रकार और स्वास्थ्य परिस्थिति पर निर्भर करते हैं। किसी आसन को सभी बीमारियों का निश्चित इलाज बताना गलत होगा। वैज्ञानिक शोध में अध्ययन के तरीके, प्रतिभागियों की संख्या और परिणाम की विश्वसनीयता देखी जाती है। इसलिए लोकप्रिय दावों के बजाय विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्थाओं की जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। निर्धारित दवाएँ या चिकित्सा केवल योग के भरोसे बंद नहीं करनी चाहिए।

भाषण का समापन और प्रश्नोत्तर

अंत में, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि खुद को समझने और जिम्मेदार स्वास्थ्य आदतों पर विचार करने का अवसर है। आइए हम नियमितता, धैर्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। किसी भी अभ्यास में कठिनाई आए तो शिक्षक या प्रशिक्षक से पूछने में संकोच न करें। आप सभी का धन्यवाद। प्रश्न: योग दिवस कब है? उत्तर: 21 जून। प्रश्न: पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कब मनाया गया? उत्तर: वर्ष 2015 में। प्रश्न: क्या सभी को एक जैसा योग करना चाहिए? उत्तर: नहीं, अभ्यास उम्र, क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार चुना जाना चाहिए।

स्रोत: संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस।

टिप्पणियाँ (1)

1 टिप्पणियाँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.