सूर्य नमस्कार शरीर की कई गतियों, श्वास और ध्यान को एक क्रम में जोड़ने वाला प्रसिद्ध योग अभ्यास है। इसमें खड़े होने, आगे झुकने, पैर पीछे ले जाने, शरीर को सहारा देने, रीढ़ को धीरे खोलने और फिर वापस खड़े होने तक कुल 12 स्थितियाँ शामिल होती हैं।
इसे अक्सर वजन घटाने, लचीलापन बढ़ाने, तनाव कम करने और पूरे शरीर के व्यायाम के रूप में प्रचारित किया जाता है। इनमें से कुछ लाभों के पक्ष में शोध मौजूद है, लेकिन सूर्य नमस्कार को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद, मासिक धर्म की समस्या या किसी अन्य बीमारी का निश्चित इलाज मानना सही नहीं है।
जुलाई 2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा ने 14 अध्ययनों को देखा। उसमें शारीरिक क्षमता, कुछ शारीरिक माप, शरीर संरचना और मानसिक कल्याण में संभावित सुधार की रिपोर्ट मिली, लेकिन अलग-अलग अध्ययनों की पद्धति, अभ्यास की अवधि और प्रतिभागियों में काफी अंतर था। इसलिए शोध आशाजनक है, पर बड़े और बेहतर नियंत्रित अध्ययनों की अभी जरूरत है।
सूर्य नमस्कार क्या है?
सूर्य नमस्कार एक गतिशील योग-क्रम है जिसमें 12 स्थितियों को क्रमवार किया जाता है। सभी 12 स्थितियाँ अलग-अलग आसन नहीं हैं; वापसी के समय कुछ स्थितियाँ दोहराई जाती हैं। इसलिए इसे “12 अलग आसनों” की जगह “12 स्थितियों का एक क्रम” कहना अधिक सही है।
भारतीय परंपरा में सूर्य प्रकाश, ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना गया है। कुछ लोग सूर्य नमस्कार को मंत्र और प्रार्थना के साथ करते हैं, जबकि कई लोग इसे केवल योग और शारीरिक गतिविधि के रूप में करते हैं। दोनों तरीके व्यक्तिगत उद्देश्य और आस्था पर निर्भर हैं।
| कुल स्थितियाँ | 12 |
| अभ्यास का स्वरूप | गतिशील योग-क्रम |
| मुख्य तत्व | गति, श्वास, संतुलन और ध्यान |
| शुरुआत | कम चक्र और धीमी गति से |
| समय | सुविधानुसार, भोजन के तुरंत बाद नहीं |
शुरू करने से पहले 8 जरूरी बातें
- समतल और फिसलन-रहित जगह चुनें।
- भोजन के तुरंत बाद अभ्यास न करें।
- पहले कुछ मिनट हल्का वार्म-अप करें।
- गति से पहले शरीर की सही स्थिति सीखें।
- शुरुआत में दूसरे लोगों की गति या संख्या की नकल न करें।
- तेज या चुभने वाला दर्द होने पर रुकें।
- चक्कर, सीने में दर्द या असामान्य सांस फूलने पर अभ्यास बंद करें।
- गंभीर बीमारी, हाल की सर्जरी, गर्भावस्था या पुरानी जोड़-रीढ़ की समस्या में डॉक्टर और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।
सूर्य नमस्कार की 12 स्थितियाँ और सही श्वास
1. प्रणामासन
सीधे खड़े हों। दोनों पैरों पर वजन लगभग बराबर रखें। हथेलियाँ छाती के सामने जोड़ें। कंधे ढीले रखें और सामान्य सांस लें। यह शरीर और मन को क्रम शुरू करने के लिए तैयार करने की स्थिति है।
2. हस्त उत्तानासन
सांस लेते हुए हाथ ऊपर उठाएँ। बाहों को कानों के पास रखें और छाती को ऊपर की ओर खोलें। शरीर के ऊपरी हिस्से को अपनी क्षमता के अनुसार हल्का पीछे ले जा सकते हैं, लेकिन कमर को जोर से न मोड़ें।
3. पादहस्तासन
सांस छोड़ते हुए कूल्हों से आगे झुकें। हाथों को पैरों के पास जमीन की ओर ले जाएँ। यदि जांघों के पीछे खिंचाव अधिक हो तो घुटने हल्के मोड़ना बिल्कुल ठीक है। माथा घुटनों से लगाना जरूरी नहीं है।
4. अश्व संचालनासन
सांस लेते हुए एक पैर पीछे ले जाएँ। सामने वाले पैर को दोनों हाथों के बीच रखें। आगे का घुटना टखने के आसपास रहे और छाती को धीरे ऊपर उठाएँ। गर्दन को जरूरत से ज्यादा पीछे न ले जाएँ।
5. दंडासन
दूसरा पैर भी पीछे ले जाएँ। सिर से एड़ी तक शरीर को लगभग सीधी रेखा में रखने की कोशिश करें। हथेलियाँ कंधों के नीचे हों। पेट को हल्का सक्रिय रखें और कमर को नीचे लटकने न दें।
6. अष्टांग नमस्कार
घुटनों को जमीन पर रखें। फिर नियंत्रित तरीके से छाती और ठुड्डी या माथे को जमीन के पास लाएँ। कूल्हे हल्के ऊपर रह सकते हैं। कंधे या कलाई कमजोर हों तो प्रशिक्षक से सरल विकल्प सीखें।
7. भुजंगासन
सांस लेते हुए छाती को आगे और ऊपर उठाएँ। कोहनियाँ हल्की मुड़ी रह सकती हैं। कंधों को कानों से दूर रखें। केवल हाथों के बल जोर से ऊपर उठने की बजाय पीठ और छाती की सहज गति पर ध्यान दें।
8. पर्वतासन
सांस छोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर और पीछे ले जाएँ। शरीर उल्टे ‘V’ जैसा दिख सकता है। एड़ियाँ जमीन तक पहुँचना जरूरी नहीं है। हाथों से जमीन को दबाते हुए रीढ़ को लंबा रखने की कोशिश करें।
9. अश्व संचालनासन
सांस लेते हुए पैर आगे लाएँ। अभ्यास को दोनों तरफ संतुलित रखने के लिए अगले क्रम में पीछे जाने वाला पैर बदलें। सामने का पैर हाथों के बीच रखें और छाती को सहज रूप से उठाएँ।
10. पादहस्तासन
दूसरा पैर आगे लाएँ और सांस छोड़ते हुए आगे झुकें। जरूरत हो तो घुटने मोड़ें। शरीर को जोर लगाकर पैरों से चिपकाने की कोशिश न करें।
11. हस्त उत्तानासन
सांस लेते हुए धीरे ऊपर आएँ, हाथ ऊपर ले जाएँ और अपनी सहज सीमा तक छाती खोलें। अचानक पीछे झुकने से बचें।
12. प्रणामासन
सीधे खड़े होकर हथेलियाँ छाती के सामने जोड़ें। सांस सामान्य करें। यह एक क्रम का अंत है। अगले क्रम में दूसरे पैर से अश्व संचालनासन शुरू करके दोनों तरफ समान अभ्यास किया जा सकता है।
श्वास कब लें और कब छोड़ें?
| स्थिति | सामान्य श्वास संकेत |
|---|---|
| प्रणामासन | सामान्य सांस |
| हस्त उत्तानासन | सांस लें |
| पादहस्तासन | सांस छोड़ें |
| अश्व संचालनासन | सांस लें |
| दंडासन | सहज नियंत्रित सांस |
| अष्टांग नमस्कार | सांस सहज रखें |
| भुजंगासन | सांस लें |
| पर्वतासन | सांस छोड़ें |
| अश्व संचालनासन | सांस लें |
| पादहस्तासन | सांस छोड़ें |
| हस्त उत्तानासन | सांस लें |
| प्रणामासन | सामान्य सांस |
शुरुआती व्यक्ति के लिए सबसे जरूरी बात सांस को जबरदस्ती रोकना नहीं है। यदि गति इतनी तेज है कि सांस बेकाबू हो जाए, तो अभ्यास धीमा करें।
शुरुआत में कितने सूर्य नमस्कार करें?
कोई एक संख्या सभी के लिए सही नहीं है। नया व्यक्ति 2 से 4 धीमे क्रम से शुरू कर सकता है। यदि शरीर अगले दिन सामान्य महसूस करे और तकनीक सही रहे, तो धीरे-धीरे संख्या बढ़ाई जा सकती है।
12, 24 या 108 सूर्य नमस्कार करना स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य संख्या नहीं है। धार्मिक या सामूहिक आयोजन में इन संख्याओं का अलग महत्व हो सकता है, लेकिन व्यायाम के लिए आपकी उम्र, क्षमता, स्वास्थ्य और गति ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
तेज और धीमे सूर्य नमस्कार में क्या अंतर है?
अभ्यास की गति बदलने पर शरीर की मांग भी बदलती है। 2024 के एक छोटे अध्ययन में तेज सूर्य नमस्कार के दौरान ऑक्सीजन की जरूरत, औसत हृदय गति और ऊर्जा खर्च धीमे अभ्यास की तुलना में अधिक पाया गया। इसका मतलब है कि “एक सूर्य नमस्कार कितनी कैलोरी जलाता है” जैसी एक निश्चित संख्या सभी के लिए सही नहीं हो सकती।
यदि आपका उद्देश्य लय, नियंत्रण और लचीलापन है तो धीमा अभ्यास अधिक सुविधाजनक हो सकता है। यदि आप स्वस्थ और अनुभवी हैं तो प्रशिक्षित मार्गदर्शन में तेज क्रम व्यायाम की तीव्रता बढ़ा सकता है।
सूर्य नमस्कार के संभावित फायदे
1. शरीर की गतिशीलता और लचक
आगे झुकने, पीछे खुलने, लंज जैसी स्थिति और पर्वतासन के कारण कूल्हे, कंधे, टखने, रीढ़ और पैरों के कई हिस्सों में गति होती है। नियमित अभ्यास से कुछ लोगों में लचक और गति की सहजता बेहतर हो सकती है।
2. कई मांसपेशी समूह एक साथ सक्रिय होते हैं
दंडासन में कंधे और पेट, अश्व संचालनासन में पैर और कूल्हे, पर्वतासन में कंधे और पैर तथा भुजंगासन में पीठ और छाती सक्रिय होते हैं। इसलिए यह केवल खिंचाव वाला अभ्यास नहीं है।
3. शारीरिक सहनशक्ति में मदद
लगातार कई क्रम करने पर हृदय गति और ऑक्सीजन की मांग बढ़ सकती है। अभ्यास की गति और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार यह हल्की से अधिक चुनौतीपूर्ण गतिविधि बन सकती है।
4. संतुलन और शरीर-जागरूकता
हर स्थिति को श्वास के साथ जोड़ने से शरीर की स्थिति, वजन का संतुलन और गति पर ध्यान बढ़ता है। यह शरीर-जागरूकता योग अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
5. तनाव प्रबंधन में संभावित मदद
नियंत्रित श्वास और ध्यान के साथ योग अभ्यास कुछ लोगों में तनाव कम करने और मानसिक शांति में मदद कर सकता है। लेकिन गंभीर चिंता, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या में इसे पेशेवर उपचार का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
योग की व्यापक जानकारी के लिए योग का महत्व और प्रकार तथा शुरुआती आसनों के लिए शुरुआती योगासन पढ़ सकते हैं।
क्या सूर्य नमस्कार वजन कम करता है?
सूर्य नमस्कार ऊर्जा खर्च बढ़ा सकता है, लेकिन अकेले इसी अभ्यास से कितना वजन घटेगा इसका निश्चित उत्तर नहीं है। वजन में बदलाव कुल भोजन, पूरे दिन की गतिविधि, नींद, स्वास्थ्य स्थिति और कितनी नियमितता से व्यायाम किया जाता है, इन सब पर निर्भर करता है।
तेज गति से अधिक ऊर्जा खर्च हो सकता है, लेकिन अधिक गति हमेशा बेहतर नहीं होती। खराब तकनीक के साथ बहुत तेज क्रम करने से कलाई, कंधे, घुटने या कमर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
क्या केवल सूर्य नमस्कार ही पर्याप्त व्यायाम है?
यह आपकी गति, समय और बाकी दिनचर्या पर निर्भर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए सप्ताह में लगभग 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट अधिक तीव्र गतिविधि और कम से कम दो दिन प्रमुख मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधि की सलाह देता है।
सूर्य नमस्कार आपकी कुल गतिविधि का हिस्सा हो सकता है, लेकिन चलना, साइकिल चलाना, शक्ति अभ्यास, संतुलन और रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हो सकती है। व्यायाम का महत्व वाला लेख इस संदर्भ को और स्पष्ट करता है।
किन बीमारियों के इलाज का दावा नहीं करना चाहिए?
सूर्य नमस्कार के बारे में इंटरनेट पर अक्सर लिखा मिलता है कि यह उच्च रक्तचाप “संतुलित” कर देता है, मधुमेह ठीक करता है, अवसाद दूर करता है, कब्ज समाप्त करता है, मासिक धर्म नियमित करता है या याददाश्त तुरंत बढ़ाता है। ऐसे निश्चित दावे उपलब्ध शोध से अधिक मजबूत हैं।
योग और शारीरिक गतिविधि कई स्वास्थ्य स्थितियों के प्रबंधन में सहायक हो सकती है, लेकिन दवा बंद करना, डॉक्टर की सलाह छोड़ना या किसी बीमारी का निदान किए बिना केवल योग पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
उच्च रक्तचाप या हृदय रोग में सावधानी
यदि आपको अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हाल का हृदयाघात, सीने में दर्द या व्यायाम पर असामान्य सांस फूलना होता है, तो तेज सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें। योग के कुछ हल्के रूप उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति की बीमारी और दवाओं के अनुसार अभ्यास बदलना पड़ सकता है।
कमर दर्द में सूर्य नमस्कार
कमर दर्द वाले हर व्यक्ति को आगे या पीछे झुकने वाला आसन “जरूर” करना चाहिए, यह सलाह सुरक्षित नहीं है। कमर दर्द के कारण अलग-अलग होते हैं। कुछ लोगों में हल्की गति आराम देती है, जबकि डिस्क, नस दबने या तीव्र चोट जैसी स्थितियों में कुछ मुद्राएँ दर्द बढ़ा सकती हैं।
यदि दर्द पैर तक जाए, सुन्नपन या कमजोरी हो, पेशाब-मल नियंत्रण में बदलाव हो, बुखार के साथ दर्द हो या चोट के बाद दर्द शुरू हुआ हो तो चिकित्सा जाँच जरूरी है।
कलाई और कंधे में दर्द हो तो क्या करें?
दंडासन, अष्टांग नमस्कार और पर्वतासन में हाथों पर वजन आता है। यदि कलाई में दर्द है तो सीधे पूरा वजन डालने की बजाय विशेषज्ञ से संशोधित मुद्रा सीखें। हाथों की दूरी, हथेली का दबाव और कंधे की स्थिति ठीक करना जरूरी है।
दर्द के बावजूद “अभ्यास से दर्द निकल जाएगा” सोचकर जोर लगाना चोट बढ़ा सकता है।
गर्भावस्था में सूर्य नमस्कार
गर्भावस्था में शरीर का संतुलन, जोड़ और पेट का आकार बदलता है। इसलिए सामान्य सूर्य नमस्कार क्रम को बिना बदलाव के शुरू या जारी करना हर गर्भवती के लिए सही नहीं है। पहले से योग करने वाली महिला को भी प्रसूति विशेषज्ञ और गर्भावस्था-योग में प्रशिक्षित व्यक्ति से सलाह लेकर अभ्यास बदलना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन गर्भावस्था में, जब कोई चिकित्सकीय निषेध न हो, नियमित मध्यम शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करता है; लेकिन कौन-सा योग क्रम उपयुक्त है यह व्यक्ति की गर्भावस्था पर निर्भर करता है।
मासिक धर्म के दौरान क्या करें?
मासिक धर्म में सूर्य नमस्कार करना या न करना व्यक्तिगत आराम पर निर्भर कर सकता है। यदि तेज दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव, कमजोरी या चक्कर हो तो आराम करें। सामान्य दिनों में हल्का अभ्यास ठीक लगता हो तो गति और संख्या कम रखी जा सकती है।
मासिक धर्म को नियमित करने की गारंटी के रूप में सूर्य नमस्कार का प्रचार नहीं करना चाहिए। बार-बार अनियमितता, बहुत अधिक रक्तस्राव या गंभीर दर्द हो तो चिकित्सकीय कारणों की जाँच जरूरी है।
बच्चे और बुजुर्ग सूर्य नमस्कार कर सकते हैं?
स्वस्थ बच्चे प्रशिक्षित देखरेख में सरल क्रम सीख सकते हैं। बच्चों में गति की होड़ या अत्यधिक संख्या पर जोर देने की बजाय सही तकनीक और आनंद पर ध्यान देना चाहिए।
बुजुर्गों में संतुलन, घुटने, कूल्हे, कलाई, रक्तचाप और हृदय की स्थिति देखकर क्रम बदलना पड़ सकता है। कुर्सी, दीवार या ऊँचे सहारे के साथ संशोधित योग कई लोगों के लिए अधिक सुरक्षित हो सकता है।
क्या सूर्य नमस्कार से विटामिन डी मिलता है?
सूर्य नमस्कार की मुद्राएँ विटामिन डी नहीं बनातीं। शरीर में विटामिन डी का निर्माण त्वचा पर सूर्य की पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से हो सकता है। यह समय, मौसम, स्थान, त्वचा का रंग, कपड़े और सूर्य संपर्क जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। घर के अंदर सूर्य नमस्कार करने से अपने-आप विटामिन डी नहीं मिलेगा।
सुबह ही सूर्य नमस्कार करना जरूरी है?
परंपरागत रूप से सूर्योदय के आसपास अभ्यास लोकप्रिय है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए केवल सुबह ही करना अनिवार्य नहीं है। ऐसा समय चुनें जब पेट बहुत भरा न हो, शरीर सहज हो और आप नियमित अभ्यास कर सकें।
यदि सुबह समय नहीं मिलता और शाम में अभ्यास आपको आरामदायक लगता है, तो केवल समय के कारण अभ्यास छोड़ने की जरूरत नहीं है।
क्या सूर्य नमस्कार के मंत्र बोलना जरूरी है?
नहीं। मंत्र आध्यात्मिक या धार्मिक अभ्यास का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन शारीरिक योग-क्रम के लिए मंत्र अनिवार्य नहीं हैं। कोई व्यक्ति अपनी आस्था, परंपरा और उद्देश्य के अनुसार मंत्र के साथ या बिना मंत्र सूर्य नमस्कार कर सकता है।
सूर्य नमस्कार की 10 सामान्य गलतियाँ
- पहले दिन ही बहुत ज्यादा क्रम करना।
- तेज गति को सही तकनीक से अधिक महत्व देना।
- श्वास रोकना।
- आगे झुकते समय घुटने सीधा रखने के लिए कमर पर जोर डालना।
- भुजंगासन में कंधे कानों तक चढ़ा लेना।
- दंडासन में कमर नीचे लटकाना।
- कलाई के दर्द को नजरअंदाज करना।
- दोनों पैरों से समान क्रम न करना।
- दर्द होने पर भी अभ्यास जारी रखना।
- किसी बीमारी की दवा छोड़कर सूर्य नमस्कार को इलाज मान लेना।
4 सप्ताह की शुरुआती योजना
| सप्ताह | अभ्यास का सुझाव |
|---|---|
| पहला सप्ताह | 2 से 4 धीमे क्रम, स्थिति और श्वास सीखें |
| दूसरा सप्ताह | 4 से 6 क्रम, दोनों तरफ संतुलन पर ध्यान |
| तीसरा सप्ताह | क्षमता के अनुसार 6 से 8 क्रम, गति थोड़ी सहज करें |
| चौथा सप्ताह | तकनीक सही रहे तो संख्या या समय धीरे बढ़ाएँ |
यह कोई चिकित्सकीय कार्यक्रम नहीं है। यदि आपकी उम्र अधिक है, आप लंबे समय से निष्क्रिय हैं या कोई पुरानी बीमारी है तो इससे भी धीमी शुरुआत अधिक उपयुक्त हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य नमस्कार में कितनी स्थितियाँ होती हैं?
एक क्रम में 12 स्थितियाँ होती हैं। इनमें कुछ स्थितियाँ वापसी में दोहराई जाती हैं।
क्या रोज सूर्य नमस्कार करना जरूरी है?
नहीं। नियमित शारीरिक गतिविधि उपयोगी है, लेकिन आवृत्ति आपकी क्षमता, बाकी व्यायाम और स्वास्थ्य के अनुसार तय होनी चाहिए।
क्या 12 सूर्य नमस्कार पर्याप्त हैं?
12 कोई जादुई संख्या नहीं है। सही संख्या आपकी गति, तकनीक, फिटनेस और बाकी शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है।
क्या सूर्य नमस्कार वजन कम करता है?
यह ऊर्जा खर्च बढ़ा सकता है, लेकिन वजन घटाने के लिए कुल भोजन, गतिविधि और लंबे समय की आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
क्या उच्च रक्तचाप में सूर्य नमस्कार करना चाहिए?
नियंत्रित स्थिति में कुछ योग उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन तेज सूर्य नमस्कार हर उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति के लिए सही नहीं है। अनियंत्रित रक्तचाप या हृदय रोग में पहले डॉक्टर से सलाह लें।
क्या खाली पेट करना चाहिए?
भरे पेट की तुलना में खाली या हल्के पेट अभ्यास अधिक आरामदायक रहता है। भोजन के तुरंत बाद कठिन क्रम से बचें।
निष्कर्ष
सूर्य नमस्कार एक उपयोगी गतिशील योग-क्रम है जो शरीर के कई हिस्सों को सक्रिय करता है और नियमित शारीरिक गतिविधि का हिस्सा बन सकता है। नवीनतम शोध संभावित शारीरिक और मानसिक लाभ दिखाता है, लेकिन अभी इसे किसी बीमारी के निश्चित उपचार के रूप में प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
सबसे अच्छा तरीका है कम क्रम से शुरुआत करना, श्वास और तकनीक सीखना, दर्द में जोर न लगाना और अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे आगे बढ़ना। यदि कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, हाल की सर्जरी या लगातार दर्द है तो व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।









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